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सहकारी कांग्रेस से बेहतर छवि बनाने में मदद मिलेगी: चन्द्र पाल

Posted on 07 June 2013 by ajayjha

एनसीयूआई सहकारी कांग्रेस के प्रारंभ होने की घोषणा करने के लिए गुरुवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। संवाददाताओं के संबोधित करते हुए एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह ने कहा कि सहकारिता आन्दोलन की शीर्षस्थ संस्था भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयुआई) 16वें भारतीय सहकारी महासम्मेलन का आयोजन दिनांक 25-26 जून, 2013 को नई दिल्ली में करने जा रही है।

इस महासम्मेलन का उद्घाटन भारत के महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी दिनांक 25 जून, 2013 को दोपहर 12.00 बजे सीरी फोर्ट सभागार, अगस्त क्रांति मार्ग, नई दिल्ली में करेंगे तथा इसकी अध्यक्षता केन्द्रीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री शरद पवार करेंगे। कांग्रेस में सहकारी क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा और क्षेत्र में आने वाली आकस्मिक समस्याओं के मद्देनजर प्रभावी नीति के लिए दिशा निर्देशों के ऊपर चर्चा की जाएगी।

“विश्व के निर्माण में सहकारी उद्यम” इस महासम्मेलन का मुख्य विषय होगा। इस दो दिन के महासम्मेलन में देश-विदेश के लगभग 2000 प्रतिनिधि और ओडिशा के माननीय राज्यपाल एससी जमीर, उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल अजीज कुरैशी, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भाग लेंगे। chandrapal - dinesh

इसके अलावा मेघालय के मुख्य मंत्री डा. कुकुल संगमा, भारत सरकार से कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री तारिक अनवर, आंध्र प्रदेश के सहकारिता मंत्री के.वी.के. रेड्डी, असम के सहकारिता मंत्री सिद्धिकी अहमद, मिजोरम के सहकारिता मंत्री जे.एच. रोथुमा, आईसीए के उपाध्यक्ष ली चुनसेंग सम्मानित अतिथि होंगे।

आईसीए के उपाध्यक्ष इस अवसर पर सम्माननीय अतिथि होंगे। विभिन्न सहकारिता क्षेत्रों की सफलता की कहानी एवं उपलब्धियों पर प्रकाशन, सूचना के अधिकार पर प्रकाशन एवं स्मारिका का विमोचन इस अवसर पर मुख्य सुर्खियां रहेंगी। इन दो दिनों में आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिसमें विषय विशेषज्ञ सहकारी क्षेत्र के समक्ष आए विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करेंगे इनमें विभिन्न क्षेत्रों से सबंधित जो महत्वूपर्ण अनुशंसाएं उभर कर आएंगी निश्चित रूप से यह भविष्य में देश के सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए प्रभावशाली नीति निर्देशकाओं के रूप में सिद्ध होंगी।

भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा आयोजित प्रेस कान्फ्रेस को सम्बोधित करते हुए भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. चन्द्रपाल सिंह ने कहा कि यह सहकारी महासम्मेलन ऐसे समय पर हो रहा है जबकि बाजार अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा के लिए सहकारिता बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।

6 लाख से भी अधिक सहकारी समितियों के साथ देश का सहकारिता आन्दोलन विश्व का सबसे बड़ा जन आन्दोलन है। सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि-ऋण, आवास, चीनी, दुग्ध, परिवहन, मत्स्य एवं उर्वरक आदि में सहकारिता आन्दोलन ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दुग्ध सहकारिताओं के महत्वपूर्ण योगदान के फलस्वरूप भारत आज विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है।

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एनसीसीटी ने पेशेवर लेखा पर जोर दिया

Posted on 04 June 2013 by Manoj

राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (एनसीसीटी) ने अपने नई दिल्ली में स्थित मुख्यालय में वित्तीय प्रबंधन और लेखा के सिद्धांतों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।

समारोह में श्री ए.के. दास, सचिव, कृषि और सहकारिता आईएफडी विभाग, भारत सरकार, डॉ. दिनेश, महानिदेशक, एनसीसीटी और श्री मोहन कुमार मिश्रा, सचिव, एनसीसीटी, भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

कार्यक्रम का आयोजन लेखांकन मामलों में कुशल वित्तीय प्रशासन के साथ आरआईसीएमएस / आईसीएमएस में काम कर रहे कर्मचारियों के लेखा क्षमता के स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था।

श्री मोहन कुमार मिश्रा, सचिव, एनसीसीटी ने डीओएसी से आए सम्मानित अतिथि का स्वागत किया और इस मुद्दे के बारे में उन्हें जानकारी दी। श्री ए. के. दास ने दैनिक खातों और वार्षिक लेखा की तैयारी करने के लिए सही प्रस्तुति करने पर बल दिया।

डॉ. दिनेश मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एनसीयुआई और महानिदेशक एनसीसीटी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में एनसीसीटी प्रशिक्षण इकाइयों के स्तर पर इस तरह के कार्यक्रमों की आवश्यकता के बारे में बताया। श्री बी.एस. रोहिल्ला, निदेशक (वित्त), एनसीसीटी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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इफको: एजीएम ने एमडी के उपहार लौटने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया

Posted on 31 May 2013 by ajayjha

गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित इफको की 40 वीं वार्षिक आम बैठक ने एमडी और ज्वाइंट एमडी को पिछली एजीएम द्वारा उन्हें उपहार में दिए गए घरों को त्यागने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

इस मामले में मीडिया में आ रही खबरों के खिलाफ सदस्यों के बीच व्यापक रोष था। सदस्यों द्वारा एनसीयूआई के खचाखच भरे सभागार में इफको के प्रबंध निदेशक यूएस अवस्थी के पक्ष में नारे लगाए गए।

इसके अलावा यह एजीएम इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसमें पिछले वर्ष की बैठक में इफको के प्रबंध निदेशक और संयुक्त प्रबंध निदेशक को आवंटित मकानों के मुद्दे पर एक स्टैंड लिया जाना था। सदस्यों ने प्रबंध निदेशक यूएस अवस्थी और संयुक्त प्रबंध निदेशक को बेहिचक समर्थन की घोषणा की और उनसे पिछली एजीएम में दिए गए उपहारों को स्वीकार करने के लिए आह्वान किया।

awasthiji walking (365-300)राजस्थान से प्रतिनिधि मांगी लाल डांगा ने कहा कि वर्ष 92-93 से मैंने अवस्थीजी को काम करते देखा है और मुझे लगता है कि उन्होंने सफलता के जरिए इफको के प्रत्येक सदस्य को गौरवान्वित किया है। हमने बदले में उन्हें जो दिया वह अल्प पारिश्रमिक है। हम उपहार लौटाने के उनके प्रस्ताव को अस्वीकार करते है डांगा ने सदस्यों से तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कहा।

गाजीपुर से एक प्रतिनिधि विजय शंकर राय ने कहा कि “एजीएम सर्वोच्च है और हमें अपने निर्णय पर किसी भी टॉम डिक और हैरी पर ध्यान नहीं देना चाहिए” मीडिया को इंगित करते हुए उन्होंने कहा।

पंजाब से मंजीत सिंह भरवाल ने कहा कि अवस्थीजी ईमानदारी का पर्याय बन गए है। वांछित है कि वह कुछ ही समय में अरबों कमा सकते थे। पांच घरों का उपहार भी अवस्थीजी के साफ चरित्र के लिए कम है।

एक प्रतिनिधि चंद्र कांत द्विवेदी ने इफको के प्रबंध निदेशक यूएस अवस्थी को याद दिलाया कि एजीएम का निर्णय सर्वोच्च है। “आप इसे खारिज नहीं कर सकते हैं यह सभी के लिए बाध्य है” उन्होंने अवस्थीजी के उपहार वापस किए जाने की बात पर चर्चा करते हुए कहा।

एस एस पाटिल, कर्नाटक से आरजीबी सदस्य, वीके थुमुर, पूर्व सांसद और कई अन्य लोग प्रबंध निदेशक और संयुक्त प्रबंध निदेशक को दिये गए उपहार का निर्णय अपरिवर्तनीय हैं। एजीएम इस भावनात्मक मुद्दे पर गंभीर थी।

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सभी सदस्यों को एजीएम के निर्णय पर इफको के एमडी की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा तीव्रता से थी और अंततः अवस्थीजी बात करने के लिए मजबूर हो गए। आप सभी की भावनाओं ने मेरे दिल को गहराई से छुआ हैं। हम सभी आपके सेवक हैं और इस तरह से आपकी अवज्ञा करने का हमें कोई अधिकार नहीं है। मैं भगवान राम नहीं हूँ, लेकिन मैं भी परीक्षा पास करना चाहता था, उन्होंने पिन ड्रॉप साइलेंस के बीच इकट्ठे सदस्यों से कहा।

अपने संक्षिप्त भाषण में अवस्थीजी ने भी सेवा के आधार पर बल दिया और कहा कि इसमें सेवारत किसान और सेवारत खेती जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं।

इफको ने 1,107 करोड़ रुपये का उच्चतम मुनाफा हासिल किया है, जिससे इकट्ठी भीड़ में उत्साह की भावना थी। दरभंगा से एक प्रतिनिधि गोपाल सारावगी ने भारतीय सहकारिता डॉट कॉम से कहा कि “हम यूएस अवस्थी जैसे पेशेवरों हाथों में सुरक्षित हैं।
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इफको ने एनसीयूआई को 7.71 करोड़ रूपए दिए

Posted on 30 May 2013 by dipakkumar

इफको ने पिछले शनिवार को शिक्षा कोष के लिए अपनी ओर से भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) को 7.71 करोड़ रुपये का चेक दिया।

यह घोषणा करते हुए इफको के निदेशक डॉ. जीएन सक्सेना ने कहा कि “पिछले साल हमने देय राशि का भुगतान दो किश्तों में किया था, इसके विपरीत इस साल एक ही झटके में इस भुगतान कर दिया है।” हमने सहकारी समितियों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को पूरा किया और बहु राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम का सम्मान किया, उन्होंने कहा।

एमएससीएस 2002 के अनुसार बहु राज्य सहकारी समितियों को सहकारी शिक्षा और प्रशिक्षण के विकास के लिए शिक्षा कोष को अपने लाभ का एक निश्चित प्रतिशत योगदान करना होता है।

इफको का योगदान आ चुका है और अब कृभको भी जल्द ही इसका पालन करेंगे, एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी डॉ. दिनेश ने भारतीय सहकारिता डॉट कॉम को बताते हुए इस बात की पुष्टि की।

लेकिन कई सहकारी समितियाँ बड़ा मुनाफा बनाने के बावजूद अपनी बकाया राशि का भुगतान नही कर रहे हैं। इस तरह के मामले में मुंबई स्थित प्रमुख शहरी सहकारी बैंक सारस्वत बैंक है। डॉ. दिनेश ने इस संदर्भ में चेयरमैन एकनाथ ठाकुर को पत्र लिखा है और अब वह उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे है।

लेकिन भारतीय सहकारिता डॉट कॉम को पता चला है कि सारस्वत बैंक ने एनसीयूआई को लंबे समय से लंबित बकाया राशि का भुगतान बंद कर दिया है। पिछले केन्द्रीय रजिस्ट्रार आर.के. तिवारी ने दोषी शहरी सहकारी बैंकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की बात कही है।

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एनसीयूआई: सहकारी कांग्रेस की तारीख में मामूली बदलाव

Posted on 13 May 2013 by ajayjha

सहकारी कांग्रेस में देश के उच्च रैंकिंग वीआईपी सहित राष्ट्रपति की भागीदारी की वजह से कांग्रेस की तारीख में एक मामूली सा बदलाव किया गया है। अब सहकारी कांग्रेस 18 जून की बजाय 25 जून को आयोजित किया जाएगा, एनसीयूआई के अध्यक्ष डॉ. चंद्र पाल सिंह ने बुधवार को भारतीय सहकारिता डॉट कॉम को सूचित करते हुए बताया।

भारतीय सहकारिता डॉट कॉम को एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी डॉ. दिनेश से भी एक मेल प्राप्त हुआ है। मेल के अंतर्गत यह बताया गया है कि हमें यह सूचित करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि भारत के माननीय राष्ट्रपति ने 25 जून 2013 को दोपहर में 12.00 बजे सिरी फोर्ट सभागार, नई दिल्ली में 16 वीं भारतीय सहकारी कांग्रेस का उद्घाटन करने के लिए अपनी सहमति दे दी है।

पहले तारीख 18 जून थी लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने बताया कि वह इस दिनांक पर उपलब्ध नहीं है। अंत में एक तारीख भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी, कृषि मंत्री शरद पवार की उपलब्धता के साथ स्थल (श्री फोर्ट ऑडिटोरियम) के लिए अंकित किया गया है।

यह विशाल समारोह दिनाँक 25 -26 यानी दो दिन तक जारी रहेगा और इसमें पूरे भारत और विदेश से लगभग 1,500 से 2,000 प्रतिनिधि भाग लेंगे।

कांग्रेस में सहकारी क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा और इस क्षेत्र में पहले से व्याप्त आकस्मिक समस्याओं के मद्देनजर नीति के दिशा निर्देशों पर चर्चा की जाएगी। कांग्रेस की थीम ‘सहकारी उद्यम से एक बेहतर दुनिया बनाएँ है।

मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और विभिन्न राज्यों के सहकारिता मंत्रियों के इस अवसर पर आने की संभावना हैं। कांग्रेस में सभी सहकारी सेक्टोरल क्षेत्रों में फैली सफलता की कहानी पर प्रकाश डाला जाएगा और सहकारिता में सूचना के अधिकार पर एक किताब के प्रकाशन को रिलीज किया जाएगा।

चन्द्र पाल सिंह, अध्यक्ष, एनसीयूआई ने कहा कि यह कांग्रेस भारत में सहकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी छवि का निर्माण करेगी।

देश में 6 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं। सहकारी समितियों ने गांवों को 100% और ग्रामीणों को 75% कवर कर रखा है। सहकारी समितियों की कृषि ऋण, आवास, चीनी, दूध, पर्यटन, मत्स्य, कताई, पर्यटन, उर्वरक, आदि जैसे सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के लगभग सभी क्षेत्रों में एक मजबूत उपस्थिति है।

दूध सहकारी समितियों के महत्वपूर्ण योगदान के कारण भारत विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। अमूल, इफको और कृभको सहकारी क्षेत्र में सबसे बड़ी सफलता की कहानी ह

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आईसीए बोर्ड: सहकारी नेता इस बार चुनाव के लिए तैयार

Posted on 02 May 2013 by ajayjha

भारतीय सहकारी नेताओं ने इस वर्ष अक्टूबर से नवंबर के लिए निर्धारित आईसीए बोर्ड के चुनाव के लिए खुद को तैयार करने में लगे हुए हैं। भारतीय सहकारिता डॉट कॉम से बातचीत में शीर्ष सहकारी समिति एनसीयूआई के अध्यक्ष ने आगामी चुनाव पर किसी भी प्रकार का फैसला केवल जुलाई के बाद लिए जाने की बात कही।

“अभी उस चुनाव में काफी समय बाकी है और हम मई में अंतर्राष्ट्रीय सहकारी कांग्रेस के आयोजन में व्यस्त रहे हैं”, डॉ. चंद्र पाल सिंह यादव ने कहा।

लेकिन एनसीयूआई अध्यक्ष ने आईसीए बोर्ड के लिए एक आम सहमति के उम्मीदवार होने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत में सहकारिता आंदोलन बहुत मजबूत है और दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी समिति में हमारे प्रतिनिधि की आवश्यकता है, उन्होंने कहा।

भारत ने 2011 में मेक्सिको में कैनकन के चुनाव में ईरान के लिए आईसीए बोर्ड की सदस्यता को खो दिया। इस पद के लिए टकराहट होती नजर आ रही थी, जिसमें इफको नामांकित श्रीनिवास गौड़ा और एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह के बीच मुकाबला की स्थिति बनी हुई थी।

हालांकि घटनाओं के नाटकीय मोड़ में चन्द्र पाल ने दौड़ से अपने को वापस ले लिया था लेकिन गौड़ा के नेफेड घोटाले के कारण चुनाव में ईरान की जीत हुई।

बुरे अनुभव को दोहराने से सहकारी नेता बचने की कोशिश कर रहे है और पूरी सावधानी बरत रहे है।” किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले, हम सभी क्षेत्रों के नेताओं से सलाह लेंगे”, चन्द्र पाल ने भारतीय सहकारिता डॉट कॉम को कहा।

“अभी लंबा समय है और तब तक बहुत पानी नदी में प्रवाहित हो गया रहेगा”, श्री यू एस अवस्थी, इफको के प्रबंध निदेशक ने कहा जब भारतीय सहकारी ने आईसीए बोर्ड के चुनाव के लिए उनकी तैयारियों पता करने के लिए उससे संपर्क किया। इफको ने पिछले आईसीए बोर्ड पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

कॉपरेटर्स के एक क्रॉस सेक्शन ने भारतीय सहकारिता को बताया कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी में चन्द्र पाल सिंह यादव की भागीदारी बढ़ने के साथ ही वह इफको नामांकित व्यक्ति के लिए खुला मैदान छोड़ सकते है। अगले लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा जारी सूची में उनके नाम की घोषणा की गई है।

लेकिन श्री सिंह ने राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण सहकारी समितियों में किसी भी तरह से कम भूमिका निभाने से इनकार किया है। बल्कि मुझे लगता है कि अगर मैं लोकसभा के लिए चुना गया तो सहकारी क्षेत्र की समस्याओं को हल करने में अधिक प्रभावी और सहायक हो पाउँगा, उन्होंने भारतीय सहकारिता को बताया।

अध्यक्ष सहित आईसीए के बोर्ड पर बीस सदस्य हैं। कोई भी देश कितना बड़ा है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, बोर्ड में सिर्फ एक सदस्य हो सकता है। आमसभा के प्रतिनिधियों की संख्या भिन्न हो सकती हैं, लेकिन कभी भी किसी देश से 25 से अधिक डेलीगेट नही हो सकते है। भारत की आम सभा में 12 प्रतिनिधि है।

भारतीय सहकारी डॉट कॉम पहले लिखा था कि वैश्विक सहकारी आंदोलन के मामले में भारत सबसे आगे है, प्रयास करके आम सहमति के उम्मीदवार को चुना जाना चाहिए।

भारतीय सहकारी डॉट कॉम से बातचीत में भी आईसीए एशिया प्रशांत क्षेत्रीय निदेशक डॉ. चान हो चोई ने यह देश के लिए कहा था न कि व्यक्तिगत मामलों के लिए।

आईसीए सहकारी दुनिया भर में कार्य करते हुए एकजुट करने का प्रतिनिधित्व करती है यह एक स्वतंत्र गैर सरकारी संगठन है।

1895 में स्थापित आईसीए के अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में सक्रिय 94 देशों से 254 सदस्य संगठन है।

यह एक साथ सहकारी दुनिया भर में लगभग एक अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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आईसीए: बैठक में डेम पॉलीन का प्रभाव दिखा

Posted on 26 April 2013 by ajayjha

आईसीए की अध्यक्षा डेम पॉलीन ग्रीन के साथ बातचीत करने का एक अनूठा अवसर बुधवार को नई दिल्ली में शीर्ष सहकारी संगठन एनसीयूआई द्वारा आयोजित एक समारोह में मिला। सहकारी क्षेत्रों के सहकार्यों ने समारोह को सफल बनाने के लिए बड़ी संख्या में भाग लिया।

पॉलीन ग्रीन ने सहकारी दशक के लिए आईसीए ब्लू प्रिंट को लागू करने के लिए भारत में सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों का आह्वान किया यह सहकारी समितियों के एक अरब सदस्यों की आवाज है जिसे वैश्विक स्तर पर सुना जा रहा है।

ब्लू प्रिंट सहकारी समितियों की मजबूत पहचान विकसित करने पर जोर देती है ताकि वह 2020 तक सबसे तेजी से उभरते व्यापार मॉडल के रूप में स्थापित हो। उन्होंने दिल्ली में बुधवार को भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा आयोजित एक स्वागत बैठक को सम्बोधित किया। बैठक में इफको, कृभको, नेफकब, एनसीडीसी आदि राष्ट्रीय स्तर के सहकारी संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।pauline-talking-150x150

जी-20 प्रतिनिधिमंडल में सहकारी प्रतिनिधियों को सम्मिलित किया जाए इसके लिए संबंधित सरकारों के साथ लॉबी करने की जरूरत है क्योंकि दुनिया के आर्थिक मंच सहकारी समितियों की ताकत को पहचानते है। एक अरब लोग सहकारी समितियों से जुड़े हुए हैं और इतनी बड़ी जनसंख्या को सुना जाना चाहिए, उन्होंने कहा।

15 मिनट के शानदार शिक्षाप्रद कैप्सूल के जरिए युवाओं के बीच सहकारी शिक्षा को लोकप्रिय बनाना इंटरनेट के युग में संभव हो गया हैं, उन्होंने कहा। उन्होंने कहा कि सक्रिय सदस्यता नीति सहकारी समितियों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।mmmm-300x186

इस संबंध में उन्होंने भारतीय सहकार्यों को अच्छी प्रौद्योगिकी के साथ सक्रिय सदस्यता नीति के माध्यम से अपनी सहकारी समितियों को सक्रिय करने के लिए कहा। उन्होंने आईसीए सहकारी समितियों के मुद्दों के लिए लॉबी करने के लिए सांसदों की वैश्विक नेटवर्क बनाने की प्रक्रिया को भी रेखांकित किया। ‘राजनीतिक समर्थन जुटाना सहकारी क्षेत्र की सबसे कमजोर कड़ी है, उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा कि वह 2012 के सहकारिता के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के विचार और ऊर्जा को आगे ले जाने का विश्वास जताया। यह हमें एकता की एक अद्वितीय भावना देती है और हम इसे 2020 तक अर्थव्यवस्था का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ मॉडल बनाकर दुनिया को दिखाएंगे, उन्होंने कहा।

इस समारोह में शिवाजी राव पाटिल और जी एच अमीन जैसे वरिष्ठ व्यक्ति भी शामिल थे जिन्होंने भारतीय सहकर्मियों से भारत में सहकारी समितियों की चुनौतियों को साझा किया। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. चंद्र पाल सिंह,अध्यक्ष, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ ने कहा कि सहकारी संस्था के निर्माण को मौलिक अधिकार प्रदान करने वाले संविधान का संशोधित अधिनियम देश में सहकारी क्षेत्र के भविष्य के विकास के लिए आंखे खोलने वाला है।

अंतर्राष्ट्रीय सहकारी एलायंस (आईसीए), दुनिया भर में सहकारी समितियों की सेवा के लिए 1895 में स्थापित एक स्वतंत्र, गैर सरकारी संगठन है।crowd-new

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दिल्ली में आईसीए अध्यक्ष पॉलीन

Posted on 24 April 2013 by ajayjha

अंतर्राष्ट्रीय सहकारी एलायंस आईसीए के प्रभावशाली अध्यक्षा डेम पॉलीन ग्रीन सोमवार से भारत की यात्रा पर है। वह रविवार देर शाम नई दिल्ली में आई।

श्रीमती पॉलीन यूरोपीय संसद की पूर्व श्रम एवं सहकारी सदस्या है जो कि देश के सहकारी नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करेंगी।

सोमवार को वह दोपहर में इफको के मुख्यालय का दौरा करेंगी जहाँ वह प्रबंध निदेशक यूएस अवस्थी के साथ शिष्टाचार भेंट करेंगी।

इफको के सूत्रों के अनुसार रात का खाना सोमवार शाम को ताज मानसिंह में उनके सम्मान में आयोजित किया गया है जहाँ 22 नंबर चयनित कॉपरेटर्स को वैश्विक सहकारी नेताओं के साथ बातचीत करने का मौका दिया जाएगा।

अगले दिन वह मंगलवार को इफको की खाद संयंत्रों में से एक अहमदाबाद के पास कलोल की यात्रा करने के लिए निर्धारित है।

पॉलीन की 24 अप्रैल को एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह और अन्य लोगों से मिलने की योजना है।

दिल्ली में स्थित आईसीए क्षेत्रीय कार्यालय में वह स्थानीय अधिकारियों के साथ दामुस फंड के विषय में बातचीत करना चाहती हैं। आईसीए का इस कोष से निर्मित क्षेत्रीय कार्यालय नोएडा में होगा।

1948 में जन्मी डेम पॉलीन ग्रीन ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से अध्ययन किया है और बाद में वह यूरोपीय समाजवादियों की पार्टी के संसदीय समूह की नेता चुनी गई।

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एनसीयूआई ने सहकारी कांग्रेस की तारीख तय की

Posted on 20 April 2013 by ajayjha

भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने अंततः भारतीय सहकारी कांग्रेस के उद्घाटन की तारीख निर्धारित कर दी है। वह सिरी फोर्ट सभागार में 18 जून, 2013 को कांग्रेस का उद्घाटन करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार कांग्रेस की अध्यक्षता करेंगे।

कांग्रेस में सहकारी क्षेत्र की प्रगति और इस क्षेत्र की आकस्मिक समस्याओं के लिए दिशा निर्देशों की समीक्षा की जाएगी। कांग्रेस की थीम सहकारी उद्यम से बेहतर दुनिया का निर्माण करना है। कांग्रेस में विदेश से और देश भर से करीब 2000 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लिए जाने की संभावना है, ऐसा एनसीयूआई की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है।

रिलीज में आगे कहा गया है कि इस अवसर पर मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और विभिन्न राज्यों के सहकारिता मंत्री सम्मानीय अतिथि होंगे। कांग्रेस में सभी सहकारी सेक्टरल क्षेत्रों में फैले सफलता की कहानी और सूचना एवं सहकारिता के अधिकार पर एक किताब रिलीज़ की जाएगी।

एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह ने कहा कि यह कांग्रेस भारत के सहकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी छवि निर्माण करनेवाली घटना होगी।

डा. चंद्रपाल सिंह ने बताया कि भारत सरकार के हाल के निर्णय जैसे सीवीसी के अधिकार क्षेत्र से सदस्यों, पदाधिकारियों के विस्तार संबंध से बहु राज्य सहकारी समितियों के कर्मचारी बहुत ही अधिक निराश है और उन्होंने इस निर्णय का जोरदार विरोध किया हैं।

उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के पदाधिकारी सहकारी समितियों के मामले में सर्वोच्च निकाय है जो कि सामान्य निकाय के सदस्यों के प्रति जवाबदेह हैं।

देश में 6 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं। सहकारिता ने 100% गांवों और 75% ग्रामीण घरों को कवर किया हुआ है। सहकारिता ने कृषि ऋण, आवास,चीनी, दूध, पर्यटन, मत्स्य, कताई, पर्यटन, उर्वरक जैसे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों के लगभग सभी क्षेत्रों में एक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

दूध सहकारी समितियों के महत्वपूर्ण योगदान के कारण भारत विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। अमूल, इफको और कृभको सहकारी क्षेत्र में सबसे बड़ी सफलता की कहानी है।

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सहकारी कांग्रेस के लिए एनसीयूआई तैयार

Posted on 12 April 2013 by ajayjha

सहकारी कांग्रेस का उद्घाटन करने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ की तैयारियाँ टॉप गियर में है। एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह इसे सहकारी दुनिया के लिए एक यादगार समारोह बनाना चाहते है।

भारतीय सहकारिता से बात करते हुए श्री यादव ने केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को धन्यवाद दिया जिन्होंने राष्ट्रपति भवन में उनके साथ जाकर इस सहकारी समारोह के लिए सहमति दिलवाने में मदद की।

“शरद जी का हाथ हमेशा हमारी मदद के लिए तैयार रहता है और उनका सहकारिता के प्रति रुख बहुत ही अच्छा है”,एनसीयूआई के अध्यक्ष ने भारतीय सहकारिता को बताया।

सही तारीख निश्चित किया जाना अभी बाकी है, हालांकि “भारत के राष्ट्रपति इस समारोह में भाग लेने के लिए सहमत हो गए है। इसे मई के अंतिम सप्ताह में आयोजित कर लिया जाएगा, “श्री यादव ने कहा।

कांग्रेस अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी को आकर्षित करने में सक्षम है। साथ ही हम आईसीए एशिया प्रशांत के बोर्ड की बैठक आयोजित करने की कोशिश कर रहे हैं”,श्री यादव ने कहा। पाठकों को याद होगा कि श्री चन्द्र पाल सिंह यादव ने पिछले साल चुनाव जीता था और वे आईसीए एशिया प्रशांत के मुखिया है।

प्रतिभागियों की बड़ी संख्या होने की संभावना के कारण समारोह के लिए बड़े से सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम को चुना गया है। लेकिन सेमिनार और सहकारी कार्यशालाएँ एनसीयूआई के सभागार में होगी।

पूरी दुनिया को हम भारत में सहकारी समितियों की सफलता की कहानी बताने के लिए तैयार है। हमारी सहकारी समितियाँ बहुत अच्छा कार्य कर रही हैं और हमें उनकी कहानियों का दुनिया भर में प्रसार करने की आवश्यकता है, उन्होंने कहा।

सहकारी क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सूचीबद्ध किया जाएगा और उनके समाधान के लिए एक ज्ञापन सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, उत्साह के साथ यादव ने भारतीय सहकारिता को बताया।

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