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Archive | January, 2011

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NCUI: मुख्य कार्यकारी का चयन जारी

Posted on 28 January 2011 by ajayjha

NCUI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन के लिए हुए साक्षात्कार का परिणाम अभी तक आना बाकी है.  सूत्रों के मुताबिक चयनकर्ताओं के पैनल के भीतर अंतर्विरोध के कारण इस प्रक्रिया को एक झटका लगा है.

पैनल मे चार लोग शामिल थे – NCUI के अध्यक्ष,  केन्द्रीय रजिस्ट्रार, NCUI के उपाध्यक्ष जी एच अमीन और संगठन के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री बी.डी.शर्मा.

पैनल में बी.डी.शर्मा की मौजूदगी पर कई लोगों ने सवाल उठाया है. सूत्रों के अनुसार, श्री शर्मा को चयन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए एक विशेषज्ञ के रूप में योग्य पाया गया था.

यह भी कहा जा रहा है कि केंद्रीय रजिस्ट्रार इस बात से खुश नहीं है कि अनीता मनचंदा जो साक्षात्कार की पात्रता के मानदंड को भी पूरा नहीं करती थीं को सूचीबद्ध किया गया. उनको फिर भी इस कमजोर तर्क पर सूचीबद्ध किया गया था कि वह एक्टिंग मुख्य कार्यकारी हैं .

जो भी कारण हो, यह वास्तव में दुःखद है कि सहकारी समितियों का शीर्ष संगठन पिछले दो वर्षों से एक उपयुक्त मुख्य कार्यकारी ढूँढने में सफल नहीं हुए.

इस बार भी साक्षात्कार को सम्पन्न हुए एक महीने से भी अधिक हो गया है.

पाठकों को पता होगा कि 10 उम्मीदवारों को सूचीबद्ध किया गया था, जिसमें शामिल हैं - एक आईएएस अधिकारी और एक पूर्व वन सेवा अधिकारी, श्री   वी.एस. राव;  गोवा सरकार में खाद्य सचिव, श्री अमित प्रसाद; पूर्व आईएफएस और वर्तमान में कृभको में मानव संसाधन निदेशक के रूप में कार्यरत.

कुछ अन्य उच्च प्रोफ़ाइल उम्मीदवार  दौड़ की शुरुआत में ही पिछड़ गये थे.  FISHCOFED के एमडी बीके मिश्रा उन में से एक हैं और NCUI के एस सत्यनारायण दूसरे नंबर पर हैं.

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नाबार्ड असफल: सुधाकरन

Posted on 28 January 2011 by ajayjha

केरल के सहकारिता मंत्री श्री जी सुधाकरन ने सोमवार को कहा कि यूपीए सरकार की नीतियों के कारण सहकारिता क्षेत्र खतरे में है क्योंकि सरकार सहकारी बैंकों के मूल रूप को बदलने के प्रयास में है.केरल सहकारिता कर्मचारी संघ के 24 वें राज्य सम्मेलन के अवसर पर उद्घाटन भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में मजबूत सहकारी आंदोलन उन नीतियों के खिलाफ लड़ेगा जो एक सहकारी बैंक की स्थापना के बुनियादी सिद्धांतों का विरोध करतीं हैं.

उन्होंने कहा कि ”राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) राज्य में कृषि क्षेत्र में पूरी तरह से असफल रहा है. श्री सुधाकरन ने कहा कि केन्द्र सरकार के दिशानिदेशों के अनुसार जब सहकारी बैंक किसानों को 7 प्रतिशत की दर पर ऋण दे रहे थे,  उस समय नाबार्ड की सब्सिडी का कहीं अता-पता नही था.

श्री सुधाकरन ने घोषणा की कि प्राथमिक सहकारी समितियों और कृषि विकास समितियों के कर्मचारियों का वेतन-पुनरीक्षण 15 फ़रवरी के पहले घोषित किया जाएगा.  उन्होंने आगे कहा कि सहकारी बैंकों को अपनी संपत्ति को बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए.  समारोह की अध्यक्षता श्री वी. कुन्हीकृष्णन - KCEU के अध्यक्ष ने की.  एम.एम. मोनय – विधायक और दूसरों ने इस अवसर पर अपने विचार रखे.

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नागपुर में सहकार परिषद

Posted on 23 January 2011 by ajayjha

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने शनिवार को शहरी सहकारी बैंक की इसलिए आलोचना की कि उन्होंने अपने निर्देशकों के रिश्तेदारों को ऋण दिए. उन्होंने यह भी कहा कि यह उपयुक्त समय है जब निर्देशकों  को  बैंकों के काम करने के बारे सही जानकारी हो जाय.

“बैंकों के कई अध्यक्षों को एनपीए का अर्थ और वसूली प्रणाली का पता भी नहीं है” - उन्होंने कहा.  राज्य के शहरी सहकारी बैंकों के निदेशकों की दो दिवसीय ‘सहकार-परिषद’ के उद्घाटन के बाद बोलते हुए उन्होंने लोगों के बीच विश्वास पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया.

रविवार को सम्मेलन के समापन सत्र में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण मुख्य अतिथि होंगे.

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कांगड़ा सहकारी बैंक में भारी रिक्तियां

Posted on 22 January 2011 by ajaykishor

कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक, जो उत्तर भारत में सबसे बड़ा सहकारी बैंक है, के अध्यक्ष रासिल सिंह मनकोटिया ने कहा है कि इसमें  वर्तमान सभी 392 रिक्त पदों को अगले 3 महीनों में भर दिया जाएगा.  उन्होंने आगे कहा कि इन पदों के लिए आवेदन एक सप्ताह के अंदर आमंत्रित किए जाएंगे.

अधिक जानकारी के लिए- http://www.kangrabank.com - पर लॉग करें.

बैंक ने हाल ही में विभिन्न श्रेणियों के 176 अधिकारियों को प्रोन्नति दी है. मनकोटिया ने कहा कि बैंक की स्थापना 1920 में हुई जिसका मुख्यालय धर्मशाला में था.

इस बैंक ने पिछले वर्ष 47.19 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया.  बैंक इस साल 17 मार्च को कुल्लू में अपना स्थापना दिवस मनाने जा रहा है.

अभी हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कांगड़ा सहकारी बैंक लिमिटेड को सबसे अच्छा सहकारी बैंक होने का पुरस्कार दिया है. यह पुरस्कार इस बैंक को लगातार लगातार तीसरे वर्ष मिला है. यह पुरस्कार बैंक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री बी आर शर्मा ने नई  दिल्ली में आयोजित एक समारोह में संयुक्त रूप से ग्रहण किया.

दिल्ली स्थित बैंक की 300 करोड़ रुपये से अधिक की कार्यशील पूंजी है और इसके सदस्यों की संख्या 40,000 है.

इसे अनुसूचित बैंक का दर्जा दिया जाना भारतीय रिजर्व बैंक के  विचाराधीन के लिए था.

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आरबीआई: सहकारी बैंक संपत्ति का 5% तक ऋण देंगे

Posted on 22 January 2011 by ajayjha

रिजर्व बैंक ने कहा है कि सहकारी बैंक अपनी कुल संपत्ति का 5 प्रतिशत से अधिक आवास ऋण के रूप में नहीं दे सकते हैं.  इससे पहले, राज्य और केंद्रीय सहकारी बैंकों को 10% तक की अनुमति दी गई थी.  इन बैंकों को कहा गया है कि वे छः माह के अन्दर संशोधित सीमाओं  को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं.

आर.बी.आइ का कहना है कि राज्य और केंद्रीय सहकारी बैंकों की संपत्ति का पिछले वित्तीय वर्ष के ऑडिट के आधार पर आकलन किया जाएगा.

इस निर्णय से ऋणदाताओं की अचल संपत्ति के लिए जोखिम में कटौती होगी.  आवास ऋण  के लिए उपरोक्त संशोधित सीमा तत्काल प्रभाव से लागू होगी.

राज्य और केंद्रीय सहकारी बैंकों को पहले एक व्यक्ति को 20 लाख रुपये तक आवास ऋण देने की अनुमति थी. 100 करोड़ और इससे अधिक की निवल मूल्य वाले बैंक के मामले में यह सीमा 30 लाख रुपए थी.

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इफकोः एन. सी. पटेल नए अध्यक्ष निर्वाचित

Posted on 21 January 2011 by ajayjha

इफको बोर्ड ने शुक्रवार को आयोजित बैठक में श्री एन.सी. पटेल को नए अध्यक्ष और बलविंदर सिंह नकेल को उपाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित कर लिया. नेताओं के चुनाव सर्वसम्मति से सम्मपन्न हुए.  श्री पटेल पूर्व में बोर्ड के उपाध्यक्ष थे.   वे गुजरात से हैं और वे सहकारिता में सामान्य रूप से और  इफको में खास रूप से लंबे समय तक काम कर चुके हैं.  श्री बलविंदर सिंह भी इफको के साथ 2 दशकों से अधिक समय से जुड़े रहे हैं.

बोर्ड की आज की बैठक में सभी 27 सदस्य उपस्थित थे और निर्वाचन अधिकारी श्री आर.डी. अग्रवाल ने दो सदस्यों को निर्वाचित घोषित किए.

भारतीयसहकारिता.कॉम से बात करते हुए बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य श्री शीश पाल ने कहा कि चुनाव आम सहमति पर आधारित था और वे लोग श्री पटेल और श्री नकेल की उच्च पदों पर नियुक्ति से खुश हैं.  उत्तराखंड से बोर्ड के सदस्य श्री त्रिपाठी ने इसी तरह की भावना व्यक्त की और इफको की सफलता में श्री पटेल की भूमिका की सराहना की.

एक सच्चे  गांधीवादी श्री पटेल गुजरात राज्य के एक प्रमुख सहकारिता नेता रहे हैं.  उनके सरल और शिष्ट व्यवहार की दृष्टि में, उम्मीद है कि इफको को सहकारिता क्रांति की ऊंचाई को छूने और सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा मिलेगी.

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इफको बोर्ड की बैठक आज

Posted on 20 January 2011 by ajayjha

इफको ने अपने अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जाखड़ के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए आज बोर्ड की बैठक बुलाई है.

नई दिल्ली - साकेत में स्थित ”इफको सदन”  में भी शाम में आम शोक सभा होगी. अपने शोक संदेश में प्रबंध निदेशक श्री अवस्थी ने कहा कि इफको ने अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जाखड़ की मौत से अपना एक शक्ति-स्तंभ खो दिया है. उन्होंने कहा कि नेता के प्रस्थान से बने शून्य को भरना मुश्किल होगा.

बोर्ड के बाइ-लॉ के मुताबिक श्री जाखड़ के अभाव में बैठक की अध्यक्षता श्री एन.सी. पटेल करेंगे.  गांधीवादी नेता श्री पटेल इफको के उपाध्यक्ष हैं.  इस बोर्ड की बैठक हालांकि शोक प्रकट करने के लिए बुलाई गई है, फिर भी इसमें अहम मुद्दों पर चर्चा होगी.

बोर्ड के सामने सबसे अहम सवाल नए अध्यक्ष के चुनाव का है.  पाठकों को पता है कि इफको के चेयरमैन श्री सुरेंद्र जाखड़ का सोमवार को आकस्मिक निधन हो गया.

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सुरेंद्र जाखड़: संवेदना का सैलाब

Posted on 20 January 2011 by Vaibhav

हर व्यक्ति का एक व्यक्तित्व होता है. यह उसके पद या उसकी शक्ति पर निर्भर नहीं करता. आदमी की सहज सरलता ही है जो या तो लोगों को आकर्षित करती है या दूर भगाती है.  बदकिश्मती से किसी-किसी की वास्त्विक पहचान उसकी मौत के बाद स्पष्ट होती है. सुरेंद्र जाखड़ का व्यक्तित्व बहुत विशाल था जिसका अंदाजा उनकी मृत्यु के बाद ही लग पाया. दोस्त और दुश्मन सभी कतार में खड़ा होकर अलविदा कह रहे थे. उनमें मतभेद तो हो सकता था लेकिन ईर्ष्या-द्वेष जैसी कोई बात नहीं थी.

इफको परिवार तो इस समाचार से पूरी तरह से स्तब्ध है और अभी तक सदमे से बाहर नहीं आया है. दुनिया भर से उनके लिए शोक संदेश की बाढ़ सी आने लगी हैः

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने इफको के चेयरमैन के निधन पर शोक व्यक्त किया है. अपने शोक संदेश में हुड्डा ने सहकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया. उन्होंने इसे व्यक्तिगत क्षति बताया क्योंकि श्री जाखड़ से उनका पारिवारिवारिक संबंध था. एक अलग संदेश में, कांग्रेस सांसद दीपेन्दर सिंह हुड्डा ने भी शोक संतप्त परिवार के लिए सहानुभूति व्यक्त की है.

चन्द्र पाल सिंह यादव, अध्यक्ष, NCUI: हमने एक महान सहकारी नेता खो दिया है और यह भारत में सहकारी आंदोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति है. देश का संपूर्ण सहकारी परिवार गहरे शोक में है क्योंकि सहकारी आंदोलन के विकास के लिए समर्पित एक नेता अब हमारे बीच नहीं हैं. NCUI जल्द ही दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करने के लिए सभी सहकारी नेताओं को निमंत्रण देकर एक शोक सभा बुलाएगी.

बिजेन्दर सिंह, अध्यक्ष, नैफेड: वह एक ख़ास नेता थे और उनका आकश्मिक निधन पूरे सहकारित परिवार के लिए एक बड़ी त्रासदी है. वह एक जमीनी स्तर के नेता थे जो गांव, राज्य और राष्ट्र – सभी स्तरों से एक साथ जुड़े हुए थे. वह एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति के व्यक्ति थे. उन्होंने अंतिम क्षण तक सारी दुनियां की सहकारी समितियों को एक परिवार के रूप में जोड़ने की कोशिश की.  मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं.

वीरेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, एनसीसीएफ: उनके निधन से सहकारिता आंदोलन को बहुत बड़ा झटका लगा है क्योंकि आज के जमाने में उनके जैसा सरल इंसान का मिलना मुश्किल है.  संपूर्ण सहकारी परिवार के लिए यह एक कभी न भरी जा सकने वाली क्षति है.

राम इकबाल सिंह, अध्यक्ष NACOF: वह एक करिश्माई नेता थे जो लोगों को सहकारिता जगत की ओर चुम्बक की तरह खींचा करते थे. उनके जाने से जो शून्य बन गया है वह किसी भी तरह भरा जाने वाला नहीं है.

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इफको के अध्यक्ष का नम आंखों और भारी दिल से अंतिम संस्कार

Posted on 19 January 2011 by dipakkumar

श्री सुरेन्द्र जाखड़ का पार्थीव शरीर कल मंगलवार की शाम को अग्नि को समर्पित कर दिया गया.  ऐसा लग रहा था कि पूरा संसार उन्हें अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा था.

पाठकों को पता होगा कि इफको के अध्यक्ष श्री जाखड़ का निधन अबोहर (फिरोजपुर) में गत सोमवार को अपने फार्म हाउस में बंदूक की गोली लगने से हो गया.

परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, दोस्तों, राजनीतिक नेताओं और प्रशंसकों ने श्री जाखड़ को भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित की.  श्री जाखड़ मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री बलराम जाखड़ के सुपुत्र थे.

इफको की टीम का नेतृत्व डॉ. यू.एस. अवस्थी कर रहे थे जिसमें डॉ. जी.एन.सक्सेना सहित कई निर्देशक भी शामिल थे.  हर खेमे के मौजूद सभी सहकारी नेताओं की आंखें नम थीं. NCUI के अध्यक्ष श्री चन्द्र पाल सिंह यादव, नैफेड के अध्यक्ष बिजेन्दर सिंह और अन्य सहकारी नेता भी श्रद्धांजली दे ने के लिए उपस्थित थे. श्री जाखड़ सभी से प्यार करते थे.

श्री जाखड़ का दाह संस्कार उनके पैत्रिक गांव पंजकोसी में सम्पन्न हुआ.  अंतिम संस्कार उनके सुपुत्र संदीप ने किया जो एक युवा कांग्रेसी नेता हैं.  अबोहर में  दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और शैक्षिक संस्थान दिवंगत आत्मा के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए बंद कर दी गयी गईं थीं.

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से आकर बड़ी संख्या में राजनेता, नौकरशाह और अन्य लोगों ने उनके पुश्तैनी घर में उपस्थित होकर अपना सम्मान प्रकट किया.  उनमें केंद्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल भी शामिल थे.

पुलिस ने बताया कि पिस्तौल से गोली दुर्घटनावश चल गई.  उसमें किसी की गलती नहीं थी.

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जाखड़ का निधन: इफको की भविष्य के लिए तैयारी

Posted on 19 January 2011 by ajayjha

इफको के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जाखड़ के आकस्मिक निधन से सहकारिता जगत स्तब्ध है.  परिवार के सूत्रों के अनुसार वह बंदूक साफ कर रहे थे जो अचानक चल गई जिससे  मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई.

इफको ने अपने गुड़गांव के कार्यालय का नाम बदल कर ”सुरेन्द्र जाखड़ टॉवर” रखने की घोषणा की है. भावुक प्रबंध निदेशक श्री यू.एस अवस्थी ने भी पारादीप इकाई का नाम “सुरेन्द्र जाखड़ नगर” के रूप में परिवर्तित करने की घोषणा की है.

इफको के बोर्ड की शोक सभा 20 जनवरी बुलाई गई है. बैठक में भावी कार्रवाई की दिशा के बारे में भी फैसला हो सकता है. इफको के उप-नियमों के अनुसार अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठक की अध्यक्षता उपाध्यक्ष करेंगे.

लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि क्या श्री जाखद़ के आकस्मिक निधन के बाद अध्यक्ष का पद उपाध्यक्ष संभालेंगे. इस बात पर अंतिम निर्णय बोर्ड ही लेगा. उपाध्यक्ष श्री एन.सी. पटेल इस घटना के बाद चर्चा में आ गए हैं. श्री पटेल को एक समर्पित गांधीवादी माना जाता है जो तड़क-भड़क से दूर रहते हैं.

प्रबंध निदेशक श्री अवस्थी के नेतृत्व में इफको टीम मंगलवार की सुबह पंजाब के रवाना हो गई, जहां दिवंगत आत्मा के अंतिम संस्कार किए जाएंगे. मृतक के पिता श्री बलराम जाखड़ भी दिल्ली से जा रहे हैं.

तीन भाइयों में माझिल श्री सुरेंद्र जाखड़ पूरी तरह से खेती और किसानों को समर्पित थे. अपने दोनों भाई, जो राजनीति में हैं, के विपरीत, श्री जाखड़ ने पूरी दुनिया को एक सहकारिता में जोड़ने का सपना देखा था.

वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पिछले 10 वर्षों तक अथक यात्रा करते रहे.  उनके निधन से केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है. वैश्विक सहकारिता गांव बनाने की कल्पना को साकार करने की इच्छा वाले अन्य सपूत के पैदा होने में वर्षों लगेंगे.

भारतीयसहकारिता.कॉम उनके आकस्मिक निधन पर अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता है और उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है.

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