शुक्रवार को केवल एक फैसला ही नहीं आएगा बल्कि एनसीयुआई अध्यक्ष के साथ सबसे बड़ी सहकारी समिति का भविष्य भी इस पर टिका है।
लंबे अदालती मामले में आज सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों में मुकदमा जीतने का दावा किया है।
पाठकों को याद होगा राजेंद्र शर्मा ने चन्द्रपाल सिंह को सरकार नियुक्त पंच की अदालत में चुनौती दी थी, बाद में अध्यक्ष ने इसके खिलाफ अदालत में अपील की।
एनसीयुआई अध्यक्ष के वकील ने भारतीय सहकारिता से बात करते कहा कि “मैं उनका वकील हूँ और मैं कह रहा हूँ कि यह अध्यक्ष के लिए एक मजबूत मामला है इसके अलावा अभी कोई अन्य जवाब नहीं दे सकता।
मामले पर प्रकाश डालते हुए वकील वी.पी. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी महासंघों के बारे में भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघों के लिए इफको, कृभको, नेफेड और एनसीसीएफ प्रतिनिधि उनके योगदान पर आधारित है।
ये प्रतिनिधि नामित नहीं बल्कि मूल सहकारी समितियों से है इसलिए उन्हें नामित किया गया हैं ऐसा सही नहीं है, श्री सिंह ने तर्क दिया।
गुरुवार को एनसीयुआई शासी परिषद की बैठक में एनसीयुआई पर वित्तीय संकट आने से एक छोटा धमाका साबित होगा।
अध्यक्ष के खिलाफ मामले लंबित रहना समस्याग्रस्त एनसीयुआई के लिए घातक हो सकता है। उम्मीद है कि एनसीयुआई इस वर्ष सहकारी अंतर्राष्ट्रीय वर्ष में अपेक्षित प्रगति के साथ आगे बढ़ सकेगा।