Today:

Tag Archive | "maharashtra"

Tags: , , , , , ,

विस्तार मोड पर सारस्वत बैंक

Posted on 03 May 2013 by parasnath

भारत का सबसे बड़ा शहरी सहकारी बैंक, महाराष्ट्र आधारित सारस्वत सहकारी बैंक अपने व्यापार को बढ़ाते हुए वडोदरा में तीन शाखाएं खोलने जा रहा है। शहर में मराठी आबादी की उपस्थिति मुख्य रूप से बैंक के विस्तार कार्यक्रम का कारण है।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सारस्वत बैंक के चेयरमैन एकनाथ ठाकुर ने कहा कि अगर अन्योन्य सहकारी बैंक का सारस्वत बैंक से विलय हो जाने से भारी संख्या में जमा को खत्म होने से रोका जा सकता था।

एसीबी 2010 के अंत में दिवालिया हो गई थी। हालांकि साउथ इंडियन बैंक के साथ सारस्वत के पहले विलय में तत्कालीन बैंक के कई जमाकर्ताओं ने मझधार में ही छोड़ दिया था, उनकी शिकायत थी कि उनकी जमा राशि को वापस नहीं दिया जा रहा है ऐसी शिकायतों का भारतीय सहकारिता की डेस्क पर अंबार लग गया था।

श्री एकनाथ ठाकुर का मोबाइल नंबर बंद होने के कारण उनसे संपर्क करने का प्रयास विफल रहा था।

सारस्वत बैंक का वर्तमान में 36 हजार करोड़ रुपये का कारोबार है और देशभर में 244 शाखाएं हैं जो कि उल्लेखनीय है।

Comments (0)

Tags: , , , , , , , , , ,

97वें सीएए पर महाराष्ट्र में लेजिस्लेटिव अव्यवस्था की भरमार

Posted on 29 April 2013 by ajayjha

गैर सहायता प्राप्त सहकारी समितियों के मामलों में संसद की निर्णायक दिशाओं को देखते हुए महाराष्ट्र ने विधायी अव्यवस्था के विरुद्ध युद्ध स्तर पर हस्तक्षेप किया है।

ऐसा लगता है जल्दबाजी में महाराष्ट्र राज्य आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार द्वारा महाराष्ट्र में सहकारी समितियों के सभी संभागीय और जिला उपपंजीयकों को 22-02-2013 को सलाह जारी की गई है।

ऐसा लगता है कि आयुक्त श्री मधुकर चौधरी (आईएएस) के द्वारा 15-02-2013 को सरकार की तरफ से पत्र के रुप में सलाह जारी की गई है।

रजिस्ट्रार द्वारा 14-02-2013 को जारी महाराष्ट्र सहकारी (संशोधन) अध्यादेश 2013 के तहत एमसीएस अधिनियम 1960 के संशोधित धारा 14 के तहत उपनियम कानून में संशोधन करने के लिए सहकारी समितियों को निर्देशित करने का अधिकार दिया गया है।

यह सलाह धारा 14 के तहत नही है। यह नए उपनियम को अपनाने के लिए संबंधित वार्ड अधिकारियों के माध्यम से सभी सहकारी समितियों पर दबाव बनाने के लिए एक आंतरिक अनुदेश है।

वेबसाइट www.societywiki.com पर रिपोर्ट को के-पश्चिम वार्ड में सभी सहकारी आवास समितियों के उपपंजीयक, सहकारी समितियां, के-पश्चिम वार्ड, मुंबई द्वारा नई उपनियम को अपनाने के लिए 31.5.2013 तक का ही समय दिया गया है।

सहकारी सोसायटी के पंजीयक द्वारा अनुमोदित संशोधित उपनियम को 30.04.2013 पर या इससे पहले मौजूदा उपनियम के स्थान पर अपनाये जाने की जरुरत हैं जिसके लिए एक विशेष आम सभा की बैठक बुलाने की जरूरत है। इस तरह की विशेष आम सभा की बैठक के लिए एजेंडा मॉडल उपनियम कानून को अपनाने के लिए किया जाएगा।

वर्ष 2012-2013 के लिए सोसायटी की पुस्तकों के ऑडिट के लिए एक लेखा परीक्षक और उसके पारिश्रमिक को फिक्स करने के लिए यह जरुरी है कि लेखा परीक्षक सरकार विभाग द्वारा बनाए पैनल में से एक होना चाहिए।

एक लेखा परीक्षक अधिक से अधिक तीन साल के लिए लगातार एक ही सोसाइटी के खातों को ऑडिट नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा कोई भी लेखा परीक्षक एक वर्ष में 20 से अधिक समितियों के ऑडिट का संचालन नही कर सकते हैं। हालांकि, इस उद्देश्य के लिए समितियों की संख्या की गणना में 1 लाख रुपए से भी कम शेयर पूंजी वाले सोसायटी शामिल नहीं किये जायेंगे।

31.05.2013 से पहले मॉडल उपनियम को अपनाने के लिए प्रस्ताव दाखिल करना आवश्यक है।

यदि प्रबंध समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया है या अगले छह महीने के भीतर समाप्त हो रहा है वहां सोसायटी को तुरंत ऊपर दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।

इन निर्देशों को उप पंजीयक देने में k-वेस्ट, नई धारा 77I (2) एमसीएस अधिनियम 1960 की धारा 77A कि अनदेखी की गई है, जिन समितियों के शर्तों की अवधि समाप्त हो गई हो, कानूनी तौर पर ऐसे सदस्य तत्संबंधी समिति के पदाधिकारी नहीं रह सकते हैं। एक साधारण सदस्य द्वारा बुलाई गई विशेष आम सभा की बैठक कानूनी बैठक के रूप में स्वीकार कर ली जाएगी या नही इस पर कोई विचार नही किया गया है।

ऐसे परामर्श 97वें संवैधानिक संशोधन के उद्देश्यों को पूरा करने में कहाँ तक सहायक होते है?

Comments (0)

Tags: , , , , , , ,

राजनेता सहकारी कानूनों को तोड़ने में सबसे आगे हैं?

Posted on 28 April 2013 by parasnath

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे बीएमसी से बिना अनुमति के मुंबई में एक सहकारी हाउसिंग सोसाइटी में अपने फ्लैट का पुनर्निर्माण शुरु कर दिया है।

बीएमसी ने उनके खिलाफ आरोप लगाया है। श्री ठाकरे पर भी नगर निगम ने अपने फ्लैट में अवैध निर्माण का आरोप लगाया है, जो प्रमुख नेताओं में से एक है।

अन्य राजनीतिक मराठी अजीत पवार, गृह मंत्री शिवराज पाटिल, भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे और राज्य मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों को भी नगर निगम प्रशासन से नोटिस मिला है।
श्री ठाकरे और अजित पवार एक प्रोफॉर्मा इनकार जारी किए हैं।

सूत्रों का कहना है महाराष्ट्र में नेताओं को नगर निगम के आवास के नियमों के घोर उल्लंघन में लिप्त होने की आदत है और यह पहली घटना नहीं है।

Comments (0)

Tags: , , ,

महाराष्ट्र की सहकारी आवास समितियों में अव्यवस्था

Posted on 24 April 2013 by Manoj

आई सी नाईक

महाराष्ट्र विधानसभा ने एक संयुक्त प्रवर पैनल को राज्य सहकारी कानून भेजा है और जिससे इस बजट सत्र में इसके पारित होने की संभावना कम हो गई है।

विशेषज्ञ (विधान परिषद ने पहले ही इस विधेयक को पारित कर दिया है) इसे एक बुद्धिमान कदम मानते हैं। अध्यादेश को जल्दबाजी में अंतिम क्षणों में तैयार किया गया था और करीब से देखने पर उसमें कई खामियाँ नज़र आती है।

कई गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन में अराजकता है, इनकी समितियों का कार्यकाल समाप्त हो गया है।

महाराष्ट्र सहकारिता (संशोधन) द्वारा यथा संशोधित एमसीएस अधिनियम 1960 की धारा 73I के मामले में अध्यादेश 2013 का 14.2.2013 से ऐसी समितियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है।

अनुच्छेद 97CAA 2011 के तहत रजिस्ट्रार की निलंबित शक्तियों (संसद के एक अधिनियम) को धारा 77A में बताए अनुसार पुनर्जीवित किया जाएगा और “तत्कालीन प्रशासक” के नये अवतार को अधिकृत अधिकारी के नए नाम पर 6 महीने का एक नया पट्टा मिल जाएगा।

इन सोसाइटियों को राज्य सहकारी चुनाव प्राधिकरण से आर्ग्यु करने की सलाह दी जाती है-छह महीने के भीतर एमसीएस अधिनियम 1960 की नई धारा 73CB के तहत वे कार्यशील हो जाएंगे चाहे संयुक्त चयन पैनल द्वारा अपने काम को खत्म करता है या नहीं।

Comments (0)

Tags: , , , , , , ,

97वें सीएए: ताजा अध्यादेश के लिए महाराष्ट्र तैयार

Posted on 20 April 2013 by dipakkumar

राज्य सहकारी विभाग के अनुसार देश की संसद द्वारा पारित 97वें संवैधानिक संशोधन के तरह सहकारी समितियों के लिए एक नये अध्यादेश अधिनियम में संशोधन करने के साथ अब इसे महाराष्ट्र में प्रख्यापित किया जाएगा।

दूसरी बार इस अध्यादेश का एलान आवश्यक हो गया है जिसे राज्य विधानसभा की विस्तृत जांच के लिए संयुक्त प्रवर समिति को सहकारी समिति संशोधित बिल भेजा गया है।

हालांकि अध्यादेश को जल्द ही लागू किया जाएगा, जब राज्य मंत्रिमंडल ने इस संबंध में अपनी मंजूरी दे देगी।

महाराष्ट्र विधान परिषद ने पहले ही विधेयक पारित कर दिया था।

पहले अध्यादेश फरवरी में प्रख्यापित किया गया था और 21 अप्रैल को समाप्त हो जाएगा।

संशोधन बिल सहकारी समितियों के कामकाज में पारदर्शिता, व्यावसायिकता और समिति में अधिकतम सदस्य संख्या 21, महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण, पदाधिकारियों का कार्यकाल पांच साल और एक अलग सहकारी चुनाव आयोग की स्थापना का निर्धारण के साथ कई अन्य चीजें प्रदान करता है।

Comments (0)

Tags: , , , ,

सहकारी समितियों में आरटीआई : बहस जारी

Posted on 12 April 2013 by dipakkumar

हाल ही में संशोधित 97वाँ सहकारी अधिनियम के मुताबिक बहुत ज्यादा धन वाली सहकारी समितियाँ नियंत्रण से बाहर हैं। अब वे स्वशासी और अभेद्य हैं।

लेकिन महाराष्ट्र में आम धारणा है कि सहकारिता का अर्थ ही कुछ दोष होता है। वे अनुशासनहीन और राजनीतिक रूप से शक्तिशाली हो रहे हैं, उन पर सख्त नजर रखे जाने की जरूरत है। इसी कारण वर्तमान में महाराष्ट्र सहकारी समितियों पर सूचना का अधिकार लागू किया जाए या नहीं, इस पर बहस जारी है।

महाराष्ट्र राज्य में लगभग साढ़े पांच करोड़ सदस्यों के साथ दो लाख से अधिक सहकारी समितियाँ है।

आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुम्भर के अनुसार 97वाँ संवैधानिक संशोधन के अनुसार सहकारी समिति गठित करना एक मौलिक अधिकार बन गया है और सहकारी समिति संविधान के तहत गठित किया गया संगठन है, इसलिए आरटीआई उन पर स्वचालित रूप से लागू होता हैं।

संविधान के भाग 1XB के तहत सूचीबद्ध किया जा रहा सहकारिता लोकल सेल्फ गवर्नमेंट है और इसलिए वह आरटीआई के दायरे में आ जाएगा, श्री कुम्भर ने कहा।

हालांकि आरटीआई के तहत सहकारी समितियों को शामिल किए जाने का कुछ विरोध किया जा रहा है लेकिन सहकारिता आयुक्त ने कहा कि केवल सहकारी समितियों के सदस्यों के लिए यह कानून लागू हो सकता है।

Comments (0)

Tags: , , , ,

सहकारिता के माध्यम से अल्फांसो आम खरीदें

Posted on 04 April 2013 by parasnath

महाराष्ट्र में सहकार ने जहरीले रसायनों के उपयोग के माध्यम से आम पकने के खिलाफ अपने अभियान की शुरूआत कर दी है। वह अपने आसपास के आम लोगों को बता रहे है कि रासायनिक प्रक्रिया से पकाया आम स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और यह फलों के राजा के प्राकृतिक गुणों को बर्बाद कर देता है।

उन्होंने हाल ही में वैज्ञानिकों के द्वारा इस विषय पर किए गए अध्ययन के निष्कर्ष का अपने अभियान के समर्थन में इस्तेमाल कर रहे है।

अजीत गोगटे, संस्थापक, निदेशक और देवगढ़ तालुका आम उत्पादन सहकारी सोसायटी के अध्यक्ष स्वाभाविक रूप से पकाए गए आम को उपलब्ध कराने की सक्रिय संभावनाएं खोज रहे है।

यही कारण है कि गोगाटे ने एक प्रयोग शुरू कर दिया है, जिसमें 25 वर्षीय 700 किसानों की सहकारी समिति इंटरनेट के माध्यम से अलफांसो आम को उसके सदस्य के खेतों से उपभोक्ता को बेचना शुरू कर दिया है।

Comments (0)

Tags: , ,

महाराष्ट्र में 97वें सहकारी संशोधन का उल्लंघन

Posted on 26 March 2013 by ajayjha

आई सी नाईक

सहकारी आंदोलन के अग्रणी राज्य महाराष्ट्र ने विधायिका स्तर पर संविधान संशोधन के उल्लंघन में लिप्त है। भारतीय सहकारिता डॉट कॉम के आगंतुकों ने कुछ समय पहले ही संवैधानिक संशोधन का उल्लंघन करके राज्य में अधिकारियों के पंजीयन के बारे में सूचित किया था, अभी हम राज्य मंत्रिमंडल के एक मामले की रिपोर्ट दोहरा रहे है।

अनुच्छेद 97वें सीएए द्वारा 243ZK के तहत संवैधानिक जनादेश है, जो 13.02.2012 से प्रभावी हो गया है।

(1) किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाई गई किसी भी कानून में निहित कुछ बात के होते हुए भी बोर्ड के कार्यकाल की समाप्ति से पहले बोर्ड का चुनाव आयोजित किया जाएगा ताकि बोर्ड के नव-निर्वाचित सदस्यों को कार्यालय के निवर्तमान बोर्ड के सदस्यों के कार्यकाल की समाप्ति पर कार्यालय में कार्य तुरंत शुरू कर सकें और

(2) अधीक्षण और निर्देशन के लिए निर्वाचक नामावलियों की तैयारी पर नियंत्रण और आचरण एक सहकारी समिति के लिए सभी चुनाव एक ऐसे प्राधिकारी में निहित है, तथा किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा कानून द्वारा प्रदान की जाती है।

राज्य के कानून में संशोधन के लिए केंद्र द्वारा संवैधानिक समय सीमा के विस्तार के लिए इंतज़ार कर रही है, 97वें सीएए प्रावधानों के साथ तालमेल आखिरी समय पर राज्य मंत्रिमंडल राज्यपाल प्रबंधित करने के लिए 1960 एमसीएस अधिनियम में संशोधन करने के लिए 2013 में 2 अध्यादेश जारी किए गए।

इस देरी के नतीजतन अनुच्छेद 243ZK के अनुसार संवैधानिक जनादेश की आवश्यकताओं को सम्मान करने जैसा कि उपरोक्त वर्णित है असंभव हो गया अध्यादेश में प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों में जहां सोसायटी के प्रबंध समितियों के चुनाव 31 मार्च 2013 को हो रहे है, समितियों के चुनाव 31 दिसम्बर 2013 से पहले आयोजित किए जा सकते हैं।

क्यों इस संक्रमण कल की व्यवस्था के लिए राज्य के कानून में बनाया जा सकता था? कानून के तहत चुनाव के लिए निवर्तमान समिति का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा एक साल पहले देश की उच्चतम कानूनी दस्तावेज़ में शामिल किया गया था।

क्या यह एक उचित कानून और प्रशासनिक व्यवस्था का समय पर सुनिश्चित करने में जिम्मेदार व्यक्तियों की विफलता नहीं है? विशेष रूप से जब उसके लिए एक साल का समय प्रदान किया गया।

इस गंभीर राज्य चूक पर किसी का ध्यान नहीं है? एक संघीय संरचना विशेषाधिकार के तहत ऐसी खामियों पर संघीय सरकार सहनशील है? केंद्रीय मंत्रिमंडल समय-समय पर सभी स्तरों पर राज्य सेवाओं का वितरण सुनिश्चित करने के बारे में गंभीर है, वह कहीं अधिक इस गंभीर मुद्दे पर पूरी गंभीरता से उपयुक्त उपचार कर रही है?

Comments (0)

Tags: , , ,

महाराष्ट्र सीएचएस: नए उपनियम को अपनाने के लिए तैयार

Posted on 24 March 2013 by ajayjha

आई सी नाईक

97वें संवैधानिक संशोधन से सहकारी आंदोलन को बल मिला है। महाराष्ट्र सरकार 14.02.2013 को प्रत्यक्ष सोसायटी के लिए रजिस्ट्रार जो कि नवीनतम राज्य के सहकारी कानून के असंगत हैं उनके उपनियमों में संशोधन करके पावर देने पर एक अध्यादेश जारी किया।

एमसीएस अधिनियम 1960 और एमसीएस नियम 1961 के प्रावधान और उपनियम किसी भी तरह सुपरसिड हो रहे हैं। हालांकि रजिस्ट्रार एमसीएस धारा 14 के प्रावधान से मॉडल निर्दिष्ट अधिनियम के द्वारा सशक्त किया गया है।

अब यह स्पष्ट है कि रजिस्टर /संबंधित सोसायटी द्वारा इस मॉडल को अपनाना अनिवार्य हो जाएगा। उन उपनियम को लंबे समय तक अनुबंध पर परस्पर सदस्यों के रूप में न्यायालय द्वारा शासित किया जाएगा। वे कोई देश के कानून से अलग नही होगा। वे ऐसे विस्तारित नियम दिखा सकते है जिन्हें विधानसभा में पेश नहीं किया गया है।

“सदस्य नियंत्रित लोकतांत्रिक और स्वायत्त संगठन” अनुच्छेद 43B में निर्दिष्ट है कि राज्य के प्रभुत्व में पिछले दरवाजे से प्रवेश कॉपरेटर्स के बिना ही हो जाता है।

पिछला मॉडल उपनियम 2010 में अनुमोदित किया गया प्रत्यक्ष सोसायटी के रजिस्ट्रार की शक्तियों के लिए उन्हें अपनाया नही गया और उन्हें कई सहकारी आवास समितियों ने भी नहीं अपनाया।

महाराष्ट्र सहकारी विभाग के कॉपरेटर्स निम्नलिखित साइट के लिए प्रशंसा के हकदार हैं

http://sahakarayukta.maharashtra.gov.in/SITE/PDF/Rules_Acts_Bylaws/Model_ByeLaws_of_Housing_Cooperative_societies.pdf

97वें सीएए और महाराष्ट्र सहकारी (संशोधन अध्यादेश 2013) के प्रभाव को सीएचएस में शामिल करने के लिए मॉडल उपनियमों को यहां पाया जा सकता है।

Comments (0)

Tags: , , ,

सहकारी लेखा परीक्षकों का पैनल

Posted on 22 March 2013 by ajayjha

सहकारी विभाग महाराष्ट्र राज्य, पुणे ने 18.3.13 को सहकारी सोसायटी के लेखापरीक्षा के पैनल के लिए Cir.no.237 2013 जारी किये गए है यह संशोधित (ऑफ़लाइन) फार्म और शर्तों के साथ 25.03.2013 विस्तारित अंतिम तिथि के साथ प्रस्तुत किए गए है।

1. ऑफ़लाइन संशोधित रूप डीडीआर कार्यालय में 25 मार्च, 2013 तक प्रस्तुत किया जा सकता है। (वहाँ ऑनलाइन जमा सुविधा नही है)

2. अनुभव अब आंतरिक, समवर्ती और वैधानिक अंकेक्षण में भी शामिल है। फर्म भी अपने अनुभव के एक भाग के रूप में अपने भागीदारों के अनुभव को जोड़ सकते हैं।

3. भागीदारी फर्म में कम से कम 2 भागीदार होने चाहिए जिन्हें 3 साल का मराठी का ज्ञान होना चाहिए।

4. लेखापरीक्षा के अनुभव के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने की कोई आवश्यकता नही होगी। केवल लेखापरीक्षा अनुभव के समर्थन में मराठी भाषा में विधिवत नोटरी शपथ पत्र पर्याप्त है।

5. पैनल तीन साल के लिए है, यह अधिनियम संशोधन के अधीन है।

6. पैनल के लिए, फर्म का महाराष्ट्र में प्रधान कार्यालय होना चाहिए।

7. यह सलाह दी जाती है कि सदस्यों /फर्म जिसमें पहले से ही फार्म प्रस्तुत किया गया है, अपेक्षित शपथ पत्र के साथ संशोधित रूप पुनः जमा कराना होगा।

8. अधिक जानकारी के लिए परिपत्र सं. 238/ 2013 का 18.3.2013 की निर्देशिका में उल्लेख है कृपया अधिक जानकारी के लिए “लेखा परीक्षक पैनल डाउनलोड” पर देखिए

http://sahakarayukta.maharashtra.gov.in/SITE/Information/auditorEmpanelment.aspx

Comments (0)

सहकारी-प्रश्न

सहकारिता से संबंधित प्रश्न
श्री आई सी नाईक से पूछे
info@indiancooperative.com

महत्वपूर्ण खबर

वोट

क्या सह्कारिता मे सरकारी हस्तक्षेप आवश्यक है ?

Loading ... Loading ...

Gallery

prakash-lonare

RELATED SITES

Powered By Indic IME