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मध्य प्रदेश में सियासी हलचल के बीच, राज्य के डीसीसीबी बैंकों से बर्खास्त सहकारी नेताओं में उम्मीद की एक किरण जगी है। दरअसल, कमलनाथ सरकार ने मनमाने ढंग से इन बैंकों के बोर्ड को सुपरसीड कर अपने नेताओं के हाथ में इन बैंकों की कमान सौंपी है जिससे बर्खास्त सहकारी नेता काफी निराशा हैं।
इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुये मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ के पूर्व अध्यक्ष अरुण सिंह तोमर ने कहा कि बीजेपी के लिए राज्य में सरकार बनाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है और बीजेपी के नेतृत्व वाली नयी सरकार बनने जा रही है जिससे हम काफी खुश है क्योंकि कांग्रेस सरकार हमारे मुद्दों को संबोधित करने में असफल रही है”।
“हम उम्मीद कर रहे हैं कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद सहकारी समितियों के चुनाव जल्द ही कराये जाएंगे”, तोमर ने कहा।
तोमर ने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार का अपने नेताओं को डीसीसीबी में प्रशासक के रूप में नियुक्त करने के प्रयास पर अब विराम लगेगा। भाजपा से जुड़े राज्य की स्थानीय सहकारी समितियों के कई नेता इस विकास को राज्य में सहकारी आंदोलन के लिए एक गेम चेंजर के रूप में देख रहे हैं।
मध्य प्रदेश में सियासी हलचल ने राज्य सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह के लिए भी समस्या पैदा कर दी है, जो दिग्विजय सिंह– कमल नाथ गुट के कहे जाते हैं। उल्लेखनीय है कि इफको बोर्ड के सदस्य अमित प्रताप सिंह, गोविंद सिंह के पुत्र हैं।
“भारतीयसहकारिता” से बात करते हुए मप्र के कई सहकारी नेताओं ने कहा, “सत्ता संभालने के बाद कांग्रेस ने राज्य में सहकारी आंदोलन के विकास के लिये कुछ नहीं किया। सबसे पहले, उन्होंने इन बैंकों में केवल अपने नेताओं को नियुक्त करने के लिए राज्य के डीसीसीबी के बोर्ड को निलंबित कर दिया।
दूसरी ओर भाजपा सरकार के समय से ही लंबित सहकारिता के चुनाव कराने में कांग्रेस सरकार विफल रही। अब तक, कांग्रेस सरकार ने चुनाव कराने के लिए कोई पहल नहीं की थी और तीसरी ओर सहकारिता राज्य मंत्री गोविंद सिंह भी राज्य में सहकारिता से जुड़े मुद्दों को हल करने में असफल रहे, उन्होंने कहा।
सहकारिता के बारे में पूरी चर्चा तब शुरू हुई जब कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कहा कि उनके साथ लगभग 20 विधायक भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
इस बीच, “भारतीयसहकारिता” संवाददाता से बात करते हुये, अमित प्रताप सिंह ने कहा, “मेरे पिता (गोविंद सिंह- लहार से विधायक और सहकारिता मंत्री) एक कट्टर कांग्रेसी है। उन्होंने कहा कि वह निकट भविष्य में भाजपा या किसी अन्य पार्टी में शामिल नहीं होंगे।
कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले कई नेताओं पर टिप्पणी करते हुए, इफको के निदेशक अमित सिंह ने कहा, “अगर आज फिर से चुनाव होते हैं, तो कई बागी विधायक चुनाव जीतने में असफल रहेंगे। इन बागी विधायकों ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस लहर पर चुनाव जीता था”।