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IndianCooperative.com के पाठकों का आंकड़ा पांच लाख के पार

Posted on 06 July 2011 by ajayjha

Indiancooperative.com को मिली अभूतपूर्व प्रतिक्रिया इस न्यूज पोर्टल के संपादकीय और तकनीकी टीम के लिए बहुत संतोषजनक है. गूगल के आंकड़ों के मुताबिक जून के महीने में पोर्टल द्वारा संचित हिट्स की संख्या 5,96,000(पांच लाख छानबे हजार) है.

Indiancooperative.com की शुरुआत जनवरी 2010 में अनिश्चितता की भावना के साथ हुई थी.  लोगों ने कहा कि सहकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें कंप्यूटर की समझ रखने वाले कम होते हैं और इस तरह का प्रयास पर साधारण प्रतिक्रिया मिल सकती है. लेकिन पिछले डेढ़ साल के अनुभव ने उन्हें गलत साबित किया है. शुरुआत के कुछ महीनों में ही हमें 30000 तक की हिट मिलने लगी जो महीने-दर-महीने बढ़ती गई.

इस वर्ष जनवरी के बाद से हिट 5 लाख के आसपास रह रही थी जो जून के महीने करीब छह लाख (5.96 laks) तक पहुंच गई है.

हमारी संपादकीय टीम इस तरह की अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे के कारकों का पता लगाने की कोशिश कर रही है.  हमारी एक संपादकीय नीति है पूर्ण तटस्थता की स्थिति बनाए रखना है. अगर हमने कभी किसी भी सहकारी समिति के संबंध में कोई नकारात्मक कहानी लिखी है, तो उसी समिति के कुछ अच्छा करने पर हमने उसकी प्रसंशा भी की है.

हमारे देश में सहकारिता एक अत्यंत संकुचित क्षेत्र है जिसमें कर्ता-धर्ता एक समूह में एक साथ रहते है.  Indiancooperative.com का कार्य काफी मुश्किल था. किसी भी समूह के संबंध में नकारात्मक कहानी को प्रतिद्वंद्वी समूह से प्रेरित होने का माना जा सकता है. यह साबित करने में कि हम किसी समूह से वास्ता नहीं रखते, हमें एक वर्ष से अधिक का समय लग गया.  हमारी तटस्थ कहानियाँ और लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रिया इस तथ्य के प्रमाण हैं.

हम एक बार फिर विश्वास दिलाते हैं कि हमें किसी के भी प्रति कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है. हमारी कहानियों का आधार हमें प्राप्त केवल विश्वनीय सूचना होती है. यदि हमारी अब तक की कहानियों पर नजर डाली जाय तो यह साबित होता है कि हमने नब्बे प्रतिशत से अधिक सकारात्मक टिप्पणियां की हैं जिससे कि सहकारिता को राष्ट्र की मुख्यधारा में मान्यता प्राप्त हो सके.

लेकिन नकारात्मक कहानियाँ लोगों के दिमाग में चिपक जाती हैं और वे उनके संबंध में लिखी सकारात्मक कहानियों को भूल जाते हैं.

indiancooperative.com किसी औद्योगिक घराने से ताल्लूक नहीं रखती है. यह पत्रकारों के एक समूह द्वारा संचालित है जो भारत में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करना चाहते हैं. अतः वास्तव में हमें प्रायोजकों की समस्या थी क्योंकि सभी जानते हैं कि किसी भी शो को चलाने के लिए पैसे की जरूरत होती है. हम पत्रकारों ने अपने सीमित संसाधनों को जमा किया और काम को आगे बढ़ाया. बाद में शायद हमारे ईमानदार प्रयास को देखकर, इफको और अमूल ने हमें बिना किसी शर्त के कुछ विज्ञापन दिये. हम वास्तव में उनके आभारी है.

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