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Archive | एनसीसीएफ

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एनसीसीएफ के साइलो बैग के प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी

Posted on 06 February 2013 by dipakkumar

एक महत्वाकांक्षी योजना में हम अपने अनाज की रक्षा कैसे कर सकते है के राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ(एनसीसीएफ) के कदम को भारत सरकार द्वारा हरी झंडी मिल चुकी है।

भारतीय सहकारिता से बात करते हुए एनसीसीएफ के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि हमने आसानी से संभालने और अनाज के भंडारण पर कम लागत के उपाय की खोज की है। हम साइलो बैग को उपयोग में लेने का विचार किया है जो कि व्यावहारिक रूप से कम लागत के साथ अनाज को स्टोर कर सकते हैं।”

भारत में पहली बार साइलो बैग को प्रयोग में लाते हुए वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यह अनाज संग्रहीत करने का सुरक्षित, किफायती और लाभदायक तरीका है। साइलो बैग को अनाज के अनुकूल तैयार किया जा रहा हैं, इसे फसल की कटाई के क्षेत्र या अन्य किसी जगह के लिए भी इसे पसंद किया जा सकते हैं।

इस बैग के इस्तेमाल की प्रक्रिया प्रभावी, कम लागत और आसानी से मशीन द्वारा परिवहनीय है, यह अनाज के पॉलीथीनेस की तीन परत से हवा और प्रकाश से बचाकर रखता है।

बैग की क्षमता के संदर्भ में अध्यक्ष ने कहा कि इसमें 220 टन तक जमा कर सकते हैं और खुले में 12 महीने के लिए रखा जा सकता है। बैग को खेत पर कहीं भी लंबे समय तक संग्रहीत रखा जा सकता है, यह अच्छी तरह से सूखा और नुकीली वस्तुओं के प्रभाव से मुक्त है।

अन्य प्रभावशाली विशेषताएं हैं कि इसे लगभग 200 टन प्रति घंटे में हैडर या चेज़र बिन से भरा जा सकता है और पर आउटलोडर द्वारा 180 टन प्रति घंटे से खाली किया जा सकता है।

एनसीसीएफ का प्रस्ताव सरकार ने स्वीकार कर लिया है और एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करके इस पर आगे विचार करने के लिए किया गया था। पैनल ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट दी है। इसे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देश पर अगले 10 वर्षों में अतिरिक्त अनाज भंडारण की आवश्यकता की योजना को प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक को दृश्य में रखकर तैयार करने के लिए गठित किया गया था।

वर्तमान और भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन और खरीद का आकलन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि सरकार साइलो बैग(कम लागत, हवा-रहित, विशाल आकार के पॉलिथीन बैग जो कि 200 टन तक स्टोर कर सकते हैं) के रूप में नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग फसल के मौसम के दौरान अस्थायी भंडारण की जरूरतों को पूरा कर सकते है।

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सहकारिता खुदरा बिक्री मुद्रास्फीति को रोक सकती हैं: वीरेंद्र सिंह

Posted on 15 January 2013 by ajayjha

उपभोक्ता सहकारी समितियों में मुद्रास्फीति की परेशानी से मुक्त कराने की क्षमता है, दिल्ली में वीरेंद्र एनसीसीएफ सिंह अध्यक्ष ने हाल ही में कहा था।

सहकारी खुदरा दुकानों कहाँ हैं, श्री सिंह ने पूछा। हमें प्रत्येक राज्य की राजधानी में कम से कम एक मॉडल सहकारी खुदरा के साथ शुरू करने की जरूरत है। यह दुकान उपभोक्ता के लिए मानक के रूप में कार्य करेगा। उपभोक्ता को एक सहकारी मॉडल की दुकान पर बहुत कम कीमत में गुणवत्ता के उत्पाद मिल जाएंगे।

सहकारिता खुदरा बिक्री बाजार अन्य खिलाड़ियों के उत्पादों पर ब्याज दर को काम करने के लिए मजबूर कर देगी। श्री सिंह ने कहा कि यह उपभोक्ता को लाभांवित करता रहेगा।

जब हम 11 रुपये में एक किलो गेहूं बेचते है तो कैसे बाजार में दुकान 20 रुपये में इसे बेच सकते है? उन्होंने इस बात को स्पष्ट करने की कोशिश की।

लेकिन दुर्भाग्य से सरकार उपभोक्ता आंदोलन पर ध्यान केंद्रित नहीं करती है। हमारे लिए कोई बजटीय समर्थन नही है। ग्रामीण ऋण, उर्वरक, या मत्स्य पालन के लिए बजटीय प्रावधान कर रहे हैं, लेकिन उपभोक्ता उत्पादों के लिए कोई प्रावधान नहीं है, जो कि दुख की बात है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए उपभोक्ता सहकारी समितियों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसका बुनियादी ढांचा कमजोर और शून्य है जिसे उपभोक्ता सहकारी समितियों द्वारा बहुत अच्छी तरह से भरा जा सकता है।
सहकारी उपभोक्ता को मजबूत बनाकर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और वालमार्ट की जरूरत को दूर करना होगा, विश्वास के साथ अध्यक्ष ने जोर देकर कहा।

यह उल्लेखनीय है कि वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में आईसीए की एक समिति ने उपभोक्ता सहकारी समितियों पर हाल ही में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विभिन्न देशों के सहकारी आंदोलन की शर्त पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए दिसंबर 2009 में उपभोक्ता सहकारिता पर आईसीए ने एक समिति का गठन किया था।

अध्ययन के क्षेत्र में भारत, म्यांमार, इंडोनेशिया, फिलीपींस, ईरान, सिंगापुर, जापान, श्रीलंका, कोरिया, थाईलैंड, कुवैत, वियतनाम और मलेशिया सहित 13 क्षेत्र के देशों के भी शामिल हैं।

रिपोर्ट की तारीफ की गई है।

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बीमार सहकारी समितियों को आईसीए रिपोर्ट से लाभ की संभावना

Posted on 29 October 2012 by Manoj

वीरेन्द्र सिंह आईसीए समिति एशिया पैसिफिक क्षेत्र में उपभोक्ता सहकारी समितियों पर अपनी मसौदा रिपोर्ट के साथ तैयार है।

एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए दिसंबर 2009 में उपभोक्ता सहयोग पर आईसीए समिति द्वारा समिति का गठन किया गया था।

तदर्थ समिति ने श्री वीरेन्द्र सिंह को अध्यक्ष बनाया था जो कि राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता फेडरेशन (एनसीसीएफ) के भी अध्यक्ष है, जापानी उपभोक्ता सहकारी संघ (जेसीसीयु, जापान) और एनटीयुसी फेयरप्राइज़ सहकारी लिमिटेड (सिंगापुर) से एक प्रतिनिधि सदस्यों के रूप में शामिल थे।

इस समिति का उद्देश्य एशिया पैसिफिक क्षेत्र में उपभोक्ता सहकारी समितियों के कामकाज के बारे में जानकारी इकट्ठा करना और उसी पर आगे के अध्ययन और कार्रवाई के लिए एक स्थिति पत्र तैयार करना था।

इसके अलावा समिति को एशिया प्रशांत क्षेत्र के उपभोक्ता सहकारी समितियों द्वारा जिन बाधाओं को सामना करना पड़ रहा है उनको खोजने के काम के साथ उनका हर संभव समाधान खोजने का जिम्मा सौंपा गया था।

अध्ययन के क्षेत्र में भारत, म्यांमार, इंडोनेशिया, फिलीपींस, ईरान, सिंगापुर, जापान, श्रीलंका, कोरिया, थाईलैंड, कुवैत, वियतनाम और मलेशिया सहित 13 देश शामिल हैं।

श्री टीटी अधिकारी पूर्व प्रबंध निदेशक एनसीसीएफ और सुश्री कानको मियाजावा, आईसीए-एपी उपभोक्ता समिति के सचिव के साथ मसौदा रिपोर्ट की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अभी  विवरण का खुलासा करने से इनकार करने के साथ समिति के अध्यक्ष विरेन्द्र सिंह ने भारतीय सहकारिता से कहा कि वह बीमार उपभोक्ता सहकारी समितियों में सुधारात्मक कदम उठाने के लिए   समिति द्वारा  संकलित जानकारी उपयोगी होगी।

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एनसीसीएफ एजीएम: प्रतिनिधियों ने अपनी आवाज बुलंद की

Posted on 28 September 2012 by Manoj

दिल्ली के एनसीयुआई में असंतोष प्रतिनिधियों की आवाज के बीच राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) ने बुधवार को वार्षिक आम बैठक का आयोजन किया। प्रतिनिधि वार्षिक आम बैठक के माध्यम से एजेंडे को पारित करने से पहले उस पर चर्चा करना चाहते थे।

जब बिजेन्द्र सिंह ने स्थिति पर नियंत्रण करने की कोशिश की तो महाराष्ट्र और गुजरात के प्रतिनिधि और अधिक मुखर हो गए। वे जो  चाहते थे  उस पर प्रबंध समिति ने अंत में सहमति व्यक्त की।

भारतीय सहकारिता से बात करते हुए एनसीसीएफ के अध्यक्ष विजेन्द्र सिंह ने कहा कि “यह पूरी तरह से सामान्य था और लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है। यह हमारे आंदोलन की ताकत है।”

प्रतिनिधि ने शिकायत की  थी  कि एनसीसीएफ व्यापार उत्पन्न करने में सक्षम नही है। उन्होंने वाहनों की मरम्मत पर 27 लाख रुपए की भारी खर्च के मामले को उठाया।

अध्यक्ष ने उनके सुझावों को स्वीकार किया और कहा कि सरकारी मदद में कमी आई है। नेफेड को 8000-10,000 करोड़ रुपये का  हर साल व्यापार हो जाता है, इफको और कृभको को भी अपने सदस्यों के साथ साझा करने के लिए सब्सिडी मिलती है। एनसीसीएफ को न तो वित्तीय सहायता मिलती है और न ही सरकार से नीतिगत समर्थन मिलता है, उन्होंने कहा।

एनसीसीएफ ने इस साल 3 करोड़ रुपये का एक लाभ अर्जित किया और इसे कर्मचारियों के बीच साझा करने का फैसला किया है। हम स्टाफ को भुगतान करते हैं, अगर हम उन्हें छठें वेतन आयोग के तर्ज पर वेतन नहीं दे सकते तो हमने उन्हें कम से कम ग्रेड वेतन की पेशकश करने का फैसला किया है, श्री सिंह ने साझा किया।

लाभ के 7 करोड़ रुपये से 3 करोड़ रुपये होने पर वीरेन्द्र सिंह ने कर्मचारियों की कमी को दोषी ठहराया है। लोग सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जबकि नई भर्ती पिछले साल की तुलना में आधी होने से हमारी ताकत में कमी आई है, उन्होंने बताया।

चन्द्र पाल सिंह की अनुपस्थिति ने भी सबका ध्यानाकर्षण किया।

 

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वीरेन्द्र सिंह को अप्रत्याशित लाभ: एनसीसीएफ

Posted on 13 August 2012 by ajayjha

सहकारी राजनीति बहुत दिलचस्प है, यहाँ सत्ता परिवर्तन को देखने की संभावना कम ही होती है। एनसीसीएफ के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह नेफेड के प्रभाव में गिरावट के लिए अपनी किस्मत को धन्यवाद दे रहे होंगे।

अध्यक्ष चुनाव से कुछ वर्ष पहले वीरेन्द्र सिंह को उनके ही बोर्ड के विरोधी अजित सिंह के पुत्र विशाल सिंह के बीच कड़ा संघर्ष था। शीर्ष स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा इतनी तीव्र थी कि एनसीयुआई अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह को दोनों के बीच हो रहे संघर्ष पर विराम लगाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

ऐसी अफवाह थी कि अध्यक्ष पद के कार्यकाल का आधा विशाल सिंह और आधा वीरेन्द्र सिंह संभालेंगे। पता नही यह सच है या नहीं कि नेफेड में विशाल की बदकिस्मती के कारण वीरेन्द्र सिंह को इस तरह की स्थिति का लाभ मिला है।

नेफेड और एनसीसीएफ बोर्ड के कदवार सदस्य बिजेन्दर सिंह हमेशा विशाल के समर्थन में खड़े रहे है। खास बात यह है कि जब विशाल ने अपने पिता को खो दिया था तब चन्द्रपाल सिंह ने अपने बेटे के समान उसको पिता का स्नेह दिया था।

एनसीसीएफ बोर्ड की बैठक में कई मौकों पर वीरेन्द्र सिंह एक मात्र दर्शक के रुप में होते थे। जबकि विशाल और उसके प्रति सहानुभूति रखने वाले ताकतवर थे। एक बार तो वीरेन्द्र सिंह द्वारा नियुक्त किए गए लोगों को पद से हटा दिया गया लेकिन वीरेन्द्र सिंह कुछ भी नहीं कर सकें।

लेकिन नेफेड की बदकिस्मती केवल विशाल को ही कमजोर नही किया है बल्कि बिजेन्दर सिंह की ताकत भी कम हो गई है।

अभी भी कई मुद्दें है जो विरेन्द्र सिंह को परेशान कर रहे है। कुछ अधिकारी भी सहकारी राजनीति में हाथ आजमाना चाहते है। वे अपने स्वयं के स्वार्थ पर आमादा लग रहे हैं जबकि सहकारी नेतृत्व  का भविष्य अभी अनिश्चितता के घेरे में है।

इस सबसे एनसीसीएफ की कई परियोजनाओं में देरी हुई है। आशा है कि एक शक्तिमान अध्यक्ष सबसे बड़े सहकारी समिति पर तत्काल दबाव बनाकर सफलता हासिल करेगा।

 

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एनसीसीएफ दवाओं के लिए नोडल एजेंसी के रूप में उभर उभर सकता है : अध्यक्ष

Posted on 22 January 2012 by ajayjha

राष्ट्रीय  उपभोक्ता  सहकारी फेडरेशन  (एनसीसीएफ)  के  अध्यक्ष  श्री  बीरेंद्र सिंह ने देश में अर्थशास्त्र के  इस महत्वपूर्ण  मोड  के  प्रति  सरकारी  उदासीनता के  पीछे सहकारिता में नेतृत्व के संकट को दोषी ठहराया है. अपनी आवाज सुना पड़्ने के लिए सहकारी नेताओं के बीच उद्देश्य की एकता और सामंजस्य होना चाहिए, श्री सिंह ने नई दिल्ली में indiancooperative.com से बात करते हुए कहा.

पाठकों को याद होगा कि वार्षिक बजट की योजना के अलावा, यहां तक कि 12 वीं पंचवर्षीय दृष्टिकोण पत्र में ”सहकारिता” शब्द को शाही अंदाज में भुला दिया गया है. इसमें कोई नई बात नहीं है और अब 15 वर्ष से भी अधिक हो गया है कि “सहकारिता” शब्द बजट की सभी चर्चाओं से लापता रहता है, बीरेंद्र सिंह ने कहा.

केंद्रीय वित्त मंत्री बजट के पूर्व विचार-विमर्श के लिए सबसे नाम के लिए मिलते हैं, जब हम आयकर से छूट के लिए लड़ते रहते हैं. हम इस मुद्दे पर हमारे कृषि मंत्री शरद पवारजी को एक हज़ार बार अर्जी दे चुके हैं. लेकिन क्या सरकार हमें गंभीरता से लेगी अगर हम अपने पैरों पर खड़े नहीं होते और आयकर का भुगतान करते हैं, उन्होंने पूछा.  मैं चाहता हूं सहकारी समितियां व्यवहार्य हों और कर का भुगतान करें, श्री सिंह ने जोर देकर कहा.

एनसीसीएफ के व्यवहार्यता की बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले 6 महीनों से उपभोक्ता सहकारिता को पेशेवर कर्मचारियों की कमी के कारण समस्या का सामना करना पड़ा है. ”हमने हाल ही में साक्षात्कार का आयोजन किया है और पेशेवर प्रशिक्षित वरिष्ठ लोगों के बहाल करने वाले हैं जिससे हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी”, अध्यक्ष ने आगे कहा.

हम गतिविधियों को चलाने के लिए स्पष्ट क्षेत्र की कमी से भी ग्रस्त हैं और मार्गदर्शन के लिए सरकार के पास याचिका दायर की गई है.  हम शीघ्र ही दवाओं के क्षेत्र में नोडल एजेंसी के रूप में उभर सकते हैं. एनसीसीएफ सरकार के खाद्य सुरक्षा मुद्दा में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, उन्होंने कहा.

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परेशान कृषि सहकारी समितियां सरकार बचाएंगी

Posted on 07 September 2011 by ajayjha

नेफेड और एनसीसीएफ जैसे कृषि सहकारिता अच्छी स्थिति में नहीं है, लेकिन सरकार के पास उन पर निर्भर रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. प्याज की बढ़ती कीमतों ने फिर से सरकार  को इन कृषि सहकारी समितियों की तरफ देखने के लिए बध्य कर दिया.

सरकार ने सोमवार को सहकारी समिति – नेफेड और एनसीसीएफ - को निर्देश दिया है कि रसोई की प्रधान चीज राष्ट्रीय राजधानी में अपनी दुकानों से 20 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर  बेची जाय.  इस आशय का निदेश खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री के.वी. थामस ने सोमवार की शाम को प्याज की कीमतों की समीक्षा के लिए बैठक के बाद दिया गया, एक आधिकारिक बयान में कहा गया.  कृषि सहकारी नेफेड के पास दिल्ली में छह दुकानें हैं जबकि एनसीसीएफ (राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ) के 15 ऐसे केंद्रों हैं.

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मंत्रालय और NCUI के बीच तनाव का असर कर्मचारियों पर

Posted on 26 July 2011 by ajayjha

मंत्रालय और राष्ट्रीय सहकारी संघ के बीच तनाव का असर असहाय कर्मचारियों और NCUI के क्षेत्र परियोजनाओं पर पड़्ना शुरू हो गया है. कृषि मंत्रालय ने NCUI को जून २०११ के बाद से आर्थिक सहायता देना बंद कर दिया है जिससे NCUI के कर्मचारियों के बीच कठिनाई और हृदयदाह पैदा हो गया.

मुद्दा NCCT में व्याख्याता घोटाले का है.  सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने परमज्योति को पद से हटाने पर जोर दिया है जिससे NCUI सहमत नहीं है. Indiancooperative.com से बात करते हुए NCUI के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह ने कहा कि परमज्योति को हटाया जा सकता है, लेकिन इस मुद्दे पर नहीं. उनके भाग्य का फैसला सामान्य क्रम में बोर्ड द्वारा तय किया जाएगा जब वह अपना कार्यकाल पूरा कर लें.

पाठकों को याद होगा, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कृषि मंत्रालय, जिसके तहत NCUI कार्य करता है, से स्पष्टीकरण पूछा है. मामला देश के विभिन्न भागों में स्थित उनके प्रशिक्षण इकाइयों के लिए NCCT द्वारा 40 व्याख्याताओं की नियुक्ति से संबंधित है. अनुचित तरीकों और भर्ती प्रक्रिया में पैसे के लेन-देन के आरोप हैं. श्री परमज्योति तूफान के केंद्र में हैं.

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एनसीसीएफ पर सीबीआई की निगरानी!

Posted on 12 July 2011 by ajayjha

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा सीबीआई जाँच का आदेश दिये जाने के बाद से राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) खबरों में है. मामला वर्ष 2010 से संबंधित है जब एनसीसीएफ ने आंध्र प्रदेश बिजली उत्पादन(एपी Jainco) निविदा प्रक्रिया में भाग लिया.

एनसीसीएफ के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सिंह और तत्कालीन प्रबंध निदेशक श्री गुप्ता तथा वरिष्ठ सलाहकार श्री सिंघल के ऊपर सी.बी.आई. की निगरानी है.  मामला एपी Jainco को कोयले की आपूर्ति से संबंधित है, जो आंध्र सरकार की बिजली उत्पादन इकाई है.

निविदा प्रक्रिया में भाग लेते हुए, एनसीसीएफ ने कुछ “स्मार्ट कार्य” किए जो एनसीसीएफ के मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री के.एस. बरियार की जानकारी में आए. श्री बरियार ने एक रिपोर्ट तैयार की और उसे मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री केकेकर को भेज दिया.  श्री केकेकर को उच्च निष्ठा वाला अधिकारी माना जाता है.

मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी ने इस मामले में सीबीआई जाँच के लिए एक मजबूत मामला बनाया और उसे मंत्री श्री पी.जे. थॉमस के पास भेज दिया.  मि.थॉमस ने लगभग एक महीने तक फ़ाइल दबाए रखा. शायद देश भर में भ्रष्टाचार के मामलों के प्रति सार्वजनिक रोष को बढ़ता देख मंत्री ने अंत में इसे सीबीआई को भेजा.

सीबीआई ने सही मायने में जांच शुरू कर दी है. इस बीच, एम.डी. श्री गुप्ता ने एनसीसीएफ छोड़ दिया है और एक नये एम.डी. ने कार्यभार संभाल लिया है.

देश में प्याज संकट के प्रबंधन में अभूतपूर्व सफलता के लिए एनसीसीएफ खबर में बना रहा है. नैफेड पहले से ही घाटे के गठबंधन की चपेट में है और जबर्दस्त भ्रष्टाचार ने नाको दम कर रखा है.  अतः सरकार ने विशाल कृषि सहकारी का एक विकल्प बनाने की आशा में एनसीसीएफ में विश्वास जताया है. लेकिन अध्यक्ष और उनकी टीम ने धोटालों के झ्ड़ी लगाकर खुदकुशी का आलम बना दिया है.

एनसीसीएफ में वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों में भी घोटाले की खबर है, जिसके लिए विज्ञापन 2011 मार्च के महीने में पहली बार आया था.  बहुत से हिल्ले-हवाले के बाद यह अब 15 जुलाई के लिए तय हो गया है. यह कहा जाता है कि उम्मीदवार पहले से चुन लिए गए हैं और Indiancooperative.com के पास उनका नाम की सूची भी है.

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मीडिया और सहकारी संगठन मिलकर चलेंगे: आलोक मेहता

Posted on 15 June 2011 by ajayjha

भारत का राष्ट्रीय सहकारी संघ (NCUI) ने “Media – Cooperative Synergy for the International Year of Cooperative (IYC) Celebration” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया.

संयुक्त राष्ट्र ने सन् 2012 को ”सहकारिता का अंतरराष्ट्रीय वर्ष” के रूप में घोषणा की है और NCUI इस अवसर का सबसे अच्छा उपयोग करना चाहता है.

सहकारी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व चन्द्र पाल सिंह यादव ने किया और मीडिया का प्रतिनिधित्व नई दुनिया के संपादक श्री आलोक मेहता ने  किया था. अन्य मीडिया कर्मियों में हमारे संपादक श्री अजय झा, दैनिक भास्कर से हरवीर सिंह, सीएनबीसी-Awaj से शिशिर सिन्हा और बिजनेस वर्ल्ड से संजीव मुखर्जी शामिल थे.

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