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आईसीए बोर्ड: सहकारी नेता इस बार चुनाव के लिए तैयार

Posted on 02 May 2013 by ajayjha

भारतीय सहकारी नेताओं ने इस वर्ष अक्टूबर से नवंबर के लिए निर्धारित आईसीए बोर्ड के चुनाव के लिए खुद को तैयार करने में लगे हुए हैं। भारतीय सहकारिता डॉट कॉम से बातचीत में शीर्ष सहकारी समिति एनसीयूआई के अध्यक्ष ने आगामी चुनाव पर किसी भी प्रकार का फैसला केवल जुलाई के बाद लिए जाने की बात कही।

“अभी उस चुनाव में काफी समय बाकी है और हम मई में अंतर्राष्ट्रीय सहकारी कांग्रेस के आयोजन में व्यस्त रहे हैं”, डॉ. चंद्र पाल सिंह यादव ने कहा।

लेकिन एनसीयूआई अध्यक्ष ने आईसीए बोर्ड के लिए एक आम सहमति के उम्मीदवार होने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत में सहकारिता आंदोलन बहुत मजबूत है और दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी समिति में हमारे प्रतिनिधि की आवश्यकता है, उन्होंने कहा।

भारत ने 2011 में मेक्सिको में कैनकन के चुनाव में ईरान के लिए आईसीए बोर्ड की सदस्यता को खो दिया। इस पद के लिए टकराहट होती नजर आ रही थी, जिसमें इफको नामांकित श्रीनिवास गौड़ा और एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह के बीच मुकाबला की स्थिति बनी हुई थी।

हालांकि घटनाओं के नाटकीय मोड़ में चन्द्र पाल ने दौड़ से अपने को वापस ले लिया था लेकिन गौड़ा के नेफेड घोटाले के कारण चुनाव में ईरान की जीत हुई।

बुरे अनुभव को दोहराने से सहकारी नेता बचने की कोशिश कर रहे है और पूरी सावधानी बरत रहे है।” किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले, हम सभी क्षेत्रों के नेताओं से सलाह लेंगे”, चन्द्र पाल ने भारतीय सहकारिता डॉट कॉम को कहा।

“अभी लंबा समय है और तब तक बहुत पानी नदी में प्रवाहित हो गया रहेगा”, श्री यू एस अवस्थी, इफको के प्रबंध निदेशक ने कहा जब भारतीय सहकारी ने आईसीए बोर्ड के चुनाव के लिए उनकी तैयारियों पता करने के लिए उससे संपर्क किया। इफको ने पिछले आईसीए बोर्ड पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

कॉपरेटर्स के एक क्रॉस सेक्शन ने भारतीय सहकारिता को बताया कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी में चन्द्र पाल सिंह यादव की भागीदारी बढ़ने के साथ ही वह इफको नामांकित व्यक्ति के लिए खुला मैदान छोड़ सकते है। अगले लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा जारी सूची में उनके नाम की घोषणा की गई है।

लेकिन श्री सिंह ने राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण सहकारी समितियों में किसी भी तरह से कम भूमिका निभाने से इनकार किया है। बल्कि मुझे लगता है कि अगर मैं लोकसभा के लिए चुना गया तो सहकारी क्षेत्र की समस्याओं को हल करने में अधिक प्रभावी और सहायक हो पाउँगा, उन्होंने भारतीय सहकारिता को बताया।

अध्यक्ष सहित आईसीए के बोर्ड पर बीस सदस्य हैं। कोई भी देश कितना बड़ा है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, बोर्ड में सिर्फ एक सदस्य हो सकता है। आमसभा के प्रतिनिधियों की संख्या भिन्न हो सकती हैं, लेकिन कभी भी किसी देश से 25 से अधिक डेलीगेट नही हो सकते है। भारत की आम सभा में 12 प्रतिनिधि है।

भारतीय सहकारी डॉट कॉम पहले लिखा था कि वैश्विक सहकारी आंदोलन के मामले में भारत सबसे आगे है, प्रयास करके आम सहमति के उम्मीदवार को चुना जाना चाहिए।

भारतीय सहकारी डॉट कॉम से बातचीत में भी आईसीए एशिया प्रशांत क्षेत्रीय निदेशक डॉ. चान हो चोई ने यह देश के लिए कहा था न कि व्यक्तिगत मामलों के लिए।

आईसीए सहकारी दुनिया भर में कार्य करते हुए एकजुट करने का प्रतिनिधित्व करती है यह एक स्वतंत्र गैर सरकारी संगठन है।

1895 में स्थापित आईसीए के अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में सक्रिय 94 देशों से 254 सदस्य संगठन है।

यह एक साथ सहकारी दुनिया भर में लगभग एक अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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सरकार ने बहु राज्य सहकारी सोसायटी में मुख्य सतर्कता अधिकारी की नियुक्ति की

Posted on 03 April 2013 by parasnath

सरकार ने इफको, नेफेड और कृभको की तरह बहु राज्य सहकारी समितियों में भ्रष्टाचार के आरोपों पर गौर करने और अन्य अनियमितताओं की जाँच करने के लिए मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) नियुक्त करने का फैसला किया है।

यह कदम कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने के लिए शासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार विरोधी उपायों को शुरू करने के लिए पिछले महीने केंद्रीय सतर्कता आयोग के क्षेत्राधिकार के दायरे में इन सोसायटियों को लाने के लिए उठाया गया।

डीओपीटी में सूत्रों ने कहा कि मुख्य सतर्कता अधिकारी जो कि सीवीसी के दूरस्थ शाखा के रूप में कार्य करता है, भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं की शिकायतों पर सीवीसी से जांच में मदद करेगा।

“सीवीसी और सीवीओ से परामर्श सीवीओ की नियुक्ति की रुपरेखा तैयार किया जा रहा है। कार्मिक विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार बाद मे सीवीओ की नियुक्ति की प्रक्रिया को आरंभ करेगी”

सहकारी समितियों को सीवीसी के तहत लाने का फैसला अधिकारियों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद आया था, जिसके बाद अटॉर्नी जनरल की कानूनी राय ली गई थी।

“एजी का मानना है कि सदस्य, पदाधिकारी और बहु राज्य सहकारी समितियों के कर्मचारी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 2 (सी) के दायरे के भीतर आ जाएगा और सीवीसी को विधिवत रुप से उन पर अधिकारिता का प्रयोग करने का अधिकार होगा,” एक कार्यालय के कार्मिक विभाग द्वारा जारी किए गए ज्ञापन के अनुसार।

अनुभाग बताते हैं कि एक लोक सेवक की श्रेणी है जिसे पीसी अधिनियम के तहत कवर किया जा सकता है। इस सेवा में एक व्यक्ति शामिल होता है या एक निगम के अंदर जिसकी स्थापना एक केंद्रीय, प्रांतीय या राज्य अधिनियम के तहत किया जाता है।

भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको), राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नाफेड) और कृषक भारती कोऑपरेटिव (कृभको) डीओपीटी नवीनतम आदेश से पहले सीवीसी के नियंत्रण से उन्मुक्ति का आनंद ले रहे थे।

डीओपीटी और सीवीसी दोनों बहु सहकारी समितियों में सतर्कता तंत्र को मजबूत बनाने के लिए किसी भी गलत कार्य की जांच के तरीके पर विचार कर रहे हैं।

-पीटीआई

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मंत्रालय का निर्देश: नेफेड के बाद अब एनसीसीएफ की बारी, एनसीयुआई भी कतार में

Posted on 11 February 2013 by ajayjha

एनसीसीएफ ने गुरुवार को एनसीयुआई सभागार में उपनियमों में कुछ परिवर्तन को लेकर वार्षिक आम बैठक का आयोजन किया।

एनसीयुआई में व्याख्याता घोटाले और नेफेड में साझेदारी से घाटे के कारण कोऑपरेशन मंत्रालय सतर्क हो गया। मंत्रालय ने सहकारी संगठनों को गड़बड़ी को सुधारने के लिए शीर्ष सहकारी महासंघों से अपने कामकाज की शैली को सुधारने के लिए पत्र लिखकर पूछा था।

मंत्रालय के विचार को बताते हुए केन्द्रीय रजिस्ट्रार ने एनसीयुआई और नेफेड सहित सभी को पत्र लिखकर उनसे अध्यक्ष के कार्यकारी शक्ति में कटौती के लिए कहा। एनसीयुआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह ने पहले से ही मंत्रालय को एक पत्र लिख अपनी शक्ति छोड़ दी थी। उपनियमों में आवश्यक परिवर्तन किए जाने हैं, हालांकि यह अभी लंबित है।

नेफेड गंभीर वित्तीय संकट में है और उससे सरकार ने एक राहत पैकेज की जरुरत है। इसके लिए उपनियम कानून में संशोधन किया गया है।

अब एनसीसीएफ की बारी थी, भारतीय सहकारिता से बात करते हुए एनसीसीएफ के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने कहा कि उपनियम 35(ए)(बी)(सी), 35(बी)(आई) में संशोधन किया गया है।

श्री सिंह ने कहा कि ऐसा मंत्रालय की इच्छा का सम्मान करने के लिए किया गया है। हालांकि उन्होंने कहा है कि इन संशोधनों से अध्यक्ष की शक्ति को कम करके शक्तियों को निदेशक मंडल को स्थानांतरित कर दिया गया है।

श्री वीरेन्द्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि इस परिवर्तन से सहकारी नेताओं के अहं को चोट लग सकती है लेकिन उनकी शक्ति में कोई कमी नही आएगी।

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इफको के प्रबंध निदेशक ने सहकारी समितियों के अस्तित्व पर सवाल उठाया

Posted on 21 November 2012 by ajayjha

इफको के प्रबंध निदेशक ने युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष के खिलाफ सहकारी बिरादरी को बहुत ही अच्छे तरीके से आगाह किया। “यह आपके और मेरे बारे में नहीं है, इस पार्टी या उस पार्टी पर असंतोष निर्देशित नहीं है। हम मध्यम वर्ग के रूप में विफल रहे है और अगर हमने इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया तो क्रोध की बाढ़ में हमें सभी बह जाएंगे, उन्होंने कहा।

हम कहते हैं कि भारत के सहकारी आंदोलन में 25 करोड़ लोग और 6 लाख सहकारी समितियाँ शामिल है। लेकिन रिश्ता कहाँ है? क्या यह केवल उन्हें बैलेंस शीट भेजने और उन्हें साल में एक बार वार्षिक आम बैठक में बुलाने तक ही सीमित है? क्या हम वास्तव में उन्हें कनेक्ट करने में सक्षम है? और हम वास्तव में निजी क्षेत्र से किसी भी तरह से अलग है? ऐसे कुछ सवाल अवस्थी ने सभा में सहकारी कार्यों में नेकी का दम भरने वाले लोंगो से पूछ रहे थे।

अवसर एनसीयुआई में 59वें सहकारी सप्ताह के समापन समारोह का था जिसे मंगलवार को दिल्ली में आयोजित किया गया। नव नियुक्त मंत्री तारिक अनवर मुख्य अतिथि थे। एनसीयुआई अध्यक्ष और नेफेड अध्यक्ष भी मंच पर मौजूद थे।

इफको के एमडी ने इक्कीस शीर्ष स्तर की बहु राज्य सहकारी महासंघों से छोटे सदस्यों को कनेक्ट करने के तरीके तैयार करने के लिए का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी इस मुहिम में काम आएगा और इस प्रयास में इफको ने समर्थन का वादा किया। उन्होंने इस मामले में एनसीयुआई से अधिक से अधिक जिम्मेदारी पर बल देने के साथ आगे आने के लिए आग्रह किया।

“1956 में नेहरू ने विकास के एक उपकरण के रूप में सहकारिता की कल्पना की थी। लेकिन यह मुख्य रूप से एक साथ व्यापार करने के लिए एक उपकरण था।”

नेहरू ने इसे राजनीतिक इकाई के रूप में कभी नहीं देखा था उन्होंने राजनीतिक बातों के रूप में पंचायती राज और वैधानिक मॉडल को देखा था। सहकारिता की दुर्गति तब शुरु हुई जब इस विशुद्ध रूप से व्यावसायिक अवधारणा में राजनीति ने  प्रवेश किया। राजनीति के साथ ही सहकारी संस्थाओं में व्यापार के पहलू में कमी आने लगी और इसमें अच्छे सदस्यों की रुचि  कम होने लगी, इफको के प्रबंध निदेशक ने दर्शकों को बताया।

सरकार ने इस क्षेत्र में अपना काम किया है। पहले नेहरू ने विकास के एक उपकरण के रूप में देश के लिए सहकारी मॉडल पेश किया था और अगले शरद पवार है जिन्होंने हमें 97 संवैधानिक संशोधन दिया है, श्री अवस्थी ने कहा हम दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों के रूप में भारत को परिवर्तित कर सकते हैं।

इफको के प्रबंध निदेशक ने कहा कि हम सहकारिता से समस्याओं को सुलझा सकते है। उन्होंने मंडी के संदर्भ में कहा कि यहाँ किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा हैं। प्रोक्योर्मेंट, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, बीमा या सभी व्यापार को सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाना चाहिए, उन्होंने जोर देकर कहा।

इससे पहले अपने परिचयात्मक भाषण में एनसीयुआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा सहकारी समितियों को कम महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बजट में सहकारिता शब्द का उल्लेख तक नहीं करती है। इफको और कृभको उर्वरकों के साथ किसानों की सेवा में तत्पर हैं। सहकारिता किसानों के लिए बीज और अन्य कृषि आदानों की खरीद कर रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा कुत्सित व्यवहार किया जा रहा है, श्री यादव ने कहा।

कृषि राज्य मंत्री तारिक अनवर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें सहकारी समितियों के बारे में ज्यादा पता नहीं था। लेकिन उन्होंने समारोह में भाग लेने से बहुत कुछ सीखा है, उन्होंने कहा। मंत्री ने एनसीयुआई अध्यक्ष को सरकारी मदद का आश्वासन दिया और उन्होंने सहकारी समितियों के विशाल नेटवर्क को देखते हुए सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए सहकारी संगठनों के इस्तेमाल के विचार की सराहना की।

नेफेड के अध्यक्ष बिजेन्दर सिंह ने आभार व्यक्त किया।

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हमें सहकारी समितियों की ब्रांडिंग पर ध्यान केंद्रित करना होगा: गोल्ड

Posted on 21 October 2012 by ajayjha

भारत के दौरे पर आए आईसीए के महानिदेशक चार्ल्स गुल्ड ने गुरुवार को नई दिल्ली में भारत के शीर्ष सहकर्मियों के साथ एक बैठक में बतौर व्यवहार्य मॉडल सहकारी समितियों के ब्रांडिंग पर जोर देने की बात कही।

ऐसी स्थिति हो जहां हम सुबह में जब अखबार खोलें तब कहे कि सहकारी मॉडल इस सफल उद्यम के मूल में निहित है।

हमको मेहनत करनी है ताकि मीडिया दुनिया भर में सहकारी समितियों द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना करें, श्री गुल्ड कहा। उन्होंने दोहराया कि सहकारी वर्ष में ब्रांडिंग का सबसे ज्यादा महत्व है।

उन्होंने बताया कि कनाडा के क्यूबेक सिटी सहकारी सम्मेलन अक्टूबर के शुरू में आयोजित किया गया और कहा कि व्यापार प्रासंगिकता की वजह से वह एक अलग अनुभव था। व्यापार और सफलता एक सच्चे सहकारी के मूल में हैं।

उन्होंने कहा कि सहकारी समितियाँ वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने 300 सफल सहकारी समितियों की चर्चा कि जो उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण मशहूर है और इस प्रतिष्ठित सूची में आने के लिए इफको को बधाई दी।

श्री गुल्ड ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष को एक अंत बिंदु के रूप में लेने के खिलाफ चेतावनी दी है बल्कि इसे सहकारी क्षेत्र के लिए एक नए भविष्य की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। हमें इसे एक सहकारी दशक तक  विस्तार करने और सहकारी 2020 तक इसे वैश्विक केंद्र स्तर पर होना चाहिए, उन्होंने कहा।

गुल्ड ने सहकारी समितियों के लिए एक उज्जवल भविष्य भी देखते है, क्योंकि वर्चुअल सोशल साइटों से स्पष्ट है कि अगली पीढ़ी का व्यापक सहयोग की ओर झुकाव है।

इस अवसर पर उपस्थित शीर्ष सहकर्मियों में एनसीयुआई अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह, नेफेड अध्यक्ष बिजेन्दर सिंह, नेकॉफ अध्यक्ष रामइकबाल सिंह शामिल थे।

इफको के जी एन सक्सेना, फिशकॉपफेड और एनएफसीएल के प्रबंध निदेशक, नेफकब के कुछ अधिकारी भी उपस्थित थे। एनसीडीसी, नेफेड और एनसीसीएफ के प्रबंध निदेशक की त्रिमूर्ति जो  सभी आईएएस अधिकारी है भी गुल्ड की बात सुनने के लिए मौजूद थे।

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नेफेड की एजीएम में तूफान टला

Posted on 22 September 2012 by ajayjha

दिल्ली के एनसीयुआई सभागार में आयोजित नेफेड की सामान्य निकाय की बैठक में शेयर पूंजी के मुद्दे पर तूफान आते-आते टल गया। इस बैठक में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने एजेंडा नंबर-3 का कड़ा विरोध किया जिसके कारण नेफेड के बोर्ड अधिकारियों को इसे वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। एजेंडा नंबर-3, चालीस हजार से एक लाख रुपये की शेयर पूंजी जुटाने से संबंधित था।

नेफेड ने डॉ. बिजेन्दर सिंह की अध्यक्षता में 55वीं सामान्य निकाय की बैठक का आयोजन किया गया। समारोह में एनसीयुआई के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह, कृभको अध्यक्ष और नेफेड उपाध्यक्ष वी. आर. पटेल, इफको अध्यक्ष एन. पी. पटेल, एनसीसीएफ अध्यक्ष विरेन्द्र सिंह ने शामिल हुए।

डॉ. बिजेन्दर सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में वर्ष 2003-04 और वर्ष 2004-05 के दौरान कई पार्टियों के साथ किए गए कारोबार में हुए वित्तीय घाटे के बारे में जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वित्तीय घाटा ब्याज राशि को मिलाकर करीब 2000 करोड़ रुपए हो गया है। नेफेड ने उन पार्टियों के खिलाफ सीबीआई और आर्थिक अपराधिक शाखा में शिकायत और दीवानी मुकदमें दायर करवा रखे है इसके अलावा राशि के वसूली के लिए भी नेफेड प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि नेफेड ने कृषि मंत्रालय से वित्तीय समर्थन देने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था ताकि वर्तमान वित्तीय संकट से छुटकारा पाया जा सके। इस प्रस्ताव में लंबे समय का ऋण लेने के लिए 1200 करोड़ रु. की बैंक गारंटी और 9 वर्ष के लिए ब्याज मुक्त 920 करोड़ रु. की राशि दी जानी है जिसमें भारत सरकार की अंशपूंजी के रुप में 42.50 करोड़ रु. भी शामिल है। किंतु सभी अंशधारकों से समान रुप से राशि छोड़ने के संबंध में एसबीआई कैप्स द्वारा संशोधित प्रस्ताव जिसमें सरकार को कम राशि देना पड़ेगी। यह प्रस्ताव सरकार के सक्रिय विचाराधीन है।

उन्होंने कहा कि नेफेड के निदेशक मण्डल ने भारत सरकार की शर्ते और निंबधन पहले ही मान लिए गए है जिसके तहत नेफेड में भारत सरकार का 51% का भाग होगा। नेफेड ने भारत सरकार को आश्वासन दिया कि वह सरकार की आशाओं पर खरा उतरेगा और उन्हें विश्वास है कि भारत सरकार की सहायता और अपने कार्यों में सुधार करते हुए नेफेड अपनी पुरानी छवि को प्राप्त करेगा और किसानों की बेहतर सेवा में जुटा रहेगा।

सदस्य संघ और समितियों द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त अंशपूंजी के मामले में डॉ. सिंह ने कहा कि सदस्य संघ और समितियों द्वारा उठाई जा रही कठिनाईयों को देखते हुए निदेशक मण्डल ने विचार किया है कि अगले निदेशक मण्डल के गठन की प्रक्रिया आरंभ होने तक सदस्य संघों और समितियों को अतिरिक्त अंशपूंजी जमा कराने का समय बढ़ा दिया जाए।

वर्ष 2003-04 और वर्ष 2004-05 के दौरान कई पार्टियों के साथ किए गए कारोबार के संदर्भ में दो जांच रिपोर्टों के आधार पर सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक ने कुछ निदेशकों, पूर्व निदेशकों, कानूनी उत्ताधिकारियों, कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों और भारत सरकार की प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों के विरुद्ध बहुराज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम 2002 की धारा 83(2) के अंतर्गत रिकवरी के आदेश दिए गए थे। इस मामले में वर्तमान में केंद्रीय पंजीयक ने सभी फैसलों को रद्द करके इस पर पुनः विचार करने को कहा है, डॉ. सिंह ने कहा।

डॉ. सिंह ने नेफेड के वर्तमान घाटे को देखते हुए सदस्य संघ और समितियों से इस वर्ष भी अपना डेविडेंड छोड़ने को कहा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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नेफेड: शेयर मूल्य में वृद्धि पर भ्रम कायम

Posted on 07 August 2012 by ajayjha

नेफेड शेयर धारक यह निर्णय नही कर पा रहे है कि नेफेड के साथ वे अपने संबंधों को जारी रखे या नहीं। उनको लगता है कि नेफेड डूबती नाव है।

नेफेड  ने इस बीच शेयर कीमत में 40,000 रुपये से 1 लाख तक की बढ़ोत्तरी करने का फैसला किया है। हालांकि वृद्धि की घोषणा कुछ साल पहले की गई थी, लेकिन अब बोर्ड कठोरता के साथ इस पर अमल करना चाह रहा है।

एजीएम में भाग लेने के लिए केवल वही डेलीगेट्स पात्र हैं जो कि दांव लगाने के लिए तैयार हैं, नेफेड अध्यक्ष बिजेन्दर सिंह ने भारतीय सहकारिता से बात करते हुए कहा। यह निर्णय बोर्ड द्वारा कुछ साल पहले ही ले लिया गया था और यह कोई नई बात नहीं है, श्री सिंह ने कहा।

शेयर धारकों को यह सवाल सता रहा है कि ऐसे सहकारी उद्यम में निवेश करना ठीक होगा जिसमें सुधार का कोई संकेत नहीं दिखता है। सरकार ने इस सहकारिता संगठन को सहायता देना बंद कर दिया जिसके कारण यहाँ अनिश्चितता का वातावरण कायम है।

भारतीय सहकारिता से बातचीत में नेफेड अध्यक्ष बिजेन्दर सिंह ने कहा कि सरकार अध्यक्ष की शक्तियों में कटौती चाहती थी, जिसे हमने स्वीकार किया।

यह पूछे जाने पर कि वर्तमान संकट से बाहर निकालने के लिए सरकार आगे बढ़कर मदद क्यों नहीं कर रही है तब बिजेन्दर सिंह ने कहा कि यह प्रश्न सरकार से पूछिए हमसें नही।

भारतीय सहकारिता को पता चला है कि सरकार देय वसूली के मुद्दे पर कानूनी समाधान का इंतज़ार कर रही है, केन्द्रीय रजिस्ट्रार कोर्ट में बकाएदारों पर 1400 करोड़ रुपये के टाई अप में घाटे के मद्देनजर आरोप लगे थे। नेफेड को उसके कुछ निर्देशकों के गलत हरकत के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

शेयर धारकों के मन में कई उलझनें हैं, नेफेड द्वारा दिया गया लाभांश 5 से 7 प्रतिशत है जो कि उन्हें कृषि कॉपरेटिव से जोड़े रखने के लिए पर्याप्त आकर्षण नही है, एक शेयर धारक ने भारतीय सहकारिता को बताया।

इस बीच नेफेड के कई विरोधियों ने अफवाह फैला रखी है कि नेफेड पुराने प्रतिनिधियों या नेफेड के शेयर धारकों के माध्यम से अपनी टाई अप घाटे को कवर करने की कोशिश कर रहा है।

बिजेन्दर सिंह ने इन अफवाहों को बचकाना कहकर खारिज कर दिया, नेफेड में नुकसान शेयर धारकों के माध्यम से कवर नहीं किया जा सकता है। सिर्फ सरकार नेफेड को वर्तमान परेशानी से बाहर निकाल सकती है, उन्होंने जोर देकर कहा।

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इफको: अंतर्राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन सम्पन्न

Posted on 06 July 2012 by Manoj

अंतर्राष्ट्रीय कॉपरेटिव कांफ्रेस का समापन समारोह आज दिल्ली के एनसीयुआई ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। एनसीयुआई के सीईओ डॉ. दिनेश के संबोधन से सम्मेलन के कार्यक्रम की शुरुआत हुई. मंच पर गणमान्य वक्ता और हॉल में सुधि श्रोता मौजूद थे. दरअसल बहस के लिए एक उपयुक्त वातावरण मौजूद था.

कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता नेफेड के चेयरमैन डॉ. बिजेन्दर सिंह ने की। इंडियन कॉपरेटिव नेटवर्क फॉर वुमैन, चेन्नई की अध्यक्षा डॉ. जया अरुणांचलम ने आरम्भ में सहकारिता में नारी सशक्तिकरण पर एक विशिष्ट परिचर्चा शुरु की। डॉ. अरुणांचलम ने विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अन्य बातों के अलावा सहकारी संस्थाओं से अपील की कि वे ऐसे तरीके और साधन सुझाएं जिससे कि भारतीय महिलाएं देश की वर्तमान योजनाओं के संदर्भ में अपने सामर्थ्य और विचारों को सिद्ध कर सकें।

मलेशिया की श्रीमती जैन्नुद्दीन ने लैंगिक समानता को प्रोत्साहन और बढ़ावा देने में सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मलेशिया की सरकार ने स्वास्थ्य और बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं को ज्यादा तवज्जो देने वाली नीतियां बनाई हैं। इस तरह से वहाँ सहकारिता के मूल सिद्धांतों को लागू किया जा रहा है।

प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रहे डॉ. बिजेन्दर सिंह ने भी महिलाओं की दुर्दशा पर दुख व्यक्त किया और महिला सशक्तिकरण के लिए उचित उपाय करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्रकी अध्यक्षता श्री प्रकाश लोनारे ने की। नेफकब के अध्यक्ष श्री एच.के. पाटिल  ने बैंकों की दुर्दशा पर दुख व्यक्त किया। श्री पाटिल ने देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में सहकारिता को महत्वपूर्ण बताया।

भारत सरकार में पूर्व सचिव श्री जे.एन. श्रीवास्तव ने सहकारी संस्थाओं के विकास के संदर्भ में मानवी संसाधन की विशिष्ट भूमिका पर बल दिया.  श्री श्रीवास्तव ने सहकारी क्षेत्र में उत्तम तकनीकी के प्रयोग को तेजी से बढाने की पुरजोर वकालत की।

श्री प्रवेश शर्मा, प्रबंध निदेशक, एसएफएसी ने किसानों के समग्र विकास के लिए संस्थाओं के निर्माण पर जोर दिया। श्री शर्मा के मुताबिक सत्तर के दशक में हरित क्रांति को साकार करने में सहकारी संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

समारोह के अंतिम सत्र की अध्यक्षता श्री चरणदास महंत ने की। इस सत्र  में श्री आर के तिवारी, संयुक्त सचिव ने भारतीय सहकारिता के विकास के लिए नीतिगत सरकारी कदम उठाने पर जोर दिया। श्री तिवारी ने कहा कि यह आयोजन एक मील का पत्थर है। श्री तिवारी ने भारत की आर्थिक दशा को सुधारने में सहकारिता को महत्वपूर्ण कारण बताया।

श्री सुरेश प्रभु, पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ धन्यवाद का पात्र है। उन्होंने कहा कि आम लोगों के सशक्तिकरण के लिए सहकारिता के मूल्यों और सिद्धांतो का उपयोग जरुरी है। गरीब और गरीब न हो तथा अमीर और अधिक अमीर न हो - यह सहकारिता के माध्यम से ही संभव है।

श्री रॉबी टुलुस, क्षेत्रीय निदेशक, आईसीए, एशिया-प्रशांत, ने सहकारिता की आवश्यकता और वर्तमान में सहकारिता के रोल पर प्रकाश डाला। श्री टुलुस ने बदलती विश्व अर्थव्यवस्था में सहकारिता की भूमिका को भी रेखांकित किया।

सम्मेलन कृषि एवं खाद्य प्रसंसकरण मंत्री श्री चरण दास के समापन संबोधन से सम्पन्न हुआ.

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धान खरीद पर अभी रोक

Posted on 26 June 2012 by dipakkumar

यह देखते हुए कि राज्य में भंडारण जगह की कमी है, उत्तर प्रदेश सरकार ने जून के करीब गेहूं की खरीद पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।

नेफेड और एनसीसीएफ सहित अनाज की खरीद में शामिल सात एजेंसियाँ हैं, जिन्हें अभी रोक दिया गया है।

सरकार ने प्रादेशिक सहकारी संघ को भी देरी किए बिना किसानों से गेहूं खरीद बंद करने के लिए कहा है।

खुले स्थान में पड़े अनाज की सुरक्षा के बारे में चिंतित सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अनाज का अधिक से अधिक वितरण करने का निर्णय लिया है।

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एनसीयुआई को गहन आत्मविश्लेषण की जरुरत

Posted on 06 June 2012 by ajayjha

इन दिनों भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ, देश में अपने सदस्यों के बीच सदस्यता संतुष्टि सर्वेक्षण कर रहा है। सभी सहकारी महासंघों के सदस्यों को प्रतिक्रिया के लिए प्रश्नावली का एक नमूना भेजा गया है।

जैसा कि पहले भी बताया गया है कि एनसीयुआई का अस्तित्व संकट में है।

सर्वेक्षण एक आत्मविश्लेषण का एक प्रयास है। एनसीयुआई को पिछले कुछ वर्षों से सरकार की ओर से असहयोग और घोटालों के कारण विश्वास की कमी का सामना करना पड़ रहा है, यही कारण है कि इस तरह का सर्वेक्षण किया जा रहा है।

सर्वेक्षण में इस तरह के  सवाल पूछे गए है: क्या आपको लगता है कि एनसीयुआई की गतिविधियाँ आपकी आवश्यकताओं के मुताबिक हैं, आपका एनसीयुआई के साथ आपकी संतुष्टि का स्तर क्या है, सरकार की नीति तैयार करने में एनसीयुआई की भूमिका को आप कैसे देखते हैं, पिछले एक वर्ष में एनसीयुआई का प्रदर्शन कैसा रहा?

यह स्पष्ट है कि शीर्ष संगठन बदली हुई स्थिति के साथ तालमेल की कोशिश में है। वह यह जानता है कि  उसको अपने स्वयं के बल पर ही अस्तित्व में रहना है। उसकी ताकत सहकारी महासंघों के सदस्य है जिनकी कुल संख्या 204 है।

उसकी सूची में शामिल सदस्य,

नेशनल फेडरेशन-17, बहु राज्य सहकारी-सोसायटी 38, राज्य सहकारी संघों-31, राज्य सहकारी बैंकों-18, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण बैंक-14, विपणन संघ-16, उपभोक्ता फेडरेशन-8, हाउसिंग फेडरेशन-10, शहरी फेडरेशन-10, जनजातीय फेडरेशन-2, अन्य फेडरेशन-23 और विविध-17.

एनसीयुआई अपने सदस्यों को उतनी गंभीरता से नही ले रहा है जितनी गंभीरता से लेना चाहिए। उनके बिना देश में सहकारी आंदोलन को कायम करने का सपना देखने का मतलब , सरकार की बैसाखी पर खड़े होना है।

204 सहकारी महासंघों का एक साथ होना एक उपलब्धि है और यह एनसीयुआई और सहकारी आंदोलन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।

सहकारी आंदोलन की सफलता की कहानी अहम व्यक्तियों के कारण है ना कि एनसीयुआई के कारण ।

जब वह खुद को ठीक और सदस्यों की मदद से अपने अस्तित्व को मजबूत बनाकर रखेगा सहकारी आंदोलन को उतना ही बल मिलेगा। सरकार से वेतन और भत्तों के द्वारा जीवित रहने के लिए मदद मिल सकती है लेकिन यह स्थिति आंदोलन आगे नहीं ले जा सकती। केवल सहकारी कार्यकर्ता ही इस काम को कर सकते हैं।

 

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