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दिल्ली में आईसीए अध्यक्ष पॉलीन

Posted on 24 April 2013 by ajayjha

अंतर्राष्ट्रीय सहकारी एलायंस आईसीए के प्रभावशाली अध्यक्षा डेम पॉलीन ग्रीन सोमवार से भारत की यात्रा पर है। वह रविवार देर शाम नई दिल्ली में आई।

श्रीमती पॉलीन यूरोपीय संसद की पूर्व श्रम एवं सहकारी सदस्या है जो कि देश के सहकारी नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करेंगी।

सोमवार को वह दोपहर में इफको के मुख्यालय का दौरा करेंगी जहाँ वह प्रबंध निदेशक यूएस अवस्थी के साथ शिष्टाचार भेंट करेंगी।

इफको के सूत्रों के अनुसार रात का खाना सोमवार शाम को ताज मानसिंह में उनके सम्मान में आयोजित किया गया है जहाँ 22 नंबर चयनित कॉपरेटर्स को वैश्विक सहकारी नेताओं के साथ बातचीत करने का मौका दिया जाएगा।

अगले दिन वह मंगलवार को इफको की खाद संयंत्रों में से एक अहमदाबाद के पास कलोल की यात्रा करने के लिए निर्धारित है।

पॉलीन की 24 अप्रैल को एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह और अन्य लोगों से मिलने की योजना है।

दिल्ली में स्थित आईसीए क्षेत्रीय कार्यालय में वह स्थानीय अधिकारियों के साथ दामुस फंड के विषय में बातचीत करना चाहती हैं। आईसीए का इस कोष से निर्मित क्षेत्रीय कार्यालय नोएडा में होगा।

1948 में जन्मी डेम पॉलीन ग्रीन ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से अध्ययन किया है और बाद में वह यूरोपीय समाजवादियों की पार्टी के संसदीय समूह की नेता चुनी गई।

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जीसीएमएमएफ (अमूल) ने कई महत्वाकांक्षी योजना बनाई

Posted on 16 April 2013 by ajayjha

गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आर.एस. सोढ़ी ने अपनी कंपनी द्वारा गुजरात और गुजरात के बाहर विस्तार कार्यक्रम के लिए नई योजना बनाने की बात कही है।

जीसीएमएमएफ जल्द ही गुजरात में प्रति दिन 148 लाख लीटर से 160 लाख लीटर दूध उत्पादन करने की ओर अग्रसर है। इस लक्ष्य को पूरे राज्य में अनेक क्षेत्रों में नए डेयरी फार्मों की स्थापना के माध्यम से पूरा किया जाएगा, श्री सोढ़ी ने कहा।

गुजरात में सहकारी दृश्य से परिचित एक सूत्र ने बताया कि गुजरात के सहकारी टाइटन अगले कुछ साल में अपनी क्षमता का विस्तार करने के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपए निवेश करने पर ढृढ़ है।

डेयरी कंपनी ने हाल ही में मदर डेयरी में सैकड़ों करोड़ों रुपए का निवेश किया है और सफलतापूर्वक दिल्ली, कानपुर, मुंबई, लखनऊ और कोलकाता में दूध का विपणन किया है।

श्री सोढ़ी के मुताबिक राज्य में बड़े पैमाने पर सूखे के बावजूद गुजरात में दूध की मांग में लगातार वृद्धि हुई है। डेयरी सहकारी महासंघ बढ़ रही मांग को पूरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा, श्री सोढ़ी ने दावा किया।

श्री सोढ़ी भारत सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यूरोपीय संघ भारत से अनुचित रियायतें निकालने पर लगा हुआ है। श्री सोढ़ी ने कहा कि यूरोपीय संघ बिना किसी प्रतिबंध के भारतीय बाजार पर अपने सभी उत्पादों को बेचने में लगा है, जबकि भारत को अपने बाजार के लिए किसी भी उपयोग की अनुमति नही देती है।

श्री सोढ़ी ने यूरोपीय संघ के प्रतिबंधात्मक व्यापार के रवैया को भारतीय किसानों की प्राथमिक हितों के लिए हानिकारक बताया है। एमडी ने इससे पहले सरकार को एक पत्र भेजा है जब भारत एफटीए के संदर्भ में यूरोपीय संघ के साथ बातचीत कर रहा है।

श्री सोढ़ी ने हाल ही में अहमदाबाद में एक सम्मेलन के मौके पर पत्रकारों के साथ बातचीत कर रहे थे।

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इफको और ला-कॉप-फेड्री ने साथ मिलकर उत्सव मनाय़ा

Posted on 06 February 2013 by ajayjha

भारत और कनाडा की दो सबसे बड़े सहकारी समितियों भारत की इफको और क्यूबेक सिटी के ला-कॉप-फेड्री ने गुरुवार को साथ मिलकर उत्सव मनाय़ा। क्यूबेक की टीम ने इफको कार्यालय का एक दिन का दौरा किया जिसे उन्होंने “अपने साथी को जानना (नोविंग अवर पार्टनर)” कहा।

इस कार्यक्रम में शाम के डीनर के अलावा भारत और कनाडा के सहकारी नेताओं और मंत्रियों की उपस्थित महत्वपूर्ण थी।

पाठकों को याद होगा कि इफको सहकारी ने क्यूबेक के साथ यूरिया के उत्पादन के लिए साझेदारी की है। इस साझेदारी में 1.2 अरब डॉलर के उद्यम को स्थापित करने से दोनों देशों को फायदा होगा। ऐसा अटूट विश्वास है कि यूरिया उत्पादन में इफको की क्षमता और बेहतर मजबूत वितरण नेटवर्क के साथ उद्यम स्थापित करने के साथ यह सहकारी विलय सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक होने जा रही है, भारतीय सहकारिता को प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने सूचित किया।

परमिट और वित्त का इंतजाम किया जा रहा हैं परिणामस्वरुप परियोजना पटरी पर है। उत्पादन 2017 से शुरू करने की उम्मीद है, इफको के जीएन सक्सेना ने कहा। क्यूबेक प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सहकारिता को सूचित करते हुए कहा कि वह काफी उत्साहित है और अब वे उत्पादन प्रारंभ होने के बाद समुद्र के माध्यम से यूरिया का आयात करने की परेशानी से मुक्त होंगे।

भारतीय मंत्री श्रीकांत जेना और तारिक अनवर ने कॉर्पोरेट की तर्ज पर एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने और देश में सहकारिता की मौजूदा छवि को पुनर्परिभाषित करने पर इफको की तारिफ की।

क्यूबेक मंत्री जीन फ्रेंकोइस लीज़ी और ऐलेन जेकब ने कहा कि हम भारत के साथ नए संबंध का उत्सव मना रहे हैं। श्री लीज़ी ने पुराने समय को याद किया और अतीत में ब्रिटिश शासन के अंदर रहने के मामले में दोनों देशों के बीच समानता की चर्चा की।

इफको के प्रबंध निदेशक यू एस अवस्थी ने कर्ताध्वनि के बीच अपने अंदाज में कहा कि यह समारोह भारत और कनाडा के किसानों के एक साथ आने के अवसर पर है।

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एशिया-पेसिफिक आईसीए: चन्द्रपाल उपाध्यक्ष निर्वाचित

Posted on 30 November 2012 by ajayjha

कोबे, जापान में 29 नवंबर 2012 को एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए आयोजित हुए चुनाव में एनसीयुआई के अध्यक्ष डॉ. चन्द्र पाल सिंह यादव आईसीए के उपाध्यक्ष के रूप में ज़बरदस्त बहुमत के साथ चुने गए है।

आपूर्ति और विपणन सहकारी चीन फेडरेशन के श्री ली चुनशेंग को भी आईसीए एशिया प्रशांत क्षेत्र के अध्यक्ष के रूप में फिर से चुना गया है।

एनसीयुआई के कार्यालय से जारी की गई एक प्रेस विज्ञप्ति से भारतीय सहकारिता ने शीर्ष पद के लिए डॉ. चन्द्र पाल के सफल चुनाव की पुष्टि की।

भारत से सहकारी नेताओं का एक समूह आईसीए एशिया प्रशांत बोर्ड की बैठक में जापान के कोबे में भाग ले रहे हैं।

एनसीयुआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह यादव एशिया-प्रशांत आईसीए के बोर्ड में निदेशक पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे।

चन्द्रपाल के अलावा एनसीयुआई के मुख्य कार्यकारी डॉ. दिनेश ने भी सम्मेलन में भाग लिया।

इफको से डॉ. जीएन सक्सेना और निदेशक के. एसएम देवेगौड़ा ने भी सम्मेलन में भाग लिया। इससे पहले डॉ. सक्सेना को आईसीए एशिया प्रशांत अनुसंधान समिति के अध्यक्ष के रूप में चार साल की अवधि के लिए निर्विरोध चुना गया। के.एसएम. देवेगौड़ा को, आईसीए एशिया प्रशांत  कृषि समिति का सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

बिस्कोमॉन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुनील सिंह भी कोबे  गए हुए है। शायद चुनाव परिणाम के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा है।

कोबे से भारतीय सहकारिता से बात करते हुए डॉ. सक्सेना ने कहा कि हम एनसीयुआई के अध्यक्ष के समर्थन की पेशकश कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने हमसे हमारे समर्थन के बारे में पूछा और हमने उन्हें समर्थन देने का वादा किया है।

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इफको: अंतर्राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन सम्पन्न

Posted on 06 July 2012 by Manoj

अंतर्राष्ट्रीय कॉपरेटिव कांफ्रेस का समापन समारोह आज दिल्ली के एनसीयुआई ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। एनसीयुआई के सीईओ डॉ. दिनेश के संबोधन से सम्मेलन के कार्यक्रम की शुरुआत हुई. मंच पर गणमान्य वक्ता और हॉल में सुधि श्रोता मौजूद थे. दरअसल बहस के लिए एक उपयुक्त वातावरण मौजूद था.

कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता नेफेड के चेयरमैन डॉ. बिजेन्दर सिंह ने की। इंडियन कॉपरेटिव नेटवर्क फॉर वुमैन, चेन्नई की अध्यक्षा डॉ. जया अरुणांचलम ने आरम्भ में सहकारिता में नारी सशक्तिकरण पर एक विशिष्ट परिचर्चा शुरु की। डॉ. अरुणांचलम ने विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अन्य बातों के अलावा सहकारी संस्थाओं से अपील की कि वे ऐसे तरीके और साधन सुझाएं जिससे कि भारतीय महिलाएं देश की वर्तमान योजनाओं के संदर्भ में अपने सामर्थ्य और विचारों को सिद्ध कर सकें।

मलेशिया की श्रीमती जैन्नुद्दीन ने लैंगिक समानता को प्रोत्साहन और बढ़ावा देने में सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मलेशिया की सरकार ने स्वास्थ्य और बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं को ज्यादा तवज्जो देने वाली नीतियां बनाई हैं। इस तरह से वहाँ सहकारिता के मूल सिद्धांतों को लागू किया जा रहा है।

प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रहे डॉ. बिजेन्दर सिंह ने भी महिलाओं की दुर्दशा पर दुख व्यक्त किया और महिला सशक्तिकरण के लिए उचित उपाय करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्रकी अध्यक्षता श्री प्रकाश लोनारे ने की। नेफकब के अध्यक्ष श्री एच.के. पाटिल  ने बैंकों की दुर्दशा पर दुख व्यक्त किया। श्री पाटिल ने देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में सहकारिता को महत्वपूर्ण बताया।

भारत सरकार में पूर्व सचिव श्री जे.एन. श्रीवास्तव ने सहकारी संस्थाओं के विकास के संदर्भ में मानवी संसाधन की विशिष्ट भूमिका पर बल दिया.  श्री श्रीवास्तव ने सहकारी क्षेत्र में उत्तम तकनीकी के प्रयोग को तेजी से बढाने की पुरजोर वकालत की।

श्री प्रवेश शर्मा, प्रबंध निदेशक, एसएफएसी ने किसानों के समग्र विकास के लिए संस्थाओं के निर्माण पर जोर दिया। श्री शर्मा के मुताबिक सत्तर के दशक में हरित क्रांति को साकार करने में सहकारी संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

समारोह के अंतिम सत्र की अध्यक्षता श्री चरणदास महंत ने की। इस सत्र  में श्री आर के तिवारी, संयुक्त सचिव ने भारतीय सहकारिता के विकास के लिए नीतिगत सरकारी कदम उठाने पर जोर दिया। श्री तिवारी ने कहा कि यह आयोजन एक मील का पत्थर है। श्री तिवारी ने भारत की आर्थिक दशा को सुधारने में सहकारिता को महत्वपूर्ण कारण बताया।

श्री सुरेश प्रभु, पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ धन्यवाद का पात्र है। उन्होंने कहा कि आम लोगों के सशक्तिकरण के लिए सहकारिता के मूल्यों और सिद्धांतो का उपयोग जरुरी है। गरीब और गरीब न हो तथा अमीर और अधिक अमीर न हो - यह सहकारिता के माध्यम से ही संभव है।

श्री रॉबी टुलुस, क्षेत्रीय निदेशक, आईसीए, एशिया-प्रशांत, ने सहकारिता की आवश्यकता और वर्तमान में सहकारिता के रोल पर प्रकाश डाला। श्री टुलुस ने बदलती विश्व अर्थव्यवस्था में सहकारिता की भूमिका को भी रेखांकित किया।

सम्मेलन कृषि एवं खाद्य प्रसंसकरण मंत्री श्री चरण दास के समापन संबोधन से सम्पन्न हुआ.

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अमूल की आयु बड़ी लेकिन लड़की की नहीं!

Posted on 18 June 2012 by Manoj

50 साल पहले एक लड़की अमूल मक्खन के पैक पर उत्सुकता से अपनी नजर डाल रही है और यह रेखाचित्र संपूर्ण भारत को संबोधित कर डाला। इस मक्खन की तरफ देखने वाली लड़की की छवि भारतीय दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया।

इस मक्खन लड़की को देश में हर जगह देखा गया जो कि डेयरी के क्षेत्र में भारत की सफलता का प्रतीक बन गई है।

यह छवि अजीब और शानदार कैरियर के रूप में प्रेरणादायक रही है क्योंकि इसके कारण अमूल मक्खन छोटे बच्चों से लेकर बड़े बच्चों की पसंदीदा चीज है।

यह छोटी सी सुंदर पेंटिंग लड़की पोल्सन मक्खन लड़की के प्रकट हुई थी।

इस लड़की के 50 वें जन्मदिन के  जश्न के एक भाग के रूप में एक कॉफी की किताब प्रकाशित की जा रही है।

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एनसीयूआई शासी परिषद के सामने वित्तीय संकट

Posted on 24 May 2012 by ajayjha

आज गुरुवार को भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ की शासी परिषद की बैठक है, एनसीयूआई द्वारा कई मुद्दों को उठाए जाने की संभावना है, जो कि लेखा परीक्षा उपनियमों में संशोधन से संबंधित हैं।

एनसीयूआई ने पहले एक संचालन पत्र परिषद के सदस्यों को कानूनों में परिवर्तन के बारे में सुझाव देने के लिए भेजा था।

पाठकों को याद होगा कि एनसीयूआई अध्यक्ष को अपने चुनाव को लेकर अदालत में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, सरकार नियुक्त पंच ने एनसीयूआई के लिए चुनाव निर्धारित किया है।

शासी परिषद के एक और सदस्य श्री मुदित वर्मा जो कि अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह के एक करीबी सहयोगी है, को भी अदालत का सामना करना पड़ रहा है।

एनसीयूआई मतदाता सूची में स्पष्ट निर्वाचन क्षेत्रों की कमी से लोगों में भ्रम पैदा होता है।

एनसीयूआई के नियम के अनुसार एक नामित सदस्य शीर्ष पद के लिए योग्य नहीं हो सकता। चन्द्रपाल जैसे कई लोग कृभको से नामित सदस्य है। लेकिन उनके वकील वी.पी. सिंह का कहना है कि चन्द्रपाल के खिलाफ मामला कमजोर है।

पंच के अदालत में सत्तारूढ़ अध्यक्ष के चुनाव के विरुद्ध की सुनवाई शुक्रवार को होना निर्धारित है।

इस पृष्ठभूमि में एनसीयूआई के जीसी बैठक में चुनाव परिणामों को अकाट्य बनाने के लिए कानूनों में परिवर्तन करने पर भी विचार हो सकता है।

लेकिन शासी परिषद के लिए अपनी शक्ति में कमी के प्रस्ताव पर मंत्रिस्तरीय हुक्म की अनदेखी करना खासा कठिन साबित हो सकता है।

 

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जम्मू – कश्मीर में सहकारी आंदोलन मजबूत : मंत्री

Posted on 21 March 2012 by ajayjha

जम्मू और कश्मीर में सहकारी गतिविधियाँ तेजी के साथ बढ़ रही है। जम्मू और कश्मीर के सहकारिता मंत्री मनोहर लाल शर्मा ने हाल ही में राज्य विधानसभा में कहा कि राज्य में सहकारी क्षेत्र के लोकतंत्रीकरण के स्पष्ट संकेत हैं, सहकारी समीतियाँ  स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जरिए लोकतंत्र के अपनी प्रतिबद्धता दिखा रही है।

मंत्री के अनुसार, जनतंत्रीकरण के कारण सहकारी क्षेत्र के विकास और दक्षता मे तेजी आएगी।

राज्य में महिला सहकारी समितियों की शुरुआत एक बडी घटना है। हजारों महिलाएँ इन सहकारी समितियों में शामिल होकर सहकारी आंदोलन को एक नया आयाम देने का काम कर रही है।

हाल में  महिला सहकारी समितियों की अनेक शाखाएँ स्थापित हो रही है और उनके लेनदेन की मात्रा काफी है। इस को  एक महान उपलब्धि के रुप मे देखा जा सकता है।

सभी प्रकार के परियोजनाओं और गतिविधियों को सहकारी क्षेत्र में शुरू किया जा रहा है, सुपर बाजार और मुर्गीपालन का काम बडे पैमाने पर हो रहा है।

जानकार लोगों का मानना है कि इस सीमांत राज्य में सहकारी संस्थाओं के विस्तार और विकास की विशाल संभावनाएँ मौजूद हैं।

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चन्द्रपाल की अध्यक्षता खतरे में

Posted on 20 March 2012 by ajayjha

भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष पद के लिए अपने चुनाव के मामले मे सरकार द्वारा नियुक्त पंच की अदालत में चन्द्रपाल सिंह की हार के व्यापक नतीजे हो सकते है।

मामला पंच मांझी की अदालत में लंबित था और 15 मार्च को निर्णय आने की उम्मीद थी, झाँसी विधानसभा चुनाव में अपनी पराजय के बाद परेशान चन्द्र पाल की पंच की अदालत हार ने NCUI को घोर संकट में डाल दिया है।

याचिकाकर्ता राजेंद्र शर्मा ने भारतीय सहकारिता डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि, उन्हें पंच के कार्यालय द्वारा सूचित किया है कि चन्द्र पाल सिंह का चुनाव नियम के उलंघन में हुआ है,  श्री शर्मा हिमाचल प्रदेश में पत्रकार है।

जब भारतीय सहकारिता डॉट कॉम ने श्री चन्द्र पाल सिंह से संपर्क किया तो उन्होनें कहा कि मुझे सूचित नहीं किया गया है और मुझे कुछ पता नहीं है, मेरे पास जब प्रामाणिक नोटिस आएगा तब मैं अपनी प्रतिक्रिया दूंगा।

इस बीच भारतीय सहकारिता डॉट कॉम, को पता चला  है कि NCUI के अधिकारीगण संकट की स्थिति से बाहर के निकलने के उपायों पर आपस में विचार विमर्श कर रहे है।

सूत्रों के अनुसार चन्द्र पाल के  निर्णय को  उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे, नाम न छापने की शर्त पर उनके एक विश्वासपात्र ने बताया कि यह पंच अंतिम अदालत नहीं है और हम इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।

बहु राज्य सहकारी अधिनियम 2002 के विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि मंत्रालय के निर्णय के प्रकाश में अध्यक्ष पद के इस्तीफे की मांग और एक प्रशासक की नियुक्ति तक नए अध्यक्ष के पुनर्निर्वाचन के विचार उठ सकते है।

याचिकाकर्ता चन्द्र पाल सिंह के  योगदानकर्ता सहकारी संगठन से एक नामित सदस्य होने के आधार पर चुनाव को चुनौती दी थी, केवल वे ही लोग NCUI के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकते है, जो नामित नही हैं , ऐसा 2002 अधिनियम कहता हैं।

NCUI के अध्यक्ष  के करीबी सूत्रों का मानना है कि उच्च न्यायालय में चंद्रपाल का केस मजबूत साबित हो सकता है , आवेदक प्रभावित पक्ष नहीं था और उसकी याचिका पर सुने जाने का कोई तुक नही बनता है।

चंद्रपाल सिंह, अखिलेश यादव के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए लखनऊ गए थे, जहाँ उनको पंच के निर्णय के बारे में सूचना दी गई, खबर है कि चन्द्र पाल के समर्थक और वकील  इस संकट से उबरने के उपायों पर लगातार बैठक कर रहे हैं।

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शहरी सहकारी बैंक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय मानदंडों को अपनाएँ- भारतीय रिजर्व बैंक

Posted on 09 March 2012 by ajayjha

रिजर्व बैंक ने आधिकारिक तौर पर शहरी सहकारी बैंकों को सूचित किया है कि वे 2014 से नए अंतर्राष्ट्रीय लेखांकन मानदंडों IFRS को अपनाए।

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि सभी बैंकों और एनबीएफसी के लिए अपने कौशल को सुधार कर, सूचना और प्रौद्योगिकी की संभावनाओं का उपयोग कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की लेखांकन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकते है।

यहां तक कि छोटे शहरी सहकारी बैंकों और वित्तीय कंपनियों से भी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय मानकों को अपनाने की अपेक्षा की जाती है।

कारपोरेट मामलों के मंत्रालय ने भी स्पष्ट संकेत दिया है कि सभी वाणिज्यिक बारे में बैंकों को जल्द से जल्द अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों को अपनाना होगा।

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