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एनसीयूआई ने सहकारी कांग्रेस की तारीख तय की

Posted on 20 April 2013 by ajayjha

भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने अंततः भारतीय सहकारी कांग्रेस के उद्घाटन की तारीख निर्धारित कर दी है। वह सिरी फोर्ट सभागार में 18 जून, 2013 को कांग्रेस का उद्घाटन करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार कांग्रेस की अध्यक्षता करेंगे।

कांग्रेस में सहकारी क्षेत्र की प्रगति और इस क्षेत्र की आकस्मिक समस्याओं के लिए दिशा निर्देशों की समीक्षा की जाएगी। कांग्रेस की थीम सहकारी उद्यम से बेहतर दुनिया का निर्माण करना है। कांग्रेस में विदेश से और देश भर से करीब 2000 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लिए जाने की संभावना है, ऐसा एनसीयूआई की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है।

रिलीज में आगे कहा गया है कि इस अवसर पर मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और विभिन्न राज्यों के सहकारिता मंत्री सम्मानीय अतिथि होंगे। कांग्रेस में सभी सहकारी सेक्टरल क्षेत्रों में फैले सफलता की कहानी और सूचना एवं सहकारिता के अधिकार पर एक किताब रिलीज़ की जाएगी।

एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह ने कहा कि यह कांग्रेस भारत के सहकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी छवि निर्माण करनेवाली घटना होगी।

डा. चंद्रपाल सिंह ने बताया कि भारत सरकार के हाल के निर्णय जैसे सीवीसी के अधिकार क्षेत्र से सदस्यों, पदाधिकारियों के विस्तार संबंध से बहु राज्य सहकारी समितियों के कर्मचारी बहुत ही अधिक निराश है और उन्होंने इस निर्णय का जोरदार विरोध किया हैं।

उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के पदाधिकारी सहकारी समितियों के मामले में सर्वोच्च निकाय है जो कि सामान्य निकाय के सदस्यों के प्रति जवाबदेह हैं।

देश में 6 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं। सहकारिता ने 100% गांवों और 75% ग्रामीण घरों को कवर किया हुआ है। सहकारिता ने कृषि ऋण, आवास,चीनी, दूध, पर्यटन, मत्स्य, कताई, पर्यटन, उर्वरक जैसे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों के लगभग सभी क्षेत्रों में एक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

दूध सहकारी समितियों के महत्वपूर्ण योगदान के कारण भारत विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। अमूल, इफको और कृभको सहकारी क्षेत्र में सबसे बड़ी सफलता की कहानी है।

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नागपुर में सबसे बड़ा कृषि-एक्सपो: पवार

Posted on 31 January 2013 by ajayjha

केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने मीडिया को बताया कि केन्द्र सरकार जल्द ही नागपुर में कृषि एक्सपो के आयोजन का इरादा रखती है। यह एक्सपो कृषि क्षेत्र में प्रगति को दर्शाएगा।

श्री पवार ने कहा कि एक्सपो किसानों के बीच जागरूकता को बढ़ाएगा।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार आगामी एक्सपो सबसे बड़ा होगा और यह नागपुर में होगा जो कि इस समारेह के लिए एक आदर्श स्थान होगा।

सरकार मध्य प्रदेश सरकार और नागपुर कृषि विश्वविद्यालय के साथ वार्ता के बाद अंतिम निर्णय लेगी।

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संसद में उर्वरक सब्सिडी पर पवार

Posted on 08 December 2012 by ajayjha

उर्वरकों की मूल्य वृद्धि  गंभीरता से अनाज उत्पादन के क्षेत्र में देश की उपलब्धि को प्रभावित कर रहा है, सरकार इस समस्या से निपटने के बारे में कोई वादा नही कर रही है।

कृषि मंत्री शरद पवार ने संसद के निचले सदन को बताया कि सरकार सब्सिडी की नीति जारी रखने के पक्ष में नहीं  है।

मंत्री ने लोकसभा में कहा कि हरित क्रांति के माध्यम से देश के पूर्वी राज्यों को जल्द ही उनकी कृषि क्षमता का इस्तेमाल करने की जरूरत है। देश के पूर्वी क्षेत्र में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए काफी गुंजाइश है, पवार ने उल्लेख किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने सांसदों को बताया कि देश में अनाज का उत्पादन नही घट रहा है। उन्होंने सदस्यों को सभी संभव प्रयास करके देश में कृषि को मजबूत बनाने का आश्वासन दिया। मंत्री ने पूर्वी क्षेत्र के कुछ राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ अनाज उत्पादन में नियमित रूप से प्रगति हुई है।

 

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राजू शेट्टी के प्रभाव को कम करने की कोशिश

Posted on 21 November 2012 by Manoj

  सहकारी चीनी कारखानें आंदोलनकारी किसानों के लिए अग्रिम के रूप में गन्ने की 2,500 रुपये प्रति टन की पेशकश की हैं।

पश्चिमी महाराष्ट्र के चीनी कारखानों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद महाराष्ट्र के वित्त मंत्री जे पाटिल ने इस्लामपुर में मीडिया को बताया।

गन्ना किसानों ने अग्रिम के रूप में 3000 रुपये प्रति टन की एक न्यूनतम मांग की है।   

सूत्रों का कहना है कि चीनी कारखानों के प्रमुखों की बैठक केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के इशारे पर बुलाई गई थी।

इस कदम से स्वाभिमान सहकारी संगठन के राजू शेट्टी के प्रभाव को कम करने का उद्देश्य है, सूत्रों का कहना है।

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मारवाह पवार का आशीर्वाद चाहते है

Posted on 06 November 2012 by parasnath

छह सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल  विश्व शांति विकास और अनुसंधान फाउंडेशन (डब्ल्यूपीडीआरएफ) छः-छः सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल  संदीप मारवाह के नेतृत्व में राजधानी में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से मिला। 

नोएडा में मारवाह स्टूडियो के मालिक संदीप मारवाह ने सहकारी आंदोलन के लिए नया प्यार विकसित करके अंतर्राष्ट्रीय सहकारी वर्ष में विश्व सहकारी सम्मेलन आयोजित करने का फैसला किया है। उनके नोएडा रेडियो पर अक्सर एनसीयुआई के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्यक्रमों में शामिल होते रहते हैं।

सहकारी समितियों पर 5 और 6 दिसंबर को नई दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की विभिन्न योजनाओं से मंत्री महोदय को अवगत कराया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने इफको फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक “कॉनवल्सिंग इंडिया विद कॉपरेशन” की एक प्रतिलिपि मंत्रीजी को प्रस्तुत की।

मंत्री महोदय ने फाउंडेशन द्वारा एकजुट करने और सहकारी आंदोलन को सम्मेलनों और दुनिया भर में विविध अन्य गतिविधियों के माध्यम से मजबूत बनाने के प्रयासों की सराहना की।

श्री पवार ने विशेष रूप से दिल्ली में आयोजित होने वाले आगामी सम्मेलन की सफलता की कामना की।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में उपाध्यक्ष आर.के. सिंह, महासचिव चंद्रकांत खराडे पाटिल, समन्वयक डॉ. शोभा कुलश्रेष्ठ, रेडियो नोएडा के ब्रह्म प्रकाश, और अंतर्राष्ट्रीय सहकारी एलायंस एशिया-पैसिफिक के सलाहकार एवं पूर्व निदेशक डॉ. दमन प्रकाश शामिल है। डॉ. प्रकाश इफको के प्रचारक थे अब वह इफको फाउंडेशन की गतिविधियों में शामिल रहते है।

एनसीयुआई  जो कि अब तक वैश्व सहकारी सम्मेलन को आयोजित करने के लिए तारीखों की घोषणा करती रही है लेकिन कामयाबी के बिना अब मारवाह की योजना का समर्थन कर रही है।

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अमूल ने हरियाणा में नए संयंत्र स्थापित किए

Posted on 27 October 2012 by parasnath

केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने मशहूर जीसीएमएमएफ के बारे में कहा कि अमूल सहकारी समितियों के लिए रोल मॉडल है और यह आवश्यकता के अनुसार अपने व्यापार में विस्तार करके देश में सहकारी आंदोलन को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर सकता हैं। हाल ही में हरियाणा के दारुहेरा में अमूल संयंत्र का उद्घाटन समारोह में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा।

अमूल अभेद्य उत्कृष्टता के साथ बहु राज्य सहकारी मॉडल के तहत देश भर में आगे बढ़ने के साथ एक बार फिर से डेयरी विकास में एक बड़ी उपलब्धी का कारण बन सकता है, पवार ने कहा।

जीसीएमएमएफ भारत के सबसे सफल डेयरी सहकारी है। हाल के वर्षों में यह गुजरात की सीमाओं से परे व्यापार का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है और यह एक बहुत ही सकारात्मक विकास है। ऐसा देश की सर्वोच्च सहकारी संगठनों को देख रहे सूत्रों का कहना है।

सूत्रों का कहना है कि अमूल के नए संयंत्र मुख्य रूप से दिल्ली–एनसीआर के बाजार की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से लगाए जा रहे है। संयंत्र विशाल राशि के साथ स्थापित किया जा रहा है, सूत्रों ने कहा।

जीसीएमएमएफ के अध्यक्ष विपुल चौधरी ने भी उद्घाटन समारोह में भाग लिया उन्होंने कहा कि नए संयंत्र से अमूल की क्षमता में वृद्धि होगी और इसके साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में व्यापार के अवसरों को बढ़ाने में मददगार होगा।

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संविधान संशोधन: एनसीयुआई की आँखे खुली

Posted on 25 August 2012 by ajayjha

भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयुआई) का एक दल और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने गुरुवार को संविधान संशोधन विधेयक को लोकप्रिय बनाने और अन्य मुद्दों पर बातचीत के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से मुलाकात की। सहकारिता को मौलिक अधिकारों की सूची में शामिल करना भी बातचीत का एक अहम मुद्दा था।

भारतीय सहकारिता से बात करते हुए एनसीयुआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि,”हमने शरद पवार जी से मुलाकात की और ऐतिहासिक संशोधन के कार्यान्वयन के लिए होने वाले राष्ट्रीय सेमिनार के अवसर पर उनकी उपस्थिति की मांग की। उन्होने हमारे निमंत्रण को स्वीकार करके काफी दरियादिली दिखाई।”

सेमिनार को नई दिल्ली में 12 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा और राज्यों से प्रतिभागियों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।

“हमने राज्यों के सहकारी मंत्रियों, राज्यों के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, सहकारी निकायों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को आमंत्रित किया हैं। यह आयोजन राज्य के कानूनों में आवश्यक परिवर्तन और उस सहकारी संशोधन अधिनियम, 2009 के प्रावधानों को राज्यों में जल्दी लागू करने पर विचार करने के लिए आयोजित किया गया हैं”, डॉ. दिनेश ने कहा।

संविधान (111th) विधेयक, 2009 ने अधिकार दिया है कि चुनाव आयोग की तर्ज पर एक विशेष एजेंसी की स्थापना  की जाय  जो  सहकारी समितियों के चुनाव का संचालन कर सके।

यदि बिल को ईमानदारी से लागू किया जाता है तो व्यावसायिकता और लोकतंत्रीकरण के इस युग में सहकारी आंदोलन और अधिक मजबूत होगा। लेकिन राज्य सरकारें इस ऐतिहासिक बिल का छह महीने पहले पारित होने के बाद में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।

बिल के महत्वपूर्ण प्रावधानों में शामिल है (1) सहकारी समितियों का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, (2) सहकारिता एजेंसियों के चुनावों की देखरेख करना, (3) सहकारी बोर्ड के निदेशकों के कार्यकाल में एकरूपता और (4) विनियमन और सदस्य नियंत्रण लोकतांत्रिक सिद्धांतों के आधार पर सहकारी समितियों के समापन, सदस्य आर्थिक भागीदारी और स्वायत्त कामकाज।

उल्लेखनीय है कि कई राज्यों जैसे तमिलनाडु और महाराष्ट्र की सहकारी समितियों में चुनाव सालों से आयोजित नहीं किए गए है। इसके अलावा उत्तरप्रदेश और ओडिशा के कई मामलों में नए राजनीतिक शासन में निर्वाचित बोर्ड उनकी अवसरवादिता के  शिकार हुए है।

कॉपरेटरर्स ने राज्यों द्वारा संशोधन विधेयक के कार्यान्वयन की देखरेख के लिए एनसीयुआई से टास्क फोर्स के गठन की मांग की है। एनसीयुआई अब अपनी जिम्मेदारी के प्रति सचेत है!

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इफको और कृभको को स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करने देना चाहिए: शिवपाल

Posted on 26 July 2012 by dipakkumar

उत्तर प्रदेश सहकारी मंत्री शिवपाल यादव का कहना है कि राज्य में किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए उर्वरक की पर्याप्त आपूर्ति नहीं है।

मंत्री ने दोहराया है कि इफको और कृभको को आयातित यूरिया के आवंटन का काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए, जैसा कि उन्होंने राज्य में उर्वरक के वितरण का कार्य अतीत में भी किया  है। इस तरीके से राज्य में यूरिया की कमी की आपूर्ति को पूरा किया जा सकता है, मंत्री ने कहा।

उन्होंने केन्द्रीय सरकार को उर्वरकों की तत्काल आपूर्ति के लिए राज्य की मदद करने को कहा हैं। उत्तर प्रदेश के मंत्री ने इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को एक पत्र लिखा है।

शिवपाल यादव के अनुसार, उर्वरकों की कुल राशि का पचास प्रतिशत सहकारी निकायों के माध्यम से वितरित किया जाता है। इफको और कृभको को अभी तक उर्वरकों का पर्याप्त आवंटन नहीं मिला है। 1.99 लाख मीट्रिक टन की मामूली खेप ही उन्हें दी गई है जो राज्य में मांगों को पूरा करने के लिए बहुत कम है। उत्तर प्रदेश में बिना देरी के कम से कम 3.3 लाख मीट्रिक टन की जरूरत है, मंत्री ने कहा।

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एनसीयुआई अध्यक्ष ने प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियाँ सौंपी

Posted on 19 July 2012 by ajayjha

एनसीयुआई अध्यक्ष ने अंतत: केंद्रीय कृषि सचिव को एक पत्र लिखा है जिसके लिए कृषि मंत्रालय ने सबसे बड़े सहकारी संगठन ने एक साल से भी अधिक तक शिकंजा कसे हुए है।

अपने पत्र में एनसीयुआई अध्यक्ष चन्द्र पाल सिंह यादव प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियाँ सौंपने के लिए सहमत हो गए है।

भारतीय सहकारिता डॉट कॉम से बात करते हुए एनसीयुआई  के मुख्य कार्यकारी डॉ. दिनेश ने पुष्टि की है कि पत्र भेज दिया गया था लेकिन जब इसके कंटेंट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा “मैं नहीं जानता कि उन्होंने क्या लिखा है। यह उनके और मंत्रालय के बीच की बात है। अब तक मैं निश्चिंत हूँ, मैं गवर्निंग काउंसिल और अध्यक्ष के मार्गदर्शन के अंतर्गत काम करता रहूँगा।”

हालांकि, पाठकों को डॉ. दिनेश के एक सप्ताह पहले ही व्यक्त शब्द याद होंगे। उन्होंने भारतीय सहकारिता को दिए गए साक्षात्कार में एनसीयुआई और मंत्रालय के बीच रिश्ते बहाल होने के बारे में बात की थी।

पिछले हफ्ते की बैठक वास्तव में महत्वपूर्ण थी, जिसके बारे में भारतीय सहकारिता डॉट कॉम ने अपने पाठकों को सूचित किया था। इस बैठक में चन्द्रपाल ने शक्तियां सौंपने के क्रम में एक वित्तीय  संकट से एनसीयुआई को उबारने का फैसला किया।

सूत्रों के अनुसार, एनसीयुआई क्षेत्र परियोजना में बिना वेतन के महीनों से काम कर रहे कर्मचारियों की दुर्दशा ने चन्द्रपाल को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। चन्द्रपाल ने केंद्रीय मंत्री शरद पवार के साथ अपनी बैठक में कर्मचारियों के हित में हस्तक्षेप की मांग की थी। उनकी स्थिति की मजबूरी का लाभ उठाते हुए, मंत्रालय के बाबुओं ने उससे कहा कि उन्हें अपनी शक्तियों को खत्म करने के लिए कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने होंगे। जब वह सिरी फोर्ट रोड पर अपने कार्यालय में लौट रहे थे तब वह जानते थे कि उन्होंने सब खो दिया है।

जल्दी ही एनसीयुआई को अब धन मिलना शुरु हो जाएगा, एनसीयुआई के एक निदेशक ने सूचित किया। लेकिन क्या यह समझ से परे नही है कि सबसे बड़ा सहकारी संगठन सत्ताशील-बाबुओं की गोद में जा बैठेगा।

पहले कुछ अवसरों पर शक्तियों के मुद्दे को लेकर शासी परिषद की बैठकों में विरोध किया था की निर्वाचित प्रमुख सर्वोपरि होते है।

लेकिन मंत्रालय ने निरंतर धन को रोककर  दबाव बनाकर अध्यक्ष को मजबूर कर दिया, और यह यादव की लाचारी को और भी गहरा कर दिया।

अब उनकी जीत से एनसीयुआई के तत्काल भविष्य के हिसाब से तो उनकी जीत हुई है, लेकिन उन्होंने सहकारी आंदोलन के भविष्य के संदर्भ वे हार गए है।

यह अनुभव एक सबक भी सिखाता है कि अगर आप बाबुओं के सामने इज्जत से खड़ा होना चाहते हैं तो आपको आर्थिक रूप से सक्षम होना चाहिए। सहकारी आंदोलन पूरी दुनिया में व्याप्त है लेकिन ये सरकारी प्रयासों का फल नही है, यह लोगों की उपलब्धि है।

 

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मानसून के बावजूद निर्यात जारी: पवार

Posted on 16 July 2012 by parasnath

भारत सरकार कृषि वस्तुओं के निर्यात को जारी रखेगी हालांकि मानसून कमजोर है। राजधानी में संवाददाताओं से बात करते हुए, केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि लाखों टन गेहूं और अन्य अनाज घरेलू मांग से अधिक उपलब्ध है और इनको आसानी से निर्यात किया जा सकता है।

देश में अभी खाद्यान्न का स्टॉक विशाल है और चिंता का कोई कारण नहीं है, श्री पवार ने कहा।

सूत्रों का कहना है कि हाल ही में 2 मिलियन टन गेहूं का नियंत्रण किया गया ताकि भंडारण सुविधाओं पर दबाव कम किया जा सकें। पिछले साल सितंबर में, सरकार गैर-बासमती चावल और गेहूं के निर्यात से प्रतिबंध हटा ली थी।

श्री पवार के अनुसार, हाल में मानसून में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ भागों में अभी भी मानसून की स्थिति अनिश्चित है। बारिश की कमी के कारण देश के कुछ हिस्सों में कुछ मोटे अनाजों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, मंत्री ने कहा।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष 23 प्रतिशत कम वर्षा होने की संभावना है और इससे देश की अर्थव्यवस्था के लिए कई कठिनाईयाँ सामने आ सकती है, कम वर्षा से निश्चित रूप से एक उच्च आर्थिक वृद्धि प्राप्त करने की भारत की कोशिश को धक्का लग सकता है।

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