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Archive | नफेड

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नेफेड: शेयर मूल्य में वृद्धि पर भ्रम कायम

Posted on 07 August 2012 by ajayjha

नेफेड शेयर धारक यह निर्णय नही कर पा रहे है कि नेफेड के साथ वे अपने संबंधों को जारी रखे या नहीं। उनको लगता है कि नेफेड डूबती नाव है।

नेफेड  ने इस बीच शेयर कीमत में 40,000 रुपये से 1 लाख तक की बढ़ोत्तरी करने का फैसला किया है। हालांकि वृद्धि की घोषणा कुछ साल पहले की गई थी, लेकिन अब बोर्ड कठोरता के साथ इस पर अमल करना चाह रहा है।

एजीएम में भाग लेने के लिए केवल वही डेलीगेट्स पात्र हैं जो कि दांव लगाने के लिए तैयार हैं, नेफेड अध्यक्ष बिजेन्दर सिंह ने भारतीय सहकारिता से बात करते हुए कहा। यह निर्णय बोर्ड द्वारा कुछ साल पहले ही ले लिया गया था और यह कोई नई बात नहीं है, श्री सिंह ने कहा।

शेयर धारकों को यह सवाल सता रहा है कि ऐसे सहकारी उद्यम में निवेश करना ठीक होगा जिसमें सुधार का कोई संकेत नहीं दिखता है। सरकार ने इस सहकारिता संगठन को सहायता देना बंद कर दिया जिसके कारण यहाँ अनिश्चितता का वातावरण कायम है।

भारतीय सहकारिता से बातचीत में नेफेड अध्यक्ष बिजेन्दर सिंह ने कहा कि सरकार अध्यक्ष की शक्तियों में कटौती चाहती थी, जिसे हमने स्वीकार किया।

यह पूछे जाने पर कि वर्तमान संकट से बाहर निकालने के लिए सरकार आगे बढ़कर मदद क्यों नहीं कर रही है तब बिजेन्दर सिंह ने कहा कि यह प्रश्न सरकार से पूछिए हमसें नही।

भारतीय सहकारिता को पता चला है कि सरकार देय वसूली के मुद्दे पर कानूनी समाधान का इंतज़ार कर रही है, केन्द्रीय रजिस्ट्रार कोर्ट में बकाएदारों पर 1400 करोड़ रुपये के टाई अप में घाटे के मद्देनजर आरोप लगे थे। नेफेड को उसके कुछ निर्देशकों के गलत हरकत के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

शेयर धारकों के मन में कई उलझनें हैं, नेफेड द्वारा दिया गया लाभांश 5 से 7 प्रतिशत है जो कि उन्हें कृषि कॉपरेटिव से जोड़े रखने के लिए पर्याप्त आकर्षण नही है, एक शेयर धारक ने भारतीय सहकारिता को बताया।

इस बीच नेफेड के कई विरोधियों ने अफवाह फैला रखी है कि नेफेड पुराने प्रतिनिधियों या नेफेड के शेयर धारकों के माध्यम से अपनी टाई अप घाटे को कवर करने की कोशिश कर रहा है।

बिजेन्दर सिंह ने इन अफवाहों को बचकाना कहकर खारिज कर दिया, नेफेड में नुकसान शेयर धारकों के माध्यम से कवर नहीं किया जा सकता है। सिर्फ सरकार नेफेड को वर्तमान परेशानी से बाहर निकाल सकती है, उन्होंने जोर देकर कहा।

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इस्तीफा से अगर नेफेड बचता है तो देने को तैयार : अध्यक्ष

Posted on 13 February 2012 by ajayjha

कृषि सहकारी नेफेड की अनिश्चितता बरकरार है क्योंकि केंद्रीय सरकार और कृषि सहकारी बोर्ड अपनी-अपनी स्थिति से बदलने को इनकार कर रहे हैं.

indiancooperative.com ने मालूम किया है कि सरकारी कर्मचारियों ने एक पैकेज डील के साथ नेफेड के अधिकारियों से संपर्क किया और समझौते के एक भाग के रूप में नेफेड के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह का इस्तीफा मांगा.

कहा जाता है कि अध्यक्ष श्री सिंह ने प्रस्ताव पर बोर्ड के सदस्यों के साथ बातचीत की है. इस बैठक में प्रस्ताव के पक्ष में आम सहमति उभरी है इस शर्त पर कि इस्तीफे के पूर्व निधि का हस्तांतरण होना चाहिए. लेकिन मंत्रालय के अधिकारियों ने विचार को खारिज कर दिया और एक पूर्व शर्त के रूप में श्री सिंह के इस्तीफे पर जोर दिया.

Indiancooperative.com से बात करते हुए नफेड के अध्यक्ष श्री बिजेन्दर सिंह खबर को खारिज कर दिया और कहा कि मंत्रालय के किसी भी अधिकारी ने कभी उनसे न तो संपर्क किया न इस्तीफे की मांग की. “यह निराधार है क्योंकि पुनरुद्धार पैकेज का कोई प्रस्ताव या मेरे इस्तीफे का सवाल कभी सामने नहीं आया है” उन्होंने कहा.

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नैफेड घोटाले में रिकवरी आदेश भेजा

Posted on 05 November 2011 by ajayjha

केन्द्रीय पंजीयक श्री आर.के. तिवारी ने  नैफेड के अध्यक्ष और कई निर्देशकों के विरुद्ध 4000 हजार करोड़ रुपये के टाई – अप घोटाले में वसूली आदेश भेज कर लगभग एक धमाके कर दिया है. कुछ वर्तमान और पूर्व निदेशकों के नाम जिसे वसूली नोटिस भेजा गया है, में वर्तमान अध्यक्ष श्री बिजेन्दर सिंह, सी.व्ही. होलकर- वर्तमान निदेशक, श्री निवास गौडा- ​​पूर्व निदेशक, नगर दल्ली- पूर्व निदेशक, पंजाब से श्री मक्कर- पूर्व निदेशक. सूची में कर्नाटक से दो पूर्व मंत्री हैं.

जो वसूली नोटिस भेजी गई है उसमें भी नेफेड के 29 अधिकारियों की सूची है.

Indiancooperative.com से बात करते हुए कांग्रेस के विधायक और वरिष्ठ सहकारी नेता बिजेंदर सिंह ने पत्र की प्राप्ति की पुष्टि की.  श्री सिंह ने कहा ”आदेश में सब कुछ अस्पष्ट है और मुझे 30 प्रतिशत में से एक प्रतिशत जमा करने के लिए कहा गया है”.  बिजेंदर इस समझने में सक्षम नहीं लग रहे थे लेकिन मंत्रालय के सूत्रों ने Rs120 करोड़ के आसपास क आंकड़ा बताया है.

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परेशान कृषि सहकारी समितियां सरकार बचाएंगी

Posted on 07 September 2011 by ajayjha

नेफेड और एनसीसीएफ जैसे कृषि सहकारिता अच्छी स्थिति में नहीं है, लेकिन सरकार के पास उन पर निर्भर रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. प्याज की बढ़ती कीमतों ने फिर से सरकार  को इन कृषि सहकारी समितियों की तरफ देखने के लिए बध्य कर दिया.

सरकार ने सोमवार को सहकारी समिति – नेफेड और एनसीसीएफ - को निर्देश दिया है कि रसोई की प्रधान चीज राष्ट्रीय राजधानी में अपनी दुकानों से 20 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर  बेची जाय.  इस आशय का निदेश खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री के.वी. थामस ने सोमवार की शाम को प्याज की कीमतों की समीक्षा के लिए बैठक के बाद दिया गया, एक आधिकारिक बयान में कहा गया.  कृषि सहकारी नेफेड के पास दिल्ली में छह दुकानें हैं जबकि एनसीसीएफ (राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ) के 15 ऐसे केंद्रों हैं.

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नाफेड अवैध खनन में शामिलः लोकायुक्त

Posted on 03 August 2011 by ajayjha

विशालकाय कृषि सहकारी नाफेड जो कल तक देश की सहकारिता की शान था, रहा है खुद को सभी किस्म के घोटाले में उलझा हुआ देख रहा है. कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े, जिन्होंने भाजपा के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया, ने कर्नाटक में गलत काम करने वालों में नाफेड का भी नाम शामिल बताया.

नेफेड की बंगलोर इकाई पर लौह अयस्क के अवैध निर्यात का चार्ज लगा है.  लोकायुक्त ने इस पर वित्तीय अनियमितता का भी आरोप लगाया है.

लोकायुक्त ने सिफारिश की है कि राज्य सरकार केन्द्र से नेफेड के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध करे. केन्द्रीय सरकार को अवैध खनन में शामिल लोगों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू करनी चाहिए.

एक अध्याय जिसका शीर्षक है ’नाफेड द्वारा अवैध निर्यात’, में संतोष हेगड़े ने कहा है कि नैफेड संदिग्ध लेन – देन और विभिन्न बंदरगाहों के लिए लौह अयस्क के परिवहन में शामिल रहा है.

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नैफेड-एनसीसीएफ ने एफसीआई का जगह लेने का मौका गंवाया

Posted on 21 July 2011 by ajayjha

केन्द्र से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक सभी ने भारतीय खाद्य निगम को कई करोड़ रुपए के अनाज के उचित भंडारण की कमी के कारण बर्बाद होने के लिए दोषी पाया.  नैफेड और एनसीसीएफ, एफसीआई की जगह  ले लेंगे – शुरुआत में ऐसी उम्मीद लग रही थी.  लेकिन अफसोस कि उनकी संदिग्ध स्थिति के चलते सरकार की दृष्टि में भी वे एफसीआई के संभावित विकल्प के रूप नहीं हैं.

भंडारण की उभरती समस्याओं के बीच, बुधवार को केंद्र ने पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य सरकारों को 15.2 मिलियन टन खाद्यान्न की अतिरिक्त भंडारण क्षमता के निर्माण में तेजी लाने को कहा.

वर्तमान में केंद्र के पास 62.23 मि.टन खाद्यान्न की भंडारण क्षमता है. हालांकि गोदामों में स्टॉक 65 मि.टन के चरम स्तर पर हैं. परिणाम स्वरूप, खाद्यान्नों की काफी बड़ी मात्रा खुले में संग्रहित हैं.

जिस बैठक में पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, और बिहार के खाद्य मंत्रियों ने भाग लिया उसमें बम्पर उत्पादन और खरीद के मद्देनजर पिछले वर्ष अपर्याप्त भंडारण क्षमता के मुद्दे को संबोधित किया गया.

नंदन नीलेकणी, भारत की अद्वितीय पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष और योजना आयोग और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे.

केंद्रीय के अन्न के भंडारण के लिए गोदाम के निर्माण के अलावा, थॉमस ने राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे अपने स्वयं के उपयोग के लिए अतिरिक्त भंडारण स्थान बनाएं.

एनसीसीएफ और नैफेड इसमें एक प्रमुख भूमिका निभा सकते थे यदि उनके प्रबंधन में सरकार को पूर्ण विश्वास होता.  नेफेड गठबंधन के नुकसान की चपेट में है और एनसीसीएफ “कुछ सौदों” के मामलों पर सीबीआई की निगरानी में है.

केंद्र ने वर्ष 2010-11 की फसल से गेहूं के 28.03 मि.टन और चावल के 32.07 मि.टन की खरीद की है. 2010-11 फसल वर्ष में गेहूं का उत्पादन रिकार्ड 85.93 मि. टन और चावल  का ९५.३२ मिलियन टन रहा.

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नैफेड के खातों की सीएजी द्वारा जांच के लिए उच्च न्यायालय का आदेश

Posted on 04 May 2011 by ajayjha

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय कृषि विपणन संघ (नैफेड) में 900 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप के मामले में जांच के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) को निर्देश दिया .

अदालत का अवलोकन सार्वजनिक हित (पीआईएल) के एक  मुकदमे की सुनवाई के दौरान आया जिसे विकास जैन ने दायर किया है.  मामला की अगली सुनवाई 25 मई को होगी.

जैन के वकील सुग्रीव दुबे ने कहा कि नैफेड ने किसानों के 3700 करोड़ रुपए को अन्य मद मे लगा दिया.

उच्च न्यायालय ने जांच एजेंसी को नैफेड के दोषी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का  निर्देश दिया था.

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सहकारी समितियों के आरटीआई मामलों की सुनवाई 17 मार्च को

Posted on 21 February 2011 by vimalkumar

देश की अदालतों में कई ऐसे मुकदमे लम्बित हैं जिनमें सहकारी समितियों का तर्क है कि वे सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में नहीं आते.

भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड), कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) सहित कई सहकारी समितियों का कहना है कि ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ सहकारिता के सिद्धांतों के विरुद्ध है.

कृभको, नेफेड और एनसीसीएफ के आरटीआई मामलों की सुनवाई दिल्ली उच्च न्यायालय में 17 मार्च को होनी है.

सहकारिता सूत्रों के अनुसार जमीनी स्तर पर कृषि सहकारी समितियों में सरकारी इक्विटी 4.39% है और पूरे क्षेत्र में 10% से कम है. इस तरह उन्हें आरटीआई की जिज्ञासु आँखों से मुक्त होना चाहिए.

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प्याज संकट: बसु ने नफेड को अगाह किया

Posted on 13 January 2011 by Vaibhav

एक तरह से ऊंची कीमतों से लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने कृषि सहकारी नफेड को दिल्ली में ३५ रु.किलो प्याज की बिक्री के लिए और अधिक बिक्री केन्द्र स्थापित करने के लिए कहा.

नैफेड, जिसके राजधानी में पांच भंडार हैं, को मोबाइल ट्रकों और टेम्पो के माध्यम से प्याज बेचने को कहा गया है.

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प्याज: नेफेड-एनसीसीएफ सरकार के प्रयास में शामिल.

Posted on 31 December 2010 by ajayjha

दिल्ली सरकार लोगों को  प्याज की आसमान  छूती कीमतों से राहत दिलाने का प्रयास कर रही है जिसमें नफेड और एन.सी.सी.एफ. भी शामिल हो गए है.  दिल्ली सरकार ने लगभग 400 दुकानों से ६०-७० रु. किलो की जगह ४० रु. पर बिक्री  शुरू की है .

एनसीसीएफ के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह जो सरकार के प्रयास में मदद करने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं,  ने कहा कि सरकार इस लडाई में अकेले नहीं है क्योंकि उपभोक्ता सहकारी भी प्याज की कीमतों से राहत दिलाने में लोगों के साथ हैं और हर संभव प्रयास कर रहे हैं.

दिल्ली विकास मंत्री राज कुमार चौहान ने कहा कि प्याज मदर डेयरी के 288  आउटलेट, केन्द्रीय भंडार भंडार के 85 ,नेफेड के पांच   और  एनएनसीसीएफ की 13 दुकानों पर उपभोक्ताओं को  उपलब्ध कराई जा रही है.  उपभोक्ता  एक बार में अधिकतम दो किलो प्याज खरीद सकते हैं.

इससे पहले, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा की और चयनित दुकानों से उचित दर पर प्याज की बिक्री अनुमति दे दी.

बैठक में दीक्षित ने अधिकारियों को  थोक और खुदरा बाजार पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए और उन्हें जमाखोरों और कालेबाजारियों के खिलाफ छापे जारी रखने को कहा. उन्होंने जनता से अपील भी की कि उन्हें घबडाने की जरूरत नहीं है क्योंकि बाजार में पर्याप्त  मात्रा में प्याज उपलब्ध है .  उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्याज की कीमतों में जल्द ही गिरावट आएगी.  अधिकारियों ने कहा कि  विभिन्न जगहों पर छापे  मारने के कारण थोक मंडी में  प्याज की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि  हुई  है.

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