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एनसीयूआई: सहकारी कांग्रेस की तारीख में मामूली बदलाव

Posted on 13 May 2013 by ajayjha

सहकारी कांग्रेस में देश के उच्च रैंकिंग वीआईपी सहित राष्ट्रपति की भागीदारी की वजह से कांग्रेस की तारीख में एक मामूली सा बदलाव किया गया है। अब सहकारी कांग्रेस 18 जून की बजाय 25 जून को आयोजित किया जाएगा, एनसीयूआई के अध्यक्ष डॉ. चंद्र पाल सिंह ने बुधवार को भारतीय सहकारिता डॉट कॉम को सूचित करते हुए बताया।

भारतीय सहकारिता डॉट कॉम को एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी डॉ. दिनेश से भी एक मेल प्राप्त हुआ है। मेल के अंतर्गत यह बताया गया है कि हमें यह सूचित करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि भारत के माननीय राष्ट्रपति ने 25 जून 2013 को दोपहर में 12.00 बजे सिरी फोर्ट सभागार, नई दिल्ली में 16 वीं भारतीय सहकारी कांग्रेस का उद्घाटन करने के लिए अपनी सहमति दे दी है।

पहले तारीख 18 जून थी लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने बताया कि वह इस दिनांक पर उपलब्ध नहीं है। अंत में एक तारीख भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी, कृषि मंत्री शरद पवार की उपलब्धता के साथ स्थल (श्री फोर्ट ऑडिटोरियम) के लिए अंकित किया गया है।

यह विशाल समारोह दिनाँक 25 -26 यानी दो दिन तक जारी रहेगा और इसमें पूरे भारत और विदेश से लगभग 1,500 से 2,000 प्रतिनिधि भाग लेंगे।

कांग्रेस में सहकारी क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा और इस क्षेत्र में पहले से व्याप्त आकस्मिक समस्याओं के मद्देनजर नीति के दिशा निर्देशों पर चर्चा की जाएगी। कांग्रेस की थीम ‘सहकारी उद्यम से एक बेहतर दुनिया बनाएँ है।

मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और विभिन्न राज्यों के सहकारिता मंत्रियों के इस अवसर पर आने की संभावना हैं। कांग्रेस में सभी सहकारी सेक्टोरल क्षेत्रों में फैली सफलता की कहानी पर प्रकाश डाला जाएगा और सहकारिता में सूचना के अधिकार पर एक किताब के प्रकाशन को रिलीज किया जाएगा।

चन्द्र पाल सिंह, अध्यक्ष, एनसीयूआई ने कहा कि यह कांग्रेस भारत में सहकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी छवि का निर्माण करेगी।

देश में 6 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं। सहकारी समितियों ने गांवों को 100% और ग्रामीणों को 75% कवर कर रखा है। सहकारी समितियों की कृषि ऋण, आवास, चीनी, दूध, पर्यटन, मत्स्य, कताई, पर्यटन, उर्वरक, आदि जैसे सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के लगभग सभी क्षेत्रों में एक मजबूत उपस्थिति है।

दूध सहकारी समितियों के महत्वपूर्ण योगदान के कारण भारत विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। अमूल, इफको और कृभको सहकारी क्षेत्र में सबसे बड़ी सफलता की कहानी ह

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आईसीएम भोपाल: रक्षा कर्मियों के लिए रिटेल मैनेजमेंट प्रशिक्षण

Posted on 13 May 2013 by ajayjha

सहकारी प्रबंधन संस्थान, भोपाल पुनर्वास महानिदेशालय (पुनर्वास महानिदेशालय), नई दिल्ली ने रिटेल मैनेजमेंट पर तीन महीने के डिप्लोमा कार्यक्रम का आयोजन किया है।

सभी तीनों सेनाओं में से चालीस रक्षाकर्मी सेवानिवृत्ति के कगार पर हैं, जिन्होंने सेना, नौसेना और वायु सेना के खुदरा प्रबंधन पर प्रशिक्षण में भाग लिया।

संस्थान के निदेशक डॉ. ए.के. अस्थाना ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद रक्षाकर्मी अपने नागरिक जीवन में दूसरे कैरियर को प्राप्त कर सकते है। प्रशिक्षुओं में से अधिकांश ने एफडीआई खुदरा क्षेत्र में प्रभाव और उनमें से कुछ को खुदरा क्षेत्र में उनके खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए इस पाठ्यक्रम का विकल्प चुना है।

विषय के विभिन्न पहलुओं में अतीत, वर्तमान और खुदरा के भविष्य को समझने के लिए खुदरा पर्यावरण के बारे में छात्रों को पढ़ाया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि उपभोक्ता के व्यवहार के हर पहलू के ज्ञान के साथ जानकारी प्रदान की जाएगी।

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एनसीयूआई ने सहकारी कांग्रेस की तारीख तय की

Posted on 20 April 2013 by ajayjha

भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने अंततः भारतीय सहकारी कांग्रेस के उद्घाटन की तारीख निर्धारित कर दी है। वह सिरी फोर्ट सभागार में 18 जून, 2013 को कांग्रेस का उद्घाटन करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार कांग्रेस की अध्यक्षता करेंगे।

कांग्रेस में सहकारी क्षेत्र की प्रगति और इस क्षेत्र की आकस्मिक समस्याओं के लिए दिशा निर्देशों की समीक्षा की जाएगी। कांग्रेस की थीम सहकारी उद्यम से बेहतर दुनिया का निर्माण करना है। कांग्रेस में विदेश से और देश भर से करीब 2000 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लिए जाने की संभावना है, ऐसा एनसीयूआई की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है।

रिलीज में आगे कहा गया है कि इस अवसर पर मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और विभिन्न राज्यों के सहकारिता मंत्री सम्मानीय अतिथि होंगे। कांग्रेस में सभी सहकारी सेक्टरल क्षेत्रों में फैले सफलता की कहानी और सूचना एवं सहकारिता के अधिकार पर एक किताब रिलीज़ की जाएगी।

एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह ने कहा कि यह कांग्रेस भारत के सहकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी छवि निर्माण करनेवाली घटना होगी।

डा. चंद्रपाल सिंह ने बताया कि भारत सरकार के हाल के निर्णय जैसे सीवीसी के अधिकार क्षेत्र से सदस्यों, पदाधिकारियों के विस्तार संबंध से बहु राज्य सहकारी समितियों के कर्मचारी बहुत ही अधिक निराश है और उन्होंने इस निर्णय का जोरदार विरोध किया हैं।

उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के पदाधिकारी सहकारी समितियों के मामले में सर्वोच्च निकाय है जो कि सामान्य निकाय के सदस्यों के प्रति जवाबदेह हैं।

देश में 6 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं। सहकारिता ने 100% गांवों और 75% ग्रामीण घरों को कवर किया हुआ है। सहकारिता ने कृषि ऋण, आवास,चीनी, दूध, पर्यटन, मत्स्य, कताई, पर्यटन, उर्वरक जैसे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों के लगभग सभी क्षेत्रों में एक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

दूध सहकारी समितियों के महत्वपूर्ण योगदान के कारण भारत विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। अमूल, इफको और कृभको सहकारी क्षेत्र में सबसे बड़ी सफलता की कहानी है।

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सहकारी कांग्रेस के लिए एनसीयूआई तैयार

Posted on 12 April 2013 by ajayjha

सहकारी कांग्रेस का उद्घाटन करने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ की तैयारियाँ टॉप गियर में है। एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह इसे सहकारी दुनिया के लिए एक यादगार समारोह बनाना चाहते है।

भारतीय सहकारिता से बात करते हुए श्री यादव ने केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को धन्यवाद दिया जिन्होंने राष्ट्रपति भवन में उनके साथ जाकर इस सहकारी समारोह के लिए सहमति दिलवाने में मदद की।

“शरद जी का हाथ हमेशा हमारी मदद के लिए तैयार रहता है और उनका सहकारिता के प्रति रुख बहुत ही अच्छा है”,एनसीयूआई के अध्यक्ष ने भारतीय सहकारिता को बताया।

सही तारीख निश्चित किया जाना अभी बाकी है, हालांकि “भारत के राष्ट्रपति इस समारोह में भाग लेने के लिए सहमत हो गए है। इसे मई के अंतिम सप्ताह में आयोजित कर लिया जाएगा, “श्री यादव ने कहा।

कांग्रेस अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी को आकर्षित करने में सक्षम है। साथ ही हम आईसीए एशिया प्रशांत के बोर्ड की बैठक आयोजित करने की कोशिश कर रहे हैं”,श्री यादव ने कहा। पाठकों को याद होगा कि श्री चन्द्र पाल सिंह यादव ने पिछले साल चुनाव जीता था और वे आईसीए एशिया प्रशांत के मुखिया है।

प्रतिभागियों की बड़ी संख्या होने की संभावना के कारण समारोह के लिए बड़े से सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम को चुना गया है। लेकिन सेमिनार और सहकारी कार्यशालाएँ एनसीयूआई के सभागार में होगी।

पूरी दुनिया को हम भारत में सहकारी समितियों की सफलता की कहानी बताने के लिए तैयार है। हमारी सहकारी समितियाँ बहुत अच्छा कार्य कर रही हैं और हमें उनकी कहानियों का दुनिया भर में प्रसार करने की आवश्यकता है, उन्होंने कहा।

सहकारी क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सूचीबद्ध किया जाएगा और उनके समाधान के लिए एक ज्ञापन सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, उत्साह के साथ यादव ने भारतीय सहकारिता को बताया।

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एनसीयूआई सहकारी कांग्रेस के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी

Posted on 11 April 2013 by ajayjha

भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ अंततः संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के भव्य समापन समारोह के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता कांग्रेस की मेजबानी की तैयारी में लग गया है।

भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने मुख्य अतिथि होने की सहमति दे दी है।

एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी डॉ. दिनेश जो कि वेम्नीकॉम के दोहरी प्रभारी होने के कारण पुणे और दिल्ली के बीच समय देते रहते है ने भारतीय सहकारिता को मुस्कुराते हुए कहा कि यह कांग्रेस मई के अंतिम सप्ताह में या जून के पहले सप्ताह में संपन्न हो जाएगा।

“कांग्रेस के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी हासिल करने का श्रेय हमारे अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव को जाता है”, डॉ. दिनेश ने भारतीय सहकारिता को बताया।

सहकारी के शीर्ष निकाय एनसीयूआई ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मुख्य अतिथि के लिए आमंत्रित किया था लेकिन व्यस्तता के कारण उन्होने सहकारिता को समय नही दिया। प्रधानमंत्री 2014 में चुनाव की संभावना और
तनावपूर्ण राजनीतिक परिदृश्य के कारण सहकारी समारोह के लिए समय नही निकाल पाए।

इससे पहले इफको द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को आमंत्रित किया गया था। प्रधानमंत्री और देश के सत्तारूढ़ पार्टी शायद सहकारी समारोह को तवज्जो नहीं देते है इनमें शरद पवार एकमात्र अपवाद है, जो सहकारी समितियों के बल पर ही अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखा है।

इसके विपरीत 70 और 80 के दशक में इंदिरा गांधी ने नेफेड की एजीएम में भी में भाग लिया था। नेहरु की तो बात ही न की जाय जो सहकारी समितियों को बहुत महत्वपूर्ण मानते थे और वे चाहते थे कि संपूर्ण भारतीय राष्ट्र सहकारी आंदोलन से लाभ ग्रहण करें। .

एनसीयूआई उचित अतिथि के अभाव में छह महीने से ज्यादा के लिए सहकारिता कांग्रेस स्थगित कर दिया था। वह भारत के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से कम पर समझौता करने को तैयार नहीं था।

इससे पहले उसने सहकारी कांग्रेस के आयोजन के लिए नोएडा स्थित फिल्म स्टूडियो के साथ टाई अप करने की कोशिश की थी लेकिन पर्याप्त समर्थन हासिल करने में विफल रहने के कारण इस विचार को त्याग दिया गया।

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एनसीयुआई परिसर में परियोजना कर्मियों का हंगामा

Posted on 13 March 2013 by ajayjha

एनसीयुआई के दिल्ली स्थित सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान परियोजना कर्मियों ने वेतन को लेकर जोरदार हंगामा किया। कर्मचारियों का कहना है कि उनको कई सालों से वेतन नही दिया गया है।

एनसीयुआई फील्ड परियोजना के सचिव श्री सत्यवीर सिंह ने भारतीय सहकारिता डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि कृषि मंत्रालय के सहयोग से चलाए जाने वाले एनसीयुआई के फील्ड प्रोजेक्ट के कार्य में करीब 186 कर्मचारी कार्यरत है, जिसमें नियमित वेतनमान पर कार्य करने वाले 83 कर्मचारी और बाकी अनुबंध के तहत कार्य करने वाले कर्मचारी थे, लेकिन 4 मई 2006 को मनमाने ढंग से नोटिस जारी करके सभी को अनुबंध के तहत कर दिया गया, श्री सिंह ने कहा।

श्री सिंह ने बताया कि तब से लेकर अब तक वेतनमान में कोई बढ़ोत्तरी नही की गई है, इसके खिलाफ यदि कोई आवाज़ उठाता है तो उसका ट्रांसफर कर दिया जाता है, श्री सिंह ने कहा।

श्री सिंह ने कहा कि एनसीयुआई से हमने छठे वेतन आयोग के अनुसार वेतन दिए जाने की माँग की है यदि एनसीयुआई की माली हालत ठीक नही है तो हमें पाँचवें वेतन आयोग के अनुसार मार्च तक की पूरी रकम दिए जाने की बात लिखित में दी जाए, श्री सिंह ने कहा।

परियोजना कर्मियों में से एक ने कहा कि कृषि मंत्रालय की तरफ से एनसीयुआई को दिए जाने वाले फंड की पहली किश्त एनसीयुआई को मिल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस फंड को न तो अब तक परियोजना कर्मियों को दिया गया है और न ही इस फंड का ब्यौरा मंत्रालय को दिया गया है जिसके कारण मंत्रालय ने फंड की दूसरी किश्त को रोक दिया है।

पाठकों को याद होगा कि भारतीय सहकारिता डॉट कॉम ने एनसीयुआई द्वारा फील्ड परियोजना कर्मियों के वेतन में 60 प्रतिशत की वृद्धि की खबर प्रकाशित की थी। जब कर्मियों ने इस बात की पुष्टि एनसीयुआई के कार्यकारी अधिकारी डॉ. दिनेश से करना चाही तो उन्होंने इस संदर्भ में कोई जवाब नही दिया।

एनसीयुआई के गवर्निंग काउंसिल के अधिकारियों में से जी एच अमीन, मुदित वर्मा और कार्यकारी अधिकारी डॉ. दिनेश ने मार्च-अप्रैल तक वेतनमान से जुड़ी समस्याओं का निराकरण करते हुए 70 प्रतिशत वेतन देने का आश्वासन दिया है।

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एनसीयुआई ने परियोजना कर्मियों के लिए तीन दिवसीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया

Posted on 13 March 2013 by ajayjha

सोमवार को एनसीयुआई के दिल्ली स्थित सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम और एनसीयुआई सहकारी शिक्षा क्षेत्र की परियोजनाओं के परियोजना कर्मियों के लिए तीन दिवसीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।

इस कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि के रुप में कृभको के मार्केटिंग प्रमुख डॉ. सदाशिवराव के अलावा एनसीयुआई के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, एनसीयुआई के कार्यकारी अधिकारी डॉ. दिनेश और एनसीयुआई निदेशक गुलाब सिंह आजाद मौजूद थे।

इस कार्यक्रम के संदर्भ में जब भारतीय सहकारिता डॉट कॉम ने एनसीयुआई के कार्यकारी अधिकारी डॉ. दिनेश से बात की तब उन्होंने बताया कि एनसीयुआई के तहत जिन 44 परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है उनके परियोजना कर्मियों के लिए इस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया है।

डॉ. दिनेश ने बताया कि इस कार्यक्रम के द्वारा उनको जिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है उनकी समीक्षा की जाएगी। इससे प्राथमिक सोसायटी को और अधिक मजबूत किया जा सकता है, डॉ. दिनेश ने कहा।

कांफ्रेंस के पहले दिन की समीक्षा बैठक में एनसीयुआई के निदेशक गुलाब सिंह आजाद ने बताया कि आज बकरियों की प्रजातियों के ऊपर समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया जिसका नाम अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस और उद्यमशीलता रखा गया। बैठक में बकरियों की प्रजातियों, उनके रख-रखाव, बकरियों के चारें के ऊपर सदस्यों के साथ समीक्षा की गई, श्री आजाद ने कहा।

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एनसीयुआई सभागार: बुकिंग बेरोकटोक जारी

Posted on 11 March 2013 by ajayjha

मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दिनेश का अभिकथन है कि एनसीयुआई सभागार के पुराने विक्रेता का व्यवसाय के लिए उनके अनुबंध का नवीकरण नहीं किया गया है, लेकिन भारतीय सहकारिता डॉट कॉम को इसका विपरित ही स्थिति मिली है।

जब भारतीय सहकारिता ने पुराने विक्रेता नकली पहचान पर एक हॉल बुक करने के लिए फोन किया, तो उसने बाहर हॉल को अलग-अलग दरों की बात की, “70 लोगों के एक असेंबली के लिए हम एक शिफ्ट के लिए 17 हजार रुपये चार्ज करते है, विक्रेता ने बताया।

इससे पहले सभागार के मुद्दे को एनसीयुआई की कार्यकारी समिति की बैठक में उठाया गया था जो कि, काफी देर से लंबित है। अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह ने समिति के सदस्यों को इस मुद्दे को जल्दी हल करने को कहा है।

जी एच अमीन, डॉ. दिनेश और मुदित वर्मा इस समिति के सदस्य हैं।

ई.सी. के अन्य सदस्यों की मदद के साथ समिति ने निर्णय लिया कि विक्रेता पहले बिजली और पानी के बिल को चुकाए। कटौती के बाद यह राशि 60-70 लाख रुपये हो गई है, समिति के एक सदस्य ने भारतीय सहकारिता को सूचित किया।

यह भी निर्णय लिया गया कि अनुबंध के नवीकरण को पुराने विक्रेता के लिए मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता है और एक उचित तंत्र को इसके लिए विकसित किया जाय। सबसे पहले हमने वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए सभागार को पट्टे के लिए डीडीए की मंजूरी की जरूरत है, समिति के सदस्यों में से एक ने भारतीय सहकारिता को बताया।

हमने अखबार में विज्ञापन डाल दिया है और भविष्य में जो लोग एनसीयुआई के साथ अनुबंध में प्रवेश करना चाहते हैं उनसे प्रस्तावों की अपेक्षा है, सदस्य ने कहा।

उन्होंने भारतीय सहकारिता को बताया कि एनसीयुआई के अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह और नेफेड अध्यक्ष बिजेन्दर सिंह ने दृढ़ता से इस कदम का समर्थन किया है।

ऐसी अफवाह है कि अनुबंध को पुराने विक्रेता के पक्ष में नवीकरण किया गया है सदस्य ने कहा कि ऐसा जो करेगा उसे जेल जाना पड़ सकता है।

पाठकों को याद होगा कि पुराने विक्रेता ने एनसीयुआई के साथ एक सौदेबाजी के तहत अपने अनुबंध को नवीनीकृत करने को कहा था या फिर शीर्ष संगठन से अपनी बकाया राशि को भूलने को कहा था।

विक्रेता पर सभागार के खराब हालत में रखने का भी आरोप है, साथ ही कुर्सियों के टूटी होने और एयर कंडीशनर के काम न करने का भी आरोप लगा है।

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आईसीएम चेन्नई के एमबीए ब्लॉक का उद्घाटन

Posted on 08 March 2013 by parasnath

तमिलनाडु के सहकारी मंत्री सेल्लूर के.राजू नातेसन ने कोआपरेटिव मैनेजमैंट चेन्नई संस्थान में एक नवनिर्मित एमबीए ब्लॉक का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव दिल्ली से समारोह में भाग लेने के लिए आए थे।

मंत्री ने अपने भाषण में छात्रों को अपने पैरों पर खड़ा होने की सलाह दी और एमबीए के लिए नए भवन को पूरा करने में निदेशक के प्रयासों की प्रशंसा की।

एनसीयुआई के अध्यक्ष डॉ. यादव ने देश में आईएसएम के कामकाज और प्रशिक्षण के बारे में सविस्तार से बताया।

श्रीमती एम पी निर्मला, तमिलनाडु सरकार के कोऑपरेशन विभाग के सचिव, जे सी डी प्रभाकर, विधायक, विलीवक्कम निर्वाचन क्षेत्र, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार पी. सीतारमन और सहकारी विभाग और संस्थानों के अन्य अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।

मंत्री ने संस्थान में आयोजित खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए।

कार्यक्रम श्री आर. राजेन्द्रन प्रशासक तमिलनाडु राज्य सहकारी संघ द्वारा धन्यवाद के साथ समाप्त किया गया। समारोह में शिक्षकों, कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं और एमबीए छात्रों ने भाग लिया।

डॉ पी जगन्नाथन ने संस्थान के निदेशकों का स्वागत किया और मेहमानों को सम्मानित किया।

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सहकारिता के प्रति कोई गंभीर नही: एनसीयुआई अध्यक्ष

Posted on 06 March 2013 by Manoj

मंगलवार को एनसीयुआई, नई दिल्ली में सहकारी शिक्षा पर राज्य सहकारी संघों के कार्यकारी प्रबंध निदेशकों का राष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. चंद्रपाल यादव ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि एनसीयुआई सहित कई कॉपरेटिव सोसायटी की आर्थिक स्थिति जर्जर हो गई है, भारत सरकार के बजट में भी सहकारिता का नाम तक नही आया यह दुर्भाग्यपूर्ण है, श्री यादव ने कहा।

श्री यादव ने कहा कि सहकारी आंदोलन से जुड़े लोगों के अलावा कोई इसे गंभीरता से नही ले रहा है। हम हमेशा अच्छी ट्रेनिंग और सहकारी शिक्षा देने की बात करते है लेकिन यह तभी संभव है जब सहकारिता के लिए कोई फंड दिया जाएगा, श्री यादव ने कहा।

श्री यादव ने यह भी कहा कि भारत सरकार के माध्यम से पहले शिक्षा के लिए फंड दिया जाता था लेकिन बैधनाथ कमेटी के कारण वह भी बंद कर दिया गया।

अपने भाषण में श्री यादव ने 97वें संशोधन को सहकारिता के लिए वरदान बताया उन्होंने कहा कि इससे सहकारिता नए आयाम को छुएगा।

कार्यक्रम में श्री दिलीप सिंह, एडिशनल सेक्रेटरी/आईएएस, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए। उनके अलावा कार्यक्रम में एनसीयुआई अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल यादव, एनसीयुआई कार्यकारी अधिकारी डॉ. दिनेश, एनसीयुआई निदेशक श्री मोहन मिश्रा, और एनसीसीई निदेशक डॉ. गुलाब सिंह आजाद उपस्थित थे।

इससे पहले श्री दिलीप सिंह ने अपने उद्बोधन में सहकारी शिक्षा पर जोर देते हुए उसके कंटेंट को समय के साथ बदलने की बात कही। श्री सिंह ने कहा कि कई बड़ी सहकारी समितियों के अलावा सहकारिता में पेशावर काम करने के तरीके का अभाव है।

कई राज्यों के कॉपरेटिव सोसायटी से आए कार्यकारी प्रबंध निदेशकों की उपस्थिति महत्वपूर्ण थी।

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