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सहकारी बैंकों ने कमाया मुनाफा, लेकिन एनपीए अब भी चिंता का विषय: वित्त राज्य मंत्री

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड के आंकड़ों का हवाला देते हुए सहकारी बैंकों की मौजूदा वित्तीय स्थिति पर जानकारी दी।

31 दिसंबर 2024 तक, शहरी सहकारी बैंकों की कुल संपत्ति 7,20,141 करोड़ रुपये और कुल जमा 5,59,954 करोड़ रुपये रही। इन बैंकों ने 4,130 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। पूंजी पर्याप्तता अनुपात 17.5%, सकल एनपीए अनुपात 9.2% और शुद्ध एनपीए अनुपात 3.7% रहा।

31 मार्च 2024 तक, राज्य सहकारी बैंकों की कुल संपत्ति 4,88,266 करोड़ रुपये और कुल जमा 2,56,819 करोड़ रुपये रही। इन बैंकों ने 2,691 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। इनका सीआरएआर 12.9%, सकल एनपीए अनुपात 4.9% और शुद्ध एनपीए अनुपात 2.0% दर्ज किया गया।

इसी अवधि में, जिला सहकारी बैंकों की कुल संपत्ति 7,65,577 करोड़ रुपये और कुल जमा 4,76,610 करोड़ रुपये रही। इन बैंकों का शुद्ध लाभ 1,894 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। सीआरएआर 11.9%, सकल एनपीए अनुपात 8.9% और शुद्ध एनपीए अनुपात 3.4% रहा।

बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 के तहत, आरबीआई को सहकारी बैंकों के प्रबंधन, लेखा परीक्षा, पूंजी और विलय से जुड़े मामलों में अधिक अधिकार दिए गए हैं। ये प्रावधान 26 जून 2020 से शहरी सहकारी बैंकों पर लागू हैं।

बैंकों में धोखाधड़ी रोकने के लिए, आरबीआई ने “फ्रॉड मैनेजमेंट मास्टर डायरेक्शन (2024)” जारी किया है, जिसमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। साथ ही, “प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन फ्रेमवर्क” लागू किया गया है, जिससे कमजोर वित्तीय स्थिति वाले यूसीबी के लिए समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस (डीआईसीजीसी) लागू किया गया है। वहीं, आरबीआई “आरबीआई कहता है” जैसे जन-जागरूकता अभियान चला रहा है, ताकि लोग वित्तीय धोखाधड़ी से सतर्क रह सकें।

इसके अतिरिक्त, नाबार्ड ने धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुसार सहकारी बैंकों को किसी भी वित्तीय अनियमितता की सूचना तुरंत प्रवर्तन एजेंसियों को देनी होगी, जिससे समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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