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बिस्कोमान की करतूतों के लिए सतर्कता जांच

Posted on 27 March 2011 by ajayjha

भारतीयसहकारिता.कॉम की यह एक छोटी जीत है कि बिहार सरकार ने गुरुवार को बिस्कोमान के क्रिया-कलापों की जांच के लिए सतर्कता जांच के आदेश दे दिए. जांच समिति तीन महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और इस प्रकार आरोपों के पीछे की सच्चाई का पर्दाफास करेगी.

पाठकों को मालूम होगा कि भारतीयसहकारिता.कॉम ने लगभग दो महीने पहले घोटाला को उजागर किया था और इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी. मामला सिद्धार्थ सहकारी समिती से संबंधित है जिसे भारतीय खाद्य निगम से अनाज की खरीद के लिए Biscomaun ने एक करोड़ रुपये दिए थे. भारतीय खाद्य निगम ने अनाज की खरीद के लिए बिस्कोमान को 3 करोड़ रुपये दिए थे.

काहा जाता है कि सिद्धार्थ सहकारी समिति ने रोहतास, कैमूर, बक्सर और भोजपुर में खुले बाजार से अनाज खरीदा था और उसे भारतीय खाद्य निगम को Biscomaun के माध्यम से ही भेजा.

कोयला घोटाले का मामला भी बिस्कोमान से जुड़ा है जिसमें सब्सीडी वाला कोयला ऐसी एजेंसियों को बेचा गया जिनका अस्तित्व ही नही था.  उद्योग निदेशक ने कोल-फिल्ड इंडिया लि. को पत्र लिखा था जिसमें Biscomaun में हो रही धांधलियों का जिक्र था. अपने पत्रांक 1342 में बिहार सरकार के उद्योग निदेशक ने सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड को सूचित किया था कि उनके द्वारा निरीक्षण के दौरान पाया गया है कि Biscomaun ने कोयला ऐसे उद्योगों को आवंटित किया था जो या तो थे ही नहीं या बंद हो गए थे.

यह सर्वविदित है कि Biscomaun छोटे उपभोक्ताओं को कोयला वितरण के लिए राज्य एजेंसी के रूप में राज्य सरकार द्वारा नामित है. यह सूचना प्राप्त होने के बाद सीसीएल ने बिहार सरकार से निवेदन किया कि या तो कोयला वितरण पर निगरानी रखी जाय या Biscomaun को इस काम से हटा दिया जाय.

निलंबन के बाद Biscomaun हाईकोर्ट चला गया जहां इसके पक्ष में फैसला दिया गया और उसकी पूर्व स्थिति बहाल हो गई लेकिन साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को मामले की जांच का भी निदेश दिया.

बिहार विधानसभा में गुरुवार को सहकारिता मंत्री ने विधायक की समिति द्वारा जांच की मांग की थी लेकिन उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने हस्तक्षेप किया और कहा कि राज्य सतर्कता समिति मामले की जांच के लिए सक्षम है.

मोदी ने विरोधी पक्ष की भी खिचाई की जिसमें से ज्यादातर इस मुद्दे पर चुप रहे. यह सर्वविदित है कि Biscomaun के अध्यक्ष सुनील सिंह, लालू प्रसाद यादव के राजद के करीबी हैं. भाजपा के विनय सिंह ने  मामले को सभा में उठाया था.

3 Comments For This Post

  1. ajayjha Says:

    यह प्रयास सराहनीय है. इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और जनता के हितों की रक्षा होगी.

  2. रमेश कुमार Says:

    सफलता के लिये बधाई.

  3. ajayjha Says:

    धन्यवाद

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