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जीसीएमएमएफ (अमूल) ने कई महत्वाकांक्षी योजना बनाई

Posted on 16 April 2013 by ajayjha

गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आर.एस. सोढ़ी ने अपनी कंपनी द्वारा गुजरात और गुजरात के बाहर विस्तार कार्यक्रम के लिए नई योजना बनाने की बात कही है।

जीसीएमएमएफ जल्द ही गुजरात में प्रति दिन 148 लाख लीटर से 160 लाख लीटर दूध उत्पादन करने की ओर अग्रसर है। इस लक्ष्य को पूरे राज्य में अनेक क्षेत्रों में नए डेयरी फार्मों की स्थापना के माध्यम से पूरा किया जाएगा, श्री सोढ़ी ने कहा।

गुजरात में सहकारी दृश्य से परिचित एक सूत्र ने बताया कि गुजरात के सहकारी टाइटन अगले कुछ साल में अपनी क्षमता का विस्तार करने के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपए निवेश करने पर ढृढ़ है।

डेयरी कंपनी ने हाल ही में मदर डेयरी में सैकड़ों करोड़ों रुपए का निवेश किया है और सफलतापूर्वक दिल्ली, कानपुर, मुंबई, लखनऊ और कोलकाता में दूध का विपणन किया है।

श्री सोढ़ी के मुताबिक राज्य में बड़े पैमाने पर सूखे के बावजूद गुजरात में दूध की मांग में लगातार वृद्धि हुई है। डेयरी सहकारी महासंघ बढ़ रही मांग को पूरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा, श्री सोढ़ी ने दावा किया।

श्री सोढ़ी भारत सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यूरोपीय संघ भारत से अनुचित रियायतें निकालने पर लगा हुआ है। श्री सोढ़ी ने कहा कि यूरोपीय संघ बिना किसी प्रतिबंध के भारतीय बाजार पर अपने सभी उत्पादों को बेचने में लगा है, जबकि भारत को अपने बाजार के लिए किसी भी उपयोग की अनुमति नही देती है।

श्री सोढ़ी ने यूरोपीय संघ के प्रतिबंधात्मक व्यापार के रवैया को भारतीय किसानों की प्राथमिक हितों के लिए हानिकारक बताया है। एमडी ने इससे पहले सरकार को एक पत्र भेजा है जब भारत एफटीए के संदर्भ में यूरोपीय संघ के साथ बातचीत कर रहा है।

श्री सोढ़ी ने हाल ही में अहमदाबाद में एक सम्मेलन के मौके पर पत्रकारों के साथ बातचीत कर रहे थे।

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एक हाउसिंग को-ऑप सोसायटी कैसे कार्य करता है?

Posted on 24 February 2013 by Manoj

देश में निम्नलिखित विवरण आवासीय सहकारी समितियों के कामकाज की एक सही तस्वीर पेश करता है। ऐसी स्थिति में सदस्य जल्द ही खुद को अलग थलग पाता है।

मुझे वर्ष 2010 में सहकारी हाउसिंग सोसाइटी में समिति के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया है। मैंने देखा है कि सोसायटी के सचिव जो कि पिछले 12 वर्षों से पद पर बने हुए है महाराष्ट्र सोसायटी अधिनियम के अनुसार सोसायटी में काम नहीं कर रहे है और न ही वह सोसायटी के सामान्य निकाय में पारित प्रस्ताव का पालन कर रहे है।

वह सोसायटी के खाते के बारे में नहीं जानते है। वे समिति कि जनरल बॉडी में सदस्यों को भी कुछ भी नही बता सकते हैं। मैंने देखा है कि लेखापरीक्षक से कई प्रश्न है, लेकिन सवालों का जवाब नहीं दिया गया है।

उन्होंने पिछले पांच से छह साल से अधिक उप पंजीयक को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किया है। सचिव, समिति के समक्ष अनुमोदन के लिए मासिक बयान और आय व्यय का ब्यौरा नहीं दे रहे है।

वह स्वयं ही व्यय के संबंध में निर्णय ले रहे है। सोसायटी गैर ऑक्यूपेंसी चार्ज ले रहा है जो कि सेवा शुल्क से 10% से अधिक शुल्क है। मैंने इस संबंध में सरकार के आदेश के बारे में बताया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह जनरल बॉडी के आदेश के हिसाब से चार्ज करेंगे।

अध्यक्ष और समिति के अन्य सदस्य उनकी बातों को समर्थन दे रहे हैं। मेरा मानना है कि इन नियमों के अनुसार किया जा रहे काम से कोई लाभ नहीं होने वाला है।

पिछले सामान्य निकाय की बैठक में सदस्यों ने खातों के बारे में पूछा लेकिन सचिव बताने में असमर्थ थे तो लोगों ने समिति के सदस्यों से पूछा हालांकि, वे लोग भी कुछ भी नही बता सके।

मैंने उस समय मासिक बैठकों में समिति के सदस्यों को बताया कि वार्षिक आय एवं व्यय के बयान मेरे द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है। सामान्य निकाय की बैठक में अध्यक्ष ने मुझे समिति से इस्तीफा देने का निर्देश दिया और मुझसे कहा कि कोई सवाल नहीं उठाना।

कुछ दिनों के बाद मुझे सोसायटी के पदाधिकारियों सहित सभी समिति के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने बताया है कि उपरोक्त कारणों के लिए मुझको समिति से हटाया क्यों नहीं जाना चाहिए।

पत्र का जवाब और सभी विवरण मैंने कूरियर के माध्यम से दे दिया है जो कुछ सचिव ने पिछले पांच से छह साल में नहीं किया है।

लेकिन फिर भी उल्लेखनीय है कि अध्यक्ष ने पत्र जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें मेरा जवाब प्राप्त नहीं हुआ है और मैं समिति की सदस्यता से वंचित हूँ ऐसी जानकारी सोसायटी के नोटिस बोर्ड पर डाल दी गई है।

विनायक महामुंकर
मलाड (पश्चिम)
मुंबई 64

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अभिउदय सहकारी बैंक पर जुर्माना

Posted on 02 January 2013 by ajayjha

मुंबई स्थित शहरी सहकारी बैंकों के शीर्ष बैंक अभिउदय सहकारी बैंक को भी आरबीआई मानदंडों के लिए रिजर्व बैंक ने नहीं बख्शा है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने अभिउदय सहकारी बैंक पर पिछले सप्ताह जुर्माना लगाया है। बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का दोषी पाया गया।

भारतीय सहकारिता ने जब उनसे संपर्क करना चाहा तो बैंक के अध्यक्ष श्री घडंत ने इस मामले पर बात करने से इनकार कर दिया। एक सीजीएम श्री नाईक ने आरबीआई दंड की पुष्टि की, लेकिन वह भी चाहते थे कि प्रबंध निदेशक ही इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ कह सकते है।

एमडी श्री मोरे ने सहकारी समाचार पोर्टल के बार-बार फोन करने पर भी फोन नहीं उठाया।

वाशी स्थित बैंक की शाखा में एम/एस स्पीक एशिया ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड, एक ऑनलाइन सर्वेक्षण कंपनी के खाते में लेन-देन की संबंधित मुद्दे की विशेष जांच की गई। आरबीआई जांच से पता चला है कि बैंक ने केवाईसी/ एएमएल मामले में दिशा निर्देशों का उल्लंघन किया।

बैंक को खाता फ्रिज़िंग के बारे में भी दिशा-निर्देशो के उल्लंघन का दोषी पाया गया। बैंक ने खाता बंद करके ऑडिट ट्रॉइल भी बंद कर दिया था।

यह भी देखा गया है कि बैंक केवाईसी/ एएमएल दिशा निर्देशों का पहले भी पालन नही किया था। खासतैर पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, झवेरी बाजार शाखा के साथ आरटीजीएस लेनदेन के संबंध में।

इस प्रकार केवाईसी मानदंडों के कार्यान्वयन में गैर अनुपालन की पुनरावृत्ति का सबूत था।

भारतीय रिजर्व बैंक ने इस बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, इसके जवाब में बैंक ने लिखित उत्तर प्रेषित किया। इस मामले में तथ्यों और बैंक से प्राप्त उत्तर पर विचार करने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक को उक्त उल्लंघन का दोषी पाया और बैंक पर ‘मेजर’ दण्ड लगाना आवश्यक समझा।

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आरबीआई ने सीकेपी सहकारी बैंक को दण्डित किया

Posted on 03 December 2012 by parasnath

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक को साइट पर एटीएम खोलने  के निर्देश का उल्लंघन का दोषी पाया।

अन्य मुद्दों पर भी भारतीय रिजर्व बैंक ने सीकेबी बैंक को निर्देशों के उल्लंघन का दोषी पाया है। जिसमें आपरेशन के क्षेत्र के बाहर उधारकर्ताओं के लिए वित्त का विस्तार, आवास और अचल संपत्ति,  सिंगल पार्टी की जोखिम की सीमा शामिल हैं।

निदेशक ऋण के लेकर हमेशा की तरह गलती कर रहे है, उनके साथ बैंकिंग नहीं करनेवाली इकाई के लिए बैंक गारंटी जारी करना, वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-आईएनडी) के लिए संदेहास्पद लेनदेन रिपोर्ट के नॉन-फाइलिंग (एसटीआर) रिपोर्ट, असुरक्षित अग्रिमों पर व्यक्तिगत सीमा से अधिक है, अपने एक निदेशक के लिए तीसरे पक्ष के एफडी के खिलाफ ओवरड्राफ्ट की मंजूरी देने में सीकेपी बैंक लिप्त है।

आरबीआई जांच पर सीकेबी बैंक अपनी स्थिति की व्याख्या करने की कोशिश की लेकिन शीर्ष बैंक ने शहरी सहकारी बैंक पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

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डॉ. अन्नासाहेब छोगले यूसीबी: तर्क की जीत

Posted on 08 November 2012 by ajayjha

सहकारी बैंकों सहित कोई भी वित्तीय संस्था यदि कारोबार के तर्क का पालन नहीं करती है तो वह व्यवहार्य नहीं हो सकती है। एक अदालत के फैसले में इस तर्क को बढ़ावा देते हुए डॉ. अन्नासाहेब छोगले शहरी सहकारी बैंकों को किसानों से ऋण की वसूली के लिए मंजूरी  दी गई है।

याचिका समिति के विधायक मोहन जोशी ने बैंक से ऋण ले चुके बकाएदार किसानों के लिए एक याचिका को दायर किया था जिसे खारिज़ करने के लिए डॉ. अन्नासाहेब छोगले शहरी सहकारी बैंक ने बंबई उच्च न्यायालय से आग्रह किया था।

अदालत ने फैसला सुनाया है कि समिति को बैंक द्वारा वसूली करने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की शक्ति नहीं है।

दो न्यायाधीश की बेंच ने कहा कि बैंक वसूली संबंधी कार्यवाही को आरंभ कर सकता है और यह कानूनी माना जाएगा। हालांकि अदालत ने संशोधित   देय ब्याज दर पर किए गए समझौते की वैधता पर अपनी राय देने से इनकार कर दिया।

यह उल्लेखनीय है कि प्रभावित बैंक ने किसानों को कम से कम एक करोड़ रुपये की राशि का ऋण दिया था। क्योंकि नियमित पुनर्भुगतान नही किया जा रहा था और वह राशि  एनपीए हो गया था उस स्थिति में बैंक के पास वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

बैंक ने महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 101 के तहत कार्यवाही शुरू कर दी। सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार ने बैंक और 23 बकाएदारों को सुना और अधिनियम की धारा 101 के तहत वसूली प्रमाण पत्र जारी कर दिए।

बैंक इन प्रमाण पत्र के साथ महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी के नियम 107 के तहत वसूली करना शुरू कर दिया।

बैंक इस मामले को अदालत में ले गया था  याचिका समिति ने ऋण वसूली कार्यवाही को रोक दी थी।

 

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शहरी सहकारी ग्रेटर बैंक के अस्तित्व को बचाने की कोशिश

Posted on 28 October 2012 by parasnath

बॉम्बे आधारित शहरी सहकारी ग्रेटर बैंक ने सोने के गहनों पर कोलेटरल्स के विरुद्ध 100 करोड़ रुपये तक का ब्याज पर उधार दिया है और आने वाले 12 महीनों में इस व्यापार को दोगुना करने का इरादा रखता है।

सोने के गहने के विरुद्ध उधार देने की बैंक की हाल की ही  योजना है और इसलिए समय की एक छोटी सी अवधि के भीतर 100 करोड़ रुपये तक के लेनदेन कर पाना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बैंक के चीफ श्री नरेन्द्र बलदोता ने कहा।

श्री बलदोता ने कहा कि बैंक की संपत्ति में गिरावट आई थी क्योंकि उससे शाख पत्र से वंचित किया गया था। बैंक के पास  सोने की ऋण सेगमेंट में प्रवेश करके कठिनाइयों को दूर करने के अलावा कोई चारा नही था उन्होंने टिप्पणी की।

अगर भारतीय रिजर्व बैंक सोने के लेनदेन के साथ जुड़े जोखिम पर चिंतित है फिर भी अपने संकट से निकालने और अपने व्यापार को 200 करोड़ रुपए तक बढ़ाने पर संकल्पित  है।

बैंक के प्रमुख के अनुसार, बैंक की सभी शाखा नवीनतम वैल्यूएशन मशीन के साथ सुसज्जित हैं और इस प्रकार  बिना देरी के व्यापार करने में सक्षम हैं। नए व्यवसाय के कारण बैंक ने हजारों नए ग्राहकों को आकर्षित किया है और बैंक के बचत खातों की संख्या जोर से बढ़ी  है, बलदोता दावा किया है।

 

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शामराव विट्ठल सहकारी बैंक मुसीबत में

Posted on 03 September 2012 by parasnath

मुंबई में स्थित शामराव विट्ठल सहकारी बैंक मुसीबत में है। यह देश के पांच शीर्ष शहरी सहकारी बैंकों में से एक है।

इसके अपने लॉकर से 86 लाख रुपये मूल्य के सोने के गहने गायब हो गए हैं,आरोप है कि लॉकर के प्रभारी ने ही सोने के गहने चोरी किए है।

पुलिस ने जांच से पुष्टि की है कि पी.वी. नालावाडे, लॉकर संरक्षक ने नकली चाबी का उपयोग करके गहने चोरी किए और उन्हें बाजार में बेच दिया।

श्री नालावाडे पहले से ही पुलिस की हिरासत में है और पुलिस इस अपराध में शामिल अन्य लोगों को पकड़ने के करीब है।

पुलिस ने बैंक से कहा है कि लॉकर संरक्षक के रूप में अनुभवी और रैंकिंग अधिकारियों को नियुक्त करे ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हो सकें।

सहकारी समितियों के साथ जुड़े लोगों का कहना है शामराव विट्ठल तरह विश्वसनीय बैंक में इस तरह की घटनाओं से शहरी सहकारी बैंकों से विश्वास उठने लगा है।

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आवासीय सहकारी: रखरखाव शुल्क का मुद्दा

Posted on 02 September 2012 by dipakkumar

पौरुष गर्ग

मैंने सालाना रखरखाव शुल्क का भुगतान सहकारी प्रबंधन को इस वर्ष के शुरू में ही कर दिया था। सहायक रजिस्ट्रार ने मौजूदा प्रबंधन को बीच में ही भंग कर दिया।

अब एक नया प्रबंधन आया है कई दिन बीतने के बाद अब नया प्रबंधन भी रखरखाव शुल्क के बारे में पूछ रहा है। इस तरह मैंने रखरखाव शुल्क का एक ही अवधि
के लिए दो बार भुगतान किया है।

क्या, इस स्थिति से निपटने का कोई प्रावधान या रास्ता है?

इस संबंध में आपकी मदद और मार्गदर्शन की अत्यधिक आवश्यकता है।

आई सी नाईक

यदि आपने रखरखाव शुल्क का भुगतान पहले ही प्रबंधन को कर दिया है, तो वहाँ एक बार फिर से भुगतान करने की जरूरत नही है।

भेजें गए भुगतान का विवरण की लिखित में मांग कर सकते है। अगर दरों को इसी अवधि के दौरान संशोधित किया गया हैं तो अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ सकता है।

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आवासीय सहकारी सोसायटी की दीवार पर एसी

Posted on 28 August 2012 by dipakkumar

श्री आईसी नाईक कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर है। दिलचस्प है कि श्री परेश, नाईक की अनुपस्थिति में सहकारी प्रश्नों का जवाब दे रहे है।

प्रसाद

मैंने अपने फ्लैट के ग्रिल के बाहरी दीवार पर स्पलीट एसी को स्थापित किया है, हमारी सोसायटी ने इस तरह की स्थापना के लिए मेरे खिलाफ एक नोटिस जारी किया है। उन्होने मुझे एसी को हटाने को कहा है और इसे मेरी खिड़की के बाहर ग्रिल पर स्थापित करने को कहा है। अगर मैंने इस मामले में कोई कार्यवाही नही की तो सोसायटी मुझ पर जुर्माना कर सकती है।

बाद में इस मामले पर एजीएम की बैठक में विचार-विमर्श किया गया और सभी बहुमत के साथ इस बात पर सहमत हुए कि किसी को भी निजी इस्तेमाल के लिए ग्रिल के बाहर की दीवार  को उपयोग नही करना चाहिए। एजीएम में यह भी निर्णय लिया  गया  कि यदि सदस्य ने इस मामले में कोई कार्यवाही नही की तो सोसायटी उस पर 1000 रुपये का जुर्माना लगा सकती हैं।

क्या, मेरे द्वारा बाहरी दीवार पर लगाए गए एसी कनेक्शन कानूनी रुप से ठीक नही है?

इसके अलावा सोसायटी को कानूनी तौर पर इस तरह के मामले में  किसी भी सदस्य पर जुर्माना लगाने की अनुमति है?

परेश

सोसायटी जुर्माना तभी कर सकती हैं जब यदि और केवल यदि सामान्य निकाय की बैठक में इस प्रस्ताव को पारित कर लिया गया है।  इस तरह एम सी के पास इस विकल्प को प्रयोग करने का अधिकार है। जो कोई भी इमारत के मुखौटे को बदलता है उसे आम तौर पर स्वीकृत नहीं किया जाता है।

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जनलक्ष्मी सहकारी बैंक में हड़ताल जारी

Posted on 16 July 2012 by Manoj

जनलक्ष्मी सहकारी बैंक और उसकी शाखाओं में लंबे समय से चल रहे हड़ताल के समाप्त होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे है। इसमें 400 कर्मचारी शामिल हैं।
कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, बैंक के निदेशक मंडल द्वारा की गई अपील का भी उन पर कोई असर नही हुआ है।
हड़ताली कर्मचारी बेहतर वेतनमान की मांग कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है, काम करने के हालात खराब होने से सहकारी क्षेत्र भी तेजी से हड़ताल और काम रोको जैसे खतरो का शिकार बनता जा रहा है।

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