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Tag Archive | "सहयोगी"

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आईआरडीए ने इफको-टोकियो पर जुर्मान लगाया

Posted on 15 June 2011 by ajayjha

बीमा नियामक इरडा ने नियमों के उल्लंघन के लिए इफको-Tokio सहित छः सामान्य बीमा कंपनियों में से प्रत्येक पर 5 लाख रुपए  का जुर्माना लगाया.

 

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पंजाब के डेयरी किसानों ने दूध सड़कों पर फेंका

Posted on 24 April 2011 by ajayjha

शनिवार को पंजाब के डेयरी किसानों ने मोहाली में प्रसंस्करण संयंत्र के पास दूध सड़कों पर फेंक दिया. वे सरकार के उनकी मांग के प्रति”उदासीन” रवैये पर अपना विरोध दिखा रहे थे.  वे दूध का खरीद-मूल्य  बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

“पंजाब सरकार के स्वामित्व वाले पंजाब राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक फेडरेशन लिमिटेड (Milkfed) ने पिछले एक वर्ष से किसानों से दूध की ​​खरीद की कीमतें नहीं बढ़ाई है, जबकि यह राजस्थान के एक गैर सरकारी संगठन को दूध की ​​खरीद के लिए अधिक कीमत दे रही है,” प्रगतिशील डेयरी किसान संघ के अध्यक्ष दलजीत सिंह ने आज कहा.

पंजाब के डेयरी मालिकों को Milkfed से प्रति किलो वसा के लिए 360 रुपये मिलते हैं जबकि राजस्थान के गैर सरकारी संगठन को मिल्कफेड प्रति दिन 50,000 लीटर दूध की आपूर्ति के लिए 400 रुपये प्रति किलो की पेशकश कर रहा है, सिंह ने आरोप लगाया.

उत्तेजित डेयरी मालिकों ने कहा कि वे राज्य सरकार पर दर बढ़ाने हेतु दबाव डालने के लिए मोगा, संगरूर, अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और जगरांव सहित राज्य के विभिन्न भागों में विरोध मार्च शुरू करेंगे.

डेयरी किसानों के अनुसार, Milkfed वर्ष 2007 से 2010 तक दूध के खरीद-मूल्य में 20 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि करता रहा है.

उल्लेखनीय है कि Milkfed पिछले एक वर्ष के दौरान प्रति लीटर एक रुपये की दर से तीन बार दूध का ​​खुदरा मूल्य बढ़ा चुका है. Milkfed पूरे राज्य में बड़े और छोटे डेयरी किसानों से प्रसंस्करण के लिए प्रति दिन 9.5 लाख लीटर दूध खरीदता है.

 

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हरियाणा की चीनी मिलें विकास के मार्ग पर

Posted on 10 April 2011 by ajayjha

हरियाणा में सभी 10 सहकारी चीनी मिलों में कुल 18.66 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है.  इन मिलों में आज तक 225.53 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई है.

चंडीगढ़ में इस बात का खुलासा करते हुए सहकारी चीनी मिलों के हरियाणा राज्य संघ के एक प्रवक्ता ने कहा कि चालू पेराई सीजन के दौरान आज की तारीख तक गन्ने से चीनी की प्रप्ति 8.42 फीसदी तक रही है.

राज्य में वर्तमान पेराई मौसम के दौरान चीनी मिलों की समस्त क्षमता का उपयोग  92.19 प्रतिशत तक रहा जबकि पिछले पेराई सीजन के दौरान यह 71.86 प्रतिशत था, उन्होंने कहा.

उन्होंने कहा कि पेराई 2009-10 सत्र के दौरान सहकारिता राज्य की चीनी मिलों को गन्ने की 87.04लाख क्विंटल कुचल दिया था और 7.28 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया.

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इफको के पारादीप इकाई में रिकार्ड उत्पादन

Posted on 04 April 2011 by ajayjha

उड़ीसा के पारादीप में इफको के संयंत्र में 2010-11 के दौरान उर्वरक का 16.62 लाख टन का रिकार्ड उत्पादन हुआ है जबकि लक्ष्य 16.30 लाख टन का था. इसका पिछले साल का उत्पादन 15 लाख टन था.

संयंत्र के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक श्री पटेल के अनुसार, इसी तरह, संयंत्र में इस वर्ष के दौरान फॉस्फोरिक एसिड (P2O5) का 6.56 लाख टन का उत्पादन हुआ है.  2009-10 में यह उत्पादन 4.62 लाख मीट्रिक टन का था.

वर्ष 2010-11 में सल्फ्यूरिक एसिड का उत्पादन 19 लाख मीट्रिक टन हुआ जो अब तक का पारादीप संयंत्र का सर्वोच्च रिकार्ड है.  2009-10 में यह उत्पादन 14.28 लाख मीट्रिक टन का था, उन्होंने यूनिट के एक बयान में वार्षिक प्रदर्शन का खुलासा करते हुए कहा.

2010-11 में डीएपी का रिकॉर्ड उत्पादन 9.1 6 लाख मीट्रिक टन का हुआ. वर्ष 2007-08 में 5.93 लाख मीट्रिक टन का वार्षिक उत्पादन हुआ था.

संयंत्र से बिजली का निर्यात वर्ष के दौरान 39,024 MWh हुआ, 2009-10 में यह 24,183 MWh था, कंपनी के सूत्रों ने बताया.

ईफको का प्रत्येक उत्पादन वर्ष-प्रति-वर्ष बढ़्ता जा रहा है. वह तरक्की की नई राह पर है.

 

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सहकारिता माफिया पकड़े जाएंगे: मोदी

Posted on 24 March 2011 by vimalkumar

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेतावनी दी है कि अगर सहकारिता माफिया अपने तरीके नहीं बदलते तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा.  वह मुंबई स्थित कपोल सहकारी बैंक की सूरत शाखा के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे.

उन्होंने कहा कि आम तौर पर बैंक के प्रमोटर ही धोखाधड़ी में लिप्त होते हैं.  इसमें आम नागरिक की गलती नहीं है.  ये प्रमोटर लोगों को धोखा देते हैं. मोदी ने आगे कहा कि राज्य सरकार ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए सतर्क है लेकिन उनमें से कुछ हमारी पकड़ से अब भी बाहर हैं.

उन्होंने कुछ उन निर्देशकों की प्रशंसा की जो नकदी संकट से बैंक को उबारने के लिए खुद के पैसे लगाते हैं. उनका मन उन कर्मचारियों की प्रशंसा से भरा था जो  संकट ग्रस्त शहरी सहकारी बैंक को बचाने के लिए आधा वेतन पर काम करते हैं.

श्री मोदी ने कहा कि सहकारिता की अवधारणा 150 साल पुरानी है. इसने आम आदमी की मदद की है और समय की कसौटी पर खरी उतरी है. कुछ बेईमान तत्व प्रणाली को नहीं समाप्त कर सकते.

पाठकों को पता होगा कि सहकारी बैंकिंग उद्योग में 16,000 करोड़ रुपये की जमा-पूंजी है और गुजरात राज्य में अग्रिम में 11,000 करोड़ रुपए हैं.

राज्य में लगभग 389 सहकारी बैंक हैं जिनकी 1,000 से अधिक शाखाएं कार्य कर रही हैं.

श्री मोदी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा सभी सहकारी बैंकों को निदेश जारी कर दिया गया है कि वे अपने लाभ का 15 प्रतिशत आरक्षित निधि के रूप में रखें जिससे किसी आकस्मिक स्थिति का सामना किया जा सके.

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पुणे की छवि स्वच्छ करने का सहकारिता का प्रयास

Posted on 20 March 2011 by dipakkumar

कूड़े-कर्कट को निपटाने की प्रथा पश्चिमी देशों में काफी पुरानी है. प्रत्येक आवासीय बस्तियों के बाहर कूड़ा रखने की जगह होती है जहां घर के बेकार सामान को रख दिया जाता है.

रिपोर्ट है कि स्वाच सहकारी समिति ने पुणे शहर को स्वच्छ बनाने का एक अभियान चला रखा है जिसके तहत शहर में चार जगहों पर कूड़ेदान बनाए गए हैं.

यह भी पता चला है कि सहकारी समिति का लक्ष्य ऐसे कई और शेड बनवाने का है जहां लोग अपने घर के बेकार सामान को फेंक सकते हैं.

स्वाच अब मदद के लिए कॉर्पोरेट क्षेत्र तक पहुंचने की योजना बना रहा है.

आदर्श स्थिति तो यह होती कि राज्य ही इस तरह की व्यवस्था करता जिससे कि शहर स्वच्छ बना रहता और कूड़ा चुनने वालों को भी कुछ सुविधा मिलती.

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न्यूजीलैंड के भूकंप पीड़्तों को सहकारी समितियों की मदद

Posted on 28 February 2011 by ajayjha

पिछले दिनों न्यूजीलैंड में आए शक्तिशाली भूकंप के पीड़ितों की सहायता के लिये देश की सहकारी समितियों के कार्यकर्ता एकजुट हो गए हैं.

22 फ़रवरी को आए 6.3 परिमाण के भूकंप से देश के दक्षिणी द्वीप पर स्थित क्राइस्टचर्च शहर पर भारी असर पड़ा.

Fonterra नामक डेयरी सहकारी समिती ने रेड क्रॉस की अपील पर 1 करोड़ डॉलर का दान दिया है और उन्होंने इसके लिए एक राहत कोष भी शुरू किया है. सहकारी समिते ने अपने साइट से एक लाख लीटर पानी और अन्य चीजें राहत केंद्रों को भेजा.

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एनसीसीएफ ने अपने को साबित कर दिया: वीरेन्द्र सिंह

Posted on 03 February 2011 by ajayjha

मदर डेयरी की तीन सौ दुकानें, केन्द्रीय भंडार की 20 दुकानें, एनसीसीएफ स्वामित्व वाली 15  दुकानें और कई मोबाइल वैन -

एनसीसीएफ के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह ने इस तरह से एक आसान तरीके से दिल्ली के नागरिकों के आँसू, जो प्याज की वजह से बह रहे थे, को पोंछ दिया है.

भारतीयसहकारिता.कॉम से बात करते हुए श्री सिंह ने कहा कि मंत्री ने 23 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचने के लिए निर्देश दिया है, लेकिन वे शुक्रवार के बाद इसे और कम कीमत पर बेच सकते हैं.

पिछले महीने से तनावपूर्ण स्थिति में काम करते हुए एनसीसीएफ ने साबित कर दिया है कि यह जरूरत के क्षणों में नफेड से बेहतर सेवाएं दे सकता है और  उस पर सरकार भरोसा कर सकती है.

नासिक मंडी से प्याज की पैकेजिंग, दिल्ली लाना, अपने केन्द्रों द्वारा खुदरा में बिक्री करना – यह सारा काम सहकारी उपभोक्ता समिति के लिए बहुत आसान नहीं था.

एनसीसीएफ प्याज के आयात से मना कर दिया लेकिन नफेड ने भंडारण सुविधाओं की कमी के बहाने आयात किया. अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि विदेशी प्याज कम गुणवत्ता की थी जिससे एनसीसीएफ हतोत्साहित हो गया.

जब देश में प्याज संकट गहरा गया, सरकार ने बाजार के हस्तक्षेप की योजना बनाई.  सरकार ने संकट प्रबंधन के लिए नाफेड और एनसीसीएफ  जैसी  सहकारी  संस्थाओं को चुना.

भारतीय सहकारी समितियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मुसीबत की घड़ी में राष्ट्र सहकारी समितियों पर भरोसा कर सकता है.

ऐतिहासिक दृष्टि से भी, प्याज एक राजनीतिक मजाक बन गया जिसपर एक बार अटल बिहारी बाजपेयी ने प्रतिक्रिय व्यक्त की थी - ”भारतीय लोकतंत्र प्याज की दर से बिक गया”.  शुक्र है, सहकारी संस्थाओं ने तूफान को वीरतापूर्वक झेल लिया.

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हरियाणा राज्य सहकारी समिति फायदे में

Posted on 02 February 2011 by ajayjha

एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन संघ लिमिटेड (हैफेड) का कुल सालाना कारोबार 3,092 करोड़ रुपए का है जिसपर इसने वर्ष 2009-10 में 33.78 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है.

वित्त आयुक्त एवं प्रमुख सचिव, सहकारिता, माणिक सोनवने ने पंचकुला में हैफेड के शासीमंडल से मुलाकात की.  उसके बाद जारी किए गए एक बयान में कहा गया कि हैफेड ने 2010-11 के दौरान 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने का लक्ष्य रखा है.

सहकारी विपणन समितियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए श्री सोनवने ने कहा कि हैफेड ने जब 30 जून 1967 को अपना कारोबार शुरू किया, उस समय इसकी हिस्सा पूंजी 23 लाख रुपये थी जो 31 मार्च 2009 को 10.60 करोड़ रुपये तक बढ़ गई है.

उन्होंने कहा कि हैफेड ने 2008-09 में 34.28 करोड़ और 2009-10 में 38.92 करोड़ रुपये मुल्य की उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री की जो अब तक की सर्वाधिक थी.  हैफेड ने अहमदाबाद सामुदायिक एक्सचेंज और समुदाय एक्सचेंज लिमिटेड के साथ 15 प्रतिशत की भागीदारी का समझौता किया है.

माणिक सोनवरे ने कहा कि हैफेड ने विपणन और व्यापार गतिविधियों को बढ़ाया है. इसमें रादौर में हल्दी प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना, भंडारण क्षमता में वृद्धि और अनुबंध एवं जैव खेती को बढ़ावा देना भी शामिल है, उन्होंने कहा.

उन्होंने कहा कि हैफेड ने 2007 में कुरुक्षेत्र, करनाल और कैथल जिले में 750 एकड़ भूमि पर जैव खेती करनी शुरू की. इस योजना को अब मेवात,  झज्जर और सिरसा जिले तक बढ़ा दिया गया है.

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जाखड़ का निधन: इफको की भविष्य के लिए तैयारी

Posted on 19 January 2011 by ajayjha

इफको के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जाखड़ के आकस्मिक निधन से सहकारिता जगत स्तब्ध है.  परिवार के सूत्रों के अनुसार वह बंदूक साफ कर रहे थे जो अचानक चल गई जिससे  मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई.

इफको ने अपने गुड़गांव के कार्यालय का नाम बदल कर ”सुरेन्द्र जाखड़ टॉवर” रखने की घोषणा की है. भावुक प्रबंध निदेशक श्री यू.एस अवस्थी ने भी पारादीप इकाई का नाम “सुरेन्द्र जाखड़ नगर” के रूप में परिवर्तित करने की घोषणा की है.

इफको के बोर्ड की शोक सभा 20 जनवरी बुलाई गई है. बैठक में भावी कार्रवाई की दिशा के बारे में भी फैसला हो सकता है. इफको के उप-नियमों के अनुसार अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठक की अध्यक्षता उपाध्यक्ष करेंगे.

लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि क्या श्री जाखद़ के आकस्मिक निधन के बाद अध्यक्ष का पद उपाध्यक्ष संभालेंगे. इस बात पर अंतिम निर्णय बोर्ड ही लेगा. उपाध्यक्ष श्री एन.सी. पटेल इस घटना के बाद चर्चा में आ गए हैं. श्री पटेल को एक समर्पित गांधीवादी माना जाता है जो तड़क-भड़क से दूर रहते हैं.

प्रबंध निदेशक श्री अवस्थी के नेतृत्व में इफको टीम मंगलवार की सुबह पंजाब के रवाना हो गई, जहां दिवंगत आत्मा के अंतिम संस्कार किए जाएंगे. मृतक के पिता श्री बलराम जाखड़ भी दिल्ली से जा रहे हैं.

तीन भाइयों में माझिल श्री सुरेंद्र जाखड़ पूरी तरह से खेती और किसानों को समर्पित थे. अपने दोनों भाई, जो राजनीति में हैं, के विपरीत, श्री जाखड़ ने पूरी दुनिया को एक सहकारिता में जोड़ने का सपना देखा था.

वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पिछले 10 वर्षों तक अथक यात्रा करते रहे.  उनके निधन से केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है. वैश्विक सहकारिता गांव बनाने की कल्पना को साकार करने की इच्छा वाले अन्य सपूत के पैदा होने में वर्षों लगेंगे.

भारतीयसहकारिता.कॉम उनके आकस्मिक निधन पर अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता है और उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है.

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