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Tag Archive | "शरद पवार"

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अधिक चीनी का निर्यात की मांग करते हुए पवार का प्रधानमंत्री को पत्र

Posted on 23 June 2011 by ajayjha

कृषि मंत्री शरद पवार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर उनसे चीनी के और निर्यात की अनुमति मांगी है.

पत्र में पवार ने कहा है कि चीनी के ज्यादा निर्यात की स्थिति है क्योंकि घरेलू उत्पादन अधिक है और वैश्विक कीमतें स्थिर हैं जिससे प्रति क्विंटल 500-600 रुपए के लाभ की स्थिति है, सूत्रों ने कहा.

उचित समय पर निर्यात का निर्णय लेने की जरूरत पर बल देते हुए मंत्री ने कहा कि देश ने पहले ही निर्णय में देरी के कारण जनवरी से मार्च 2011 में चीनी निर्यात का एक उत्कृष्ट मौका खो दिया है.

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केन्द्रीय पंजीयक जल्दी में नहीं हैं

Posted on 23 June 2011 by ajayjha

सहकारी क्षेत्र के मामलों समय सीमा के भीतर नहीं निपटाये जा रहे हैं. एक पद्धति जिसमें लोगों को भरोसा हो, के लिए यह जरूरी है कि लोगों को न्याय जल्दी मिले. क्या शरद पवार सुन रहे हैं?  ऐसे कई मामले हैं. NCUI के चुनाव के आर्बीट्रेशन केस में लंबे समय से कोई प्रगति नहीं है. तीन मामले केन्द्रीय पंजीयक के पास लंबित हैं.

केन्द्रीय रजिस्ट्रार आर.के. तिवारी सहकारी क्षेत्र के मुकदमों के साथ तालमेल रखने में सक्षम नहीं सिद्ध हो पा रहे है.  मामले को निपटाने के लिए नियुक्ति आर्बीट्रेटर अपनी इच्छा से मामले को अधर मे छोड़ देता है.

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MSCB का नुकसान – राष्ट्रीयकृत बैंक का लाभ

Posted on 22 June 2011 by ajayjha

MSCB का नुकसान - राष्ट्रीयकृत बैंक का लाभ  है. फॉर्म क्रेडिट ऋण का वही हाल है कि उनका वितरण उन्हीं के माध्यम से हो रहा है, सहकारी बैंकों के माध्यम से नहीं.

महाराष्ट्र राज्य सहकारी मंत्री ने कहा है कि 23,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट ऋण प्राथमिक कृषि सोसायटी के माध्यम से दिया जाएगा जिसमें कोई संदेह नहीं है. लेकिन PACs को राष्ट्रीयकृत बैंकों से पैसा मिलेगा, MSCB या DCCB से नहीं.  कई जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को भी वित्तीय कुप्रबंधन का सामना करना पड़ रहा है.

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MSCB: लड़ाई से बेहतर संघर्ष-विराम

Posted on 28 May 2011 by ajayjha

दो सहयोगी दलों राकांपा और कांग्रेस को फिर से एक जुट करने की राजनीतिक परिपक्वता अंततः शुरु हो गई  है.

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने नई दिल्ली में कहा कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) का मुद्दा उनकी पार्टी और राज्य में कांग्रेस के बीच के संबंधों पर कोई असर नहीं डालेगा. केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी और कांग्रेस स्थानीय निकाय के 2011 के अंत में होने वाले चुनाव अलग-अलग लड़ेंगे.

भारतीय रिजर्व बैंक से राज्य सरकार ने अनुरोध किया गया है कि बैंक को अपना कारोबार करने की अनुमति देने पर विचार किया जाय क्योंकि पिछले  वित्तीय वर्ष में इसमें  रुपए 238.14 करोड़ की राशि की सकारात्मक वृद्धि हुई है.

एक संघर्ष विराम इस तथ्य के मद्देनजर अवश्यंभावी  है कि शिवसेना, भाजपा और अब अठावले ने कांग्रेस-राकांपा गठबंधन के विरुद्ध हाथ मिला लिए हैं.  कुछ दिनों से कांग्रेस और राकंपा के नेताओं तेवर अधिक नरम हो गए हैं.

इस बीच, खबर है कि नाबार्ड MSCB को फिर से वित्त प्रदान कर सकता है.  राज्य सरकार ने इस उद्देश्य के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के साथ एक मजबूत दावा पेश किया है.

 

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MSCB: चव्हाण का राजनीति से इनकार

Posted on 12 May 2011 by ajayjha

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के बोर्ड के विघटन के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं था.
“बैंक के बोर्ड को भंग करने का फैसला रिजर्व बैंक द्वारा लिया गया था. हमारा हित इस बात में है कि बैंक के परिसमापन की कारवायी न की जाय” उन्होंने कहा.

MSCB का बोर्ड, जिस पर शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का नियंत्रण था, हाल ही में नाबार्ड द्वारा तैयार रिपोर्ट के आधार पर रिजर्व बैंक द्वारा भंग कर दिया गया. नाबार्ड ने बैंक में विभिन्न अनियमितताओं की ओर इशारा किया था.

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निर्भरता सिंड्रोम से मुक्ति : शरद पवार

Posted on 24 April 2011 by ajayjha

बुधवार को राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के सहकारी मंत्रियों का सम्मेलन हुआ जिसमें सर्वसम्मति से संकल्प लिया गया कि सहकारी क्षेत्र को पुनः सशक्त बनाने के लिए तत्काल कदम उठाया जाएगा क्योंकि इस क्षेत्र को एक ओर तो कड़ी प्रतिस्पर्धा की चुनौती का सामना करना पड़ रहा और दूसरी ओर सरकार का रुख भी सहयोगात्मक नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2012 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है.  यह सम्मेलन इसी पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया था.

सम्मेलन में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, मणिपुर, उड़ीसा, पांडिचेरी, राजस्थान और त्रिपुरा के राज्य सहकारिता मंत्रियों ने भाग लिया.

सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों में सहकारिता के बहुमूल्य योग्दान का उल्लेख किया गया, जैसे- ग्रामीण ऋण, कृषि इनपुट और उत्पादन, कृषि प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन, उपभोक्ता, उर्वरक, डेयरी, मछली पालन, आवास, आदि.

सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि जब तक सहकारिता अपने आंतरिक ताकत का विकास नहीं करती, वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में इसके विकास में कठिनाइयां आएंगी.

उनका यह भी विचार है कि सहकारी समितियों को अनिवार्य रूप से एक आर्थिक उद्यम की तरह समझना चाहिए जिसमें सदस्यों की भागीदारी की महत्ता हो.  श्री शरद पवार ने राज्य के मंत्रियों को बताया कि भारत सरकार ने सहकारी समितियों के सुधार के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं जिससे कि वे जीवंत, व्यवहार्य और लोकतांत्रिक संस्थान बन सकें तथा सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धी  चुनौतियों का सामना कर सकें.

कृषि सचिव श्री पी.के. बसु ने सहकारी समितियों के समक्ष उपस्थित चुनौतियों के बारे में सम्मेलन को जानकारी दी और सहकारी क्षेत्र में लोगों के विश्वास को बहाल करने की जरूरत पर बल दिया.

राज्य के सहकारिता मंत्रियों ने सहकारिता क्षेत्र के सुधार के लिए केन्द्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन किया.  उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकारें सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगी जिससे कि समितियां अपने सदस्यों की प्रभावशाली ढंग से सेवा कर सकें.

सम्मेलन में एक सर्वसम्मत विचार उभरा कि सरकार समुचित कानूनी और नीतिगत सुधारों के माध्यम से सहकारिता को निरंतर समर्थन दे जिससे कि सहकारी समितियों को स्वायत्तता प्राप्त हो सके और वे एक सदस्य प्रधान संस्थान बन सकें.

देश में सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाने की दृष्टि से सम्मेलन में सर्वसम्मति से निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्रवाई करने के लिए संकल्प पारित हुआ: -

(i) केन्द्र और राज्य सरकारें संविधान (111वां संशोधन) विधेयक, 2009 को जल्दी से जल्दी पारित कराने के लिए कदम उठाएंगी.
(ii) सहकारिता पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों की तर्ज पर कानूनी, संस्थागत और प्रणालीगत सुधार लाने के लिए राज्य कदम उठाएं.
(iii) राज्य अल्पावधि सहकारी ऋण संरचना हेतु पुनरुद्धार पैकेज लागू करने की गति को तेज करने के लिए कदम उठाए जिससे कि किसानों को ऋण आबंटन की गति तेज हो सके.
(iv) केन्द्र और राज्य सरकारें उपयुक्त संस्थागत तंत्र का गठन करेंगी जिससे बीमार सहकारी समितियों का पुनरुद्धार और पुनर्वास हो सके.
(v) सहकारी क्षेत्र को मजबूत और पुनर्जीवित करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें, सहकारी संस्थान और अन्य हितधारक अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2012 में विभिन्न उपायों के लिए मिल कर काम करेंगे.
(vi) राज्य सूक्ष्म वित्त संस्थाओं और संयुक्त देयता समूह के विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए अनुकूल माहौल पैदा करेंगे जिससे किसानों को संस्थागत ऋण की उपलब्धि का विस्तार हो सके.
(vii) सहकारी समितियों को आयकर के दायरे से मुक्त करने पर विचार करने के लिए वित्त मंत्रालय से अनुरोध किया जा सकता है.
सहकारिता की विश्वसनीयता और गरिमा को बहाल करने की प्रतिज्ञा के साथ सम्मेलन सम्पन्न हुआ, ताकि सहकारिता स्वायत्त, आत्मनिर्भर, लोकतांत्रिक और सदस्यों के प्रति जवाबदेह बन सके और अपने सदस्यों तथा अन्य हितधारकों की अपेक्षाओं को पूरा कर सके.

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भारत को 21 नहीं बल्कि 35 मि.टन खाद की जरूरत है: पवार

Posted on 10 April 2011 by ajayjha

कृषि मंत्री शरद पवार ने नई दिल्ली में कहा कि कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उर्वरक उत्पादन को वर्तमान स्तर 21 मि. टन से बढ़ा कर 35 मिलियन टन प्रति वर्ष करने की जरूरत है.

“यह अनुमान है कि देश में वर्ष 2025 तक की बढ़ती आबादी के भरण-पोषण के लिए 300 मिलियन टन तक खाद्यान्न के उत्पादन के लिए लगभग 45 मिलियन टन उर्वरक की आवश्यकता होगी” श्री पवार ने नई दिल्ली में एक खरीफ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा.

पवार ने कहा कि 8-10 लाख टन उर्वरक की आपूर्ति जैविक स्रोतों से की जा सकती है, बाकी के लिए रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहना पड़ेगा.

“इसका मतलब है कि उर्वरकों की घरेलू आपूर्ति को वर्तमान 21 मि. टन से बढ़ाकर 35 मिलियन टन प्रति वर्ष तक करने की जरूरत है,” उन्होंने कहा.

कृषि मंत्रालय के तीसरे संशोधित अनुमान के अनुसार 2010-11 में देश में खाद्यान्न का उत्पादन 235.88 मि.टन तक होने का अनुमान है .

फसल उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए उर्वरक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पवार ने कहा कि हरित क्रांति के बाद के दौर में कृषि उत्पादन में जो वृद्धि हुई है उसमें आधा योगदान अकेले उर्वरकों के उपयोग का है.

मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि रासायनिक उर्वरकों की कमी को पूरा करने के लिए जैविक उर्वरकों के स्रोतों  को बढ़ाने की जरूरत है.

भारत में 85 प्रतिशत यूरिया की आवश्यकता की पूर्ति घरेलू उत्पादन से हो जाती है, लेकिन फॉस्फोरस और पोटेशियम की जरूरतों को पूरा करने के लिए मोटे तौर पर आयात पर निर्भर रहना पड़्ता है.

देश का सबसे बड़ा उर्वरक उत्पादक  इफको है, जो एक बहु राज्य सहकारी समिति है जिसके तहत लगभग 40 हजार समितियां काम करतीं हैं.  पवार के सुझाव पर टिप्पणी के लिए इफको के प्रबंध निदेशक श्री उदय शंकर अवस्थी से संपर्क करने का प्रयास विफल रहा क्योंकि वह शहर से में नहीं थे.

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मंत्री से चीनी सहकारिता निराश

Posted on 16 March 2011 by dipakkumar

पिछले शुक्रवार को खाद्य मंत्री के.वी. थामस ने कहा कि सरकार चीनी निर्यात पर अनुमति के संबंध में कोई भी “जल्दबाजी में निर्णय” नहीं लेगी क्योंकि अपनी पहली प्राथमिकता उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है.

मंत्री ने कहा कि हालांकि घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में कमी से आ रही है, सरकार को अभी भी निर्यात के मामले में काफी सतर्क रहने की जरूरत है.

चीनी उद्योग के पास इस वर्ष निर्यात के लिए तीस लाख टन का अधिक स्टाक होने का अनुमान है क्योंकि  चीनी का उत्पादन अच्छा है.

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एनसीडीसी: सहकारिता उत्कृष्टता पुरस्कार

Posted on 06 February 2011 by vimalkumar

दो साल में एक बार होने वाले समारोह में नई दिल्ली में 27 प्राथमिक सहकारी समितियों को  उनके अनुकरणीय कार्य के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार 2010 से सम्मानित किया गया.  ये पुरस्कार कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री अरुण सुभाषचंद्र यादव ने प्रदान किए.

इस अवसर पर बोलते हुए श्री यादव ने कहा कि केंद्र बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम में संशोधन करने और एक संविधान संशोधन विधेयक लाने पर विचार कर रहा रहा है.  इन विधेयकों द्वारा प्रणाली की कार्यात्मक और संरचनात्मक समस्याओं को दूर करने की कोशिश की जाएगी. उन्होंने कहा कि वे कोशिश करेंगे कि प्रत्येक राज्य से पुरस्कार के लिए सहकारी समितियों की संख्या में वृद्धि की जाय.

विभिन्न प्रकार और स्तर की 6 लाख सहकारी समितियां गांवों से शहरों तक फैली हुई हैं. इनकी सदस्य संख्या 25 करोड़ से अधिक है. ये समितियां आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ाने और आजीविका के लिए कृषि पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं. कृषि के अलावा अन्य साधनों और अवसरों को बढ़ावा देने तथा मूलभूत सुविधावों का प्रबंध करने में भी इनका उल्लेखनीय योगदान है, मंत्री महोदय ने कहा.

पुरस्कार शरद पवार देने वाले थे, लेकिन अन्य मामलों में व्यस्त होने के कारण वे समारोह में नही आ सके. यह पुरस्कार “राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम” (एनसीडीसी) द्वारा प्रत्येक राज्य से प्राथमिक स्तर की समितियों को द्विवार्षिक आधार पर दिया जाता है.  इस पुरस्कार का उद्देश्य उन समितियों को प्रोत्साहित करना और समुचित पहचान देना है, जो कृषि-समाज के विकास तथा समृद्धि के लिए काम करते हुए अपना अस्तित्व भी बनाए हुए हैं.

समितियों की गतिविधियां - हथकरघा, विपणन, उपभोक्ता वस्तुओं, मत्स्य पालन, ऋण और सेवाएं, बृहद् बहु-उद्देश्यीय सहकारी समितियां, बागवानी, कोल्ड स्टोरेज और डेयरी आदि से संबंधित हैं.  उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इस तरह के पुरस्कारों से सहकारी समितियों में आने वाले दिनों में एक नई आश का संचार होगा तथा बेहतर प्रदर्शन करने के लिए नए सिरे से जीवनी-शक्ति प्राप्त होगी.

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एनसीसीएफ ने अपने को साबित कर दिया: वीरेन्द्र सिंह

Posted on 03 February 2011 by ajayjha

मदर डेयरी की तीन सौ दुकानें, केन्द्रीय भंडार की 20 दुकानें, एनसीसीएफ स्वामित्व वाली 15  दुकानें और कई मोबाइल वैन -

एनसीसीएफ के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह ने इस तरह से एक आसान तरीके से दिल्ली के नागरिकों के आँसू, जो प्याज की वजह से बह रहे थे, को पोंछ दिया है.

भारतीयसहकारिता.कॉम से बात करते हुए श्री सिंह ने कहा कि मंत्री ने 23 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचने के लिए निर्देश दिया है, लेकिन वे शुक्रवार के बाद इसे और कम कीमत पर बेच सकते हैं.

पिछले महीने से तनावपूर्ण स्थिति में काम करते हुए एनसीसीएफ ने साबित कर दिया है कि यह जरूरत के क्षणों में नफेड से बेहतर सेवाएं दे सकता है और  उस पर सरकार भरोसा कर सकती है.

नासिक मंडी से प्याज की पैकेजिंग, दिल्ली लाना, अपने केन्द्रों द्वारा खुदरा में बिक्री करना – यह सारा काम सहकारी उपभोक्ता समिति के लिए बहुत आसान नहीं था.

एनसीसीएफ प्याज के आयात से मना कर दिया लेकिन नफेड ने भंडारण सुविधाओं की कमी के बहाने आयात किया. अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि विदेशी प्याज कम गुणवत्ता की थी जिससे एनसीसीएफ हतोत्साहित हो गया.

जब देश में प्याज संकट गहरा गया, सरकार ने बाजार के हस्तक्षेप की योजना बनाई.  सरकार ने संकट प्रबंधन के लिए नाफेड और एनसीसीएफ  जैसी  सहकारी  संस्थाओं को चुना.

भारतीय सहकारी समितियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मुसीबत की घड़ी में राष्ट्र सहकारी समितियों पर भरोसा कर सकता है.

ऐतिहासिक दृष्टि से भी, प्याज एक राजनीतिक मजाक बन गया जिसपर एक बार अटल बिहारी बाजपेयी ने प्रतिक्रिय व्यक्त की थी - ”भारतीय लोकतंत्र प्याज की दर से बिक गया”.  शुक्र है, सहकारी संस्थाओं ने तूफान को वीरतापूर्वक झेल लिया.

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