Posted on 30 May 2012 by dipakkumar
महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक पर अपने हितधारकों से कुछ महत्वपूर्ण जानकारी छुपाने का आरोप लगाया जा रहा है।
लेखा परीक्षक की रिपोर्ट से कुछ महत्वपूर्ण पृष्ठ गायब बताए जा रहे है। यह बैंक की अनियमितताओं में लिप्त होने की अटकलों को जन्म देता है।
बैंक अपने हितधारकों के साथ जानकारी साझा करने के लिए मना कर रहे हैं।
बैंक पर पारदर्शिता के सिद्धांत नहीं मानने का आरोप है और उसके लापरवाह व्यवहार के कारण उसकी प्रतिष्ठा और खराब होती जा रही है।
Posted on 30 May 2012 by dipakkumar
खबर है कि शीर्ष बैंक ने सहकारी बैंकों को फिक्स्ड डिपॉजिट के रूपांतरण के लिए अपने स्वयं के मानदंडों की अनुमति दे दी है, इस कदम से बैंकों को संपदा प्रबंधन में सहुलियत रहेगी।
वर्तमान में ग्राहक अपने फिक्स्ड डिपॉजिट को किसी भी समय वापस ले सकता है।
वह अपने निर्णय के लिए कोई भी नुकसान नही उठाता है। सजा के अभाव से ग्राहकों को ऐसा करने का प्रोत्साहन मिलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक का यह निर्णय बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था और अब सहकारी बैंकों को संपदा प्रबंधन के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन करने की आजादी होगी।
Posted on 30 May 2012 by ajayjha
हजारों डेलीगेट्स के साथ मंगलवार को दिल्ली में एनसीयुआई सभागार में इफको ने वार्षिक आम बैठक का आयोजन किया। लगभग 21 निदेशकों के साथ बैठक में मौजूद उर्वरक सहकारी बोर्ड के अध्यक्ष एन पी पटेल ने इफको की शानदार उपलब्धियों की चर्चा की और कहा कि किसानों का कल्याण ही इफको का मूल उद्देश्य है।
प्रबंध निदेशक श्री यू एस अवस्थी ने देश के विभिन्न भागों से आए डेलीगेट्स को धन्यवाद दिया और कहा कि किसानों का हित इफको के नियोजन का केन्द्र बिन्दु है।
लेकिन अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के अतिरिक्त डेलीगेट्स द्वारा की जा रही बहस अदभुत थी।
वे सभी एक बात ही बोल रहे थे कि इफको डॉ. अवस्थी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है और ये संगठन विश्वास और निर्भरता का पर्याय बन गया है।
डेलीगेट्स ने कहा कि लोगों में इफको ब्रांड का नाम सुनकर ही जबरदस्त आत्मविश्वास जगता है।
कई डेलीगेट्स ने डॉ. अवस्थी के प्रति 20 प्रतिशत लाभांश प्रति वर्ष देने के लिए हार्दिक धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने उनसे पूर्ण समर्थन की पेशकश की है और उनके द्वारा अच्छा काम जारी रखने की कामना भी की।
बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के डेलीगेट अपने भाषणों से बहुभाषी और बहु सांस्कृतिक भारत का असली रंग को पेश कर रहे थे।
पाठकों को याद होगा कि इफको एक निराशाजनक स्थानीय और वैश्विक परिदृश्य के बावजूद वित्तीय वर्ष 2011-12 में एक हजार करोड़ से अधिक का लाभांश अर्जित किया है। उसकी बढ़ी हुई वृद्धि 22,000 करोड़ रुपये से लगभग 26,000 करोड़ रुपये है।
डेलीगेट्स को 24 कैरेट, 5 ग्राम वजन का सोना दिया गया है।
Posted on 29 May 2012 by ajayjha
सहकारी समिति इफको ने मंगलवार को अपनी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) नई दिल्ली में आयोजित की है, यह देश में आयोजित किसानों की सबसे बड़ी सभा होगी।
इफको, देश भर में 40 हजार से अधिक सहकारी समितियों को चला रहा है। दिल्ली के बाहर से आए प्रतिनिधियों को एनसीयूआई के गेस्ट हाउस, इफको गेस्ट हाउस और साई धाम में ठहराया गया हैं।
भारतीय सहकारिता से बात करते हुए डॉ. जी.एन.सक्सेना, इफको के निदेशक ने कहा कि प्रत्येक किसान को उसकी बेटी की शादी के लिए कम से कम 25 ग्राम सोने की आवश्यकता है, हमारे प्रतिनिधी पांच साल की अवधि के लिए चुने गए हैं। हमारे प्रबंध निदेशक श्री यू.एस. अवस्थी का कहना है कि इफको अपने सदस्यों को पांच वर्षों में प्रत्येक वर्ष शुद्ध पांच ग्राम सोना उपलब्ध कराता है और पांच साल की अवधि में यह सोना बढ़कर 25 ग्राम तक हो जाता है।
“इस प्रकार हम अपने प्रतिनिधियों में से प्रत्येक को 25 ग्राम, 24 कैरेट सोना दे रहे हैं”, डॉ.सक्सेना ने कहा।
एजीएम के एजेंडे में उपनियमों में परिवर्तन या उस तरह का कुछ भी शामिल नहीं है। पिछले एक साल के खातों और प्रस्तावित व्यय को एजीएम में पारित किया जाएगा।
Posted on 28 May 2012 by parasnath
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश के सहकारी क्षेत्र में भ्रष्टाचार सर्वव्यापी लगता है। राज्य में सहकारिता मंत्री ने भ्रष्टाचार के आरोप में प्रादेशिक सहकारी संघ के कई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
पीसीएफ़ कर्मचारियों को राज्य में चल रहे गेहूं की खरीद में गंभीर अनियमितताओं में लिप्त पाया गया है।
लखनऊ में नई सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है।
सहकारिता मंत्री ने भ्रष्टाचार में लिप्त सहकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मंत्री के अनुसार, कई घोटाले और धोखाधड़ी हाल ही में प्रकाश में आए है और सहकारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अधिकार के दुरुपयोग के सबूत है।
Posted on 28 May 2012 by parasnath
कपास की खरीद से उबकर एमएससीसीएमएफ अब कुछ नया करना चाहता है। ये संगठन अब कपास के बीज किसानों के बीच बेचने का काम करेगा।
एमएससीसीएमएफ मुख्य रूप से एक विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से उन्नत कपास के बीज किसानों को बेचेगा।
एमएससीसीएमएफ सूत्रों का कहना है कि नई गतिविधि से संगठन को अपनी प्रशिक्षित जनशक्ति का उपयोग करने में मदद मिलेगी।
महासंघ के पास सैकड़ों कृषि स्नातक है और आसानी से इस जनशक्ति का कपास बीज की बिक्री के काम में इस्तेमाल किया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि महासंघ के इस काम से राज्य में बीज की बिक्री काफी आसान हो जाएगी।
Posted on 28 May 2012 by ajayjha
बिहार में सहकारी निकायों के निदेशकों के बीच लड़ाई के कारण सहकारी क्षेत्र युद्ध क्षेत्र में बदल गया है। 23 मई का सम्मेलन पूर्व बिस्कोमॉन अध्यक्ष सुनील सिंह द्वारा आयोजित किया गया था, जिसके बाद राज्य द्वारा सहकारी सम्मेलन 26 मई को प्रायोजित किया गया।
सुनील सिंह से आतंकित सरकार ने श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल का उपयोग करने के लिए भले ही अनुमति नहीं दी बावजूद इसके सहकारी नेताओं की संख्या हजारों में थी, सुनील सिंह ने भारतीय सहकारिता डॉट कॉम से बात करते हुए कहा।
सुनील सिंह के कार्यक्रम में कई शीर्ष नेताओं सहित एनसीयुआई अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह यादव ने भाग लिया। सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को सहकारिता के प्रति जागरुक करना और उन्हें इस क्षेत्र में सक्रिय बनाना था।
सुनील सिंह के मुताबिक राज्य में सहकारिता क्षेत्र में महिला कार्यकर्ताओं के अभाव में भाजपा महिलाओं को उतारा गया था। सहकारी अधिकारियों ने प्रत्येक जिले में चेतावनी दी थी और भाजपा महिला सेल से संपर्क करने के लिए स्वयंसेवकों को भेजने के लिए कहा था। राज्य में केवल 264 महिलाएँ पैक्स अध्यक्ष हैं, उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि पैक्स में 8500 पुरुष अध्यक्ष को आमंत्रित नहीं किया था।
सुनील सिंह के विरोधियों ने उन पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया है। वे अपने राजनीतिक स्वार्थों के कारण पैक्स अध्यक्ष की ओर से बात कर रहे है, उनका तर्क है।
उनमें चुनाव लड़ने का साहस नहीं है और बिहार में चुनाव हाल ही मे प्राधिकरण के तहत नई प्रणाली के माध्यम से किया गया है तो वे उनकी ओर से कैसे बात कर सकते हैं? वह एक ऐसे सहकारी नेता है जो पारदर्शिता से डरते है और वे अब मात्र एक कागजी शेर बनकर रह गए है, लोगों का कहना है।
Posted on 28 May 2012 by dipakkumar
पंजाब के मुख्यमंत्री ने कोर बैंकिंग और एटीएम सेवाओ के साथ राज्य में सहकारी बैंकों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया है ताकि वे वाणिज्यिक बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें।
पंजाब के सहकारिता विभाग में कर्मचारियों की गंभीर कमी है और इसलिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सहकारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भर्ती का आदेश दिया है।
जानकार सूत्रों का दावा है जल्द ही हजारों लोगों को सहकारी विभाग और राज्य के अन्य सहकारी संगठनों में विभिन्न स्तरों पर नियुक्त किया जाएगा।
पंजाब सरकार के एक सूत्र का कहना है कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सहकारी क्षेत्र में भारी दिलचस्पी दिखा रहे है क्योंकि वे पंजाब में तेज आर्थिक विकास के लिए सहकारिता क्षेत्र को बहुत ही अहम मानते है।
Posted on 28 May 2012 by dipakkumar
बिहार के मोतिहारी में मत्स्य सहकारी समिति को लीज़ देने के बदले में एक बीडीओ और एक क्लर्क को घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है, स्थानीय पुलिस ने यह जानकारी दी है।
शिकायत किए जाने पर सतर्कता ब्यूरो ने इन लोगों पर छापा मारा।
यहाँ जोरों से अफवाह है कि सरकार के लोग बड़े पैमाने पर घूस लेने का काम कर रहे है।
Posted on 25 May 2012 by ajayjha
शुक्रवार को केवल एक फैसला ही नहीं आएगा बल्कि एनसीयुआई अध्यक्ष के साथ सबसे बड़ी सहकारी समिति का भविष्य भी इस पर टिका है।
लंबे अदालती मामले में आज सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों में मुकदमा जीतने का दावा किया है।
पाठकों को याद होगा राजेंद्र शर्मा ने चन्द्रपाल सिंह को सरकार नियुक्त पंच की अदालत में चुनौती दी थी, बाद में अध्यक्ष ने इसके खिलाफ अदालत में अपील की।
एनसीयुआई अध्यक्ष के वकील ने भारतीय सहकारिता से बात करते कहा कि “मैं उनका वकील हूँ और मैं कह रहा हूँ कि यह अध्यक्ष के लिए एक मजबूत मामला है इसके अलावा अभी कोई अन्य जवाब नहीं दे सकता।
मामले पर प्रकाश डालते हुए वकील वी.पी. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी महासंघों के बारे में भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघों के लिए इफको, कृभको, नेफेड और एनसीसीएफ प्रतिनिधि उनके योगदान पर आधारित है।
ये प्रतिनिधि नामित नहीं बल्कि मूल सहकारी समितियों से है इसलिए उन्हें नामित किया गया हैं ऐसा सही नहीं है, श्री सिंह ने तर्क दिया।
गुरुवार को एनसीयुआई शासी परिषद की बैठक में एनसीयुआई पर वित्तीय संकट आने से एक छोटा धमाका साबित होगा।
अध्यक्ष के खिलाफ मामले लंबित रहना समस्याग्रस्त एनसीयुआई के लिए घातक हो सकता है। उम्मीद है कि एनसीयुआई इस वर्ष सहकारी अंतर्राष्ट्रीय वर्ष में अपेक्षित प्रगति के साथ आगे बढ़ सकेगा।